एवीएस न्यू. भोपाल

दुनिया भर में न्यूरोलॉजिकल बीमारियां दिव्यांगता की सबसे बड़ी वजहों में हैं और पिछले कई दशकों में इनका बोझ तेजी से बढ़ा है। भारत में इन रोगों का लगभग 10% हिस्सा इसी तरह की बीमारियों से जुड़ा है। गुरुग्राम स्थित मेदांता -द मेडिसिटी, जिसे लगातार 6 वर्षों से न्यूजवीक द्वारा देश का सर्वश्रेष्ठ निजी अस्पताल चुना गया है, अब डीप ब्रेन स्टिमुलेशन (DBS) -- जिसे ‘ब्रेन-पेसमेकर सर्जरी’ के नाम से भी जाना जाता है – के माध्यम से ऐसे मरीजों के लिए नई उम्मीद लेकर आया है जो जटिल न्यूरॉलॉजिकल समस्याओं के साथ जीवन जी रहे हैं।

न्यूरोस्टिमुलेशन की ये सर्जरी मेदांता गुरुग्राम के इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरोसायंसेस के डायरेक्टर, न्यूरोसर्जरी डॉ. अनिर्बन दीप बनर्जी द्वारा की जाती है। DBS एडवांस्ड स्टेज वाले पार्किंसंस रोग, डिस्टोनिया, वयस्कों में होने वाली रिफ्रैक्टरी एपिलेप्सी, एसेंशियल ट्रेमर तथा एडवांस्ड OCD के मरीजों को राहत देने के लिए जाना जाता है।

मेदांता में दिए जाने वाले इस व्यापक इलाज की व्यवस्था में अत्याधुनिक तकनीक और व्यक्तिगत देखभाल का संतुलन है। देश के प्राइवेट मल्टी स्पेशियलिटी वाले सबसे बड़े, प्रमुख तृतीय और चतुर्थ स्तरीय स्वास्थ्य संस्थानों में शामिल मेदांता, दिमाग के प्रभावित हिस्सों को लेकर सटीक रूप से पहचानने के लिए उन्नत इमेजिंग तकनीक का उपयोग करता है। इसके अंतर्गत दिमाग में दिशा संबंधी सटीक लीड्स के माध्यम से मल्टी डाइमेंशनल न्यूरोमोड्यूलेशन और रीयल-टाइम ब्रेन सेन्सिंग बायोमार्कर फीडबैक जैसी आधुनिक सुविधाएं शामिल हैं, जिससे मरीज के लक्षणों के हिसाब से प्रतिक्रिया देने वाला स्टिमुलेशन दिया जाता है।

डॉ. अनिर्बान दीप बैनर्जी ने कहा, “DBS जैसी उन्नत सर्जरी कई मरीजों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है लेकिन निचले और मध्यम आय वाले देशों में इसकी पहुंच अभी भी चुनौती है। मेदांता में हमारा उद्देश्य अत्याधुनिक DBS के इलाज को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचाना है, ताकि जब दवाइयां और पारंपरिक इलाज का असर न हो तो भी मरीज सामान्य जीवन जी सकें। DBS या ब्रेन-पेसमेकर सर्जरी में मस्तिष्क के प्रभावित हिस्सों में सूक्ष्म इलेक्ट्रोड लगाए जाते हैं, जो असामान्य संकेतों को नियंत्रित करते हैं और मरीज की चाल-ढाल तथा दैनिक जीवन की क्षमता को काफी हद तक बहाल करते हैं।”