भोपाल: अनबिकमिंग को लेकर देशभर में जारी चर्चाओं के बीच लेखक कार्तिकेय वाजपेयी ने भोपाल में मीडिया से संवाद किया। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया द्वारा प्रकाशित उनके पहले उपन्यास अनबिकमिंग की विशेषता यह है कि इसमें परम पावन 14वें दलाई लामा और स्वामी सर्वप्रियानंद की भूमिका (Foreword) शामिल है। इस संवाद में पुस्तक के पीछे की प्रेरणा, कार्तिकेय की व्यक्तिगत यात्रा और उस मूल प्रश्न पर चर्चा हुई जिसे यह उपन्यास सामने रखता हैजब सफलता की निरंतर दौड़ जीवन में संतुष्टि नहीं दे पाती, तब आगे क्या?

वकील, वक्ता और पूर्व राज्य स्तरीय क्रिकेटर रहे कार्तिकेय वाजपेयी ने उन अनुभवों को साझा किया जिन्होंने अनबिकमिंग को आकार दिया। उन्होंने कानून, खेल और दर्शन की अपनी यात्रा से जुड़े प्रसंगों के माध्यम से उपन्यास के विचारों पर प्रकाश डाला। बातचीत में महत्वाकांक्षा, सफलता, अहंकार और स्वयं की गहरी पहचान की खोज जैसे विषय प्रमुख रहे।

मीडिया संवाद के दौरान कार्तिकेय वाजपेयी ने कहा,

"सार्थक परिवर्तन के लिए दुनिया से दूर भागना ज़रूरी नहीं है। इसकी शुरुआत भीतर की ओर मुड़ने और उस रिश्ते से दोबारा जुड़ने से होती है, जिसे हम अक्सर सबसे ज़्यादा नज़रअंदाज़ कर देते हैंअपने आप से रिश्ता। अनबिकमिंग 'कुछ बनते रहने' की उस निरंतर दौड़ से आगे बढ़ने का विचार हैजहाँ हम उपलब्धियाँ, पहचान और सफलता हासिल करने में लगे रहते हैंऔर उसकी जगह स्वयं के साथ एक गहरा संबंध विकसित करते हैं।"

यह उपन्यास एक प्रसिद्ध क्रिकेटर की कहानी है, जो सफलता के आधार पर बनाई गई अपनी पूरी पहचान के बिखरने का सामना करता है। उसकी यात्रा के माध्यम से यह पुस्तक पहचान, उद्देश्य और बाहरी उपलब्धियों से परे सार्थक जीवन जीने के अर्थ को तलाशती है। मीडिया संवाद के दौरान पत्रकारों ने पुस्तक के विषयों, उसके प्रकाशन के बाद मिली प्रतिक्रिया और कार्तिकेय के वकालत और क्रिकेट से लेखन तक के सफर पर भी विस्तार से चर्चा की।

कार्तिकेय वाजपेयी इन विषयों को अपने पॉडकास्ट इनसाइट आउट के माध्यम से भी आगे बढ़ाते हैं, जहाँ वे विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, महत्वाकांक्षा, असफलता, उद्देश्य, नेतृत्व और रिश्तों जैसे विषयों पर संवाद करते हैं।

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