एवीएस न्यूज .मुंबई 
 वैश्विक व्यापार का स्वरूप भू-राजनीतिक बदलावों, बदलती सप्लाई चेन, तकनीकी विकास और सतत विकास की जरूरतों के कारण तेजी से बदल रहा है। ऐसे दौर में भारत के पास एक विश्वसनीय वैश्विक व्यापार साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करने का बड़ा अवसर है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का निर्यात 860 अरब अमेरिकी डॉलर के पार पहुंच गया है। यह बात CII ग्लोबल ट्रेड सिनेरियो समिट में CII वेस्टर्न रीजन के चेयरमैन और ब्लू स्टार लिमिटेड के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर वीर अडवाणी ने कही।


उन्होंने कहा कि वैश्विक व्यापार में आगे बढ़ने के लिए भारत को लचीलापन, नवाचार, निर्यात विविधीकरण और मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों पर जोर देना होगा। उन्होंने कहा कि बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में मजबूत सप्लाई चेन और प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स व्यवस्था भारत की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।

877 किलोमीटर लंबी तटरेखा महाराष्ट्र की ताकत

महाराष्ट्र मैरीटाइम बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रदीप पी., आईएएस ने कहा कि व्यापार लागत कम करने और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए दक्ष बंदरगाह और आधुनिक समुद्री बुनियादी ढांचा बेहद जरूरी है। महाराष्ट्र के पास 877 किलोमीटर लंबी समुद्री तटरेखा, मजबूत औद्योगिक आधार और रणनीतिक कनेक्टिविटी है। ऐसे में राज्य को देश के प्रमुख समुद्री और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि वधावन पोर्ट, दिघी शिपबिल्डिंग क्लस्टर, मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी तथा स्मार्ट और ग्रीन पोर्ट जैसी परियोजनाएं महाराष्ट्र के समुद्री क्षेत्र को भविष्य के लिए तैयार कर रही हैं। इन परियोजनाओं से व्यापार और निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार के अवसर पैदा होंगे और सतत आर्थिक विकास को गति मिलेगी।

लॉजिस्टिक्स लागत घटाने पर जोर

CII वेस्टर्न रीजन की इंटरनेशनल ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट सब-कमेटी के चेयरमैन एवं कॉन्टिनेंटल कैरियर्स प्राइवेट लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर वैभव वोहरा ने कहा कि वधावन पोर्ट और दिघी शिपबिल्डिंग क्लस्टर जैसी परियोजनाओं के जरिए महाराष्ट्र एक प्रमुख समुद्री हब के रूप में उभर सकता है।

उन्होंने कहा कि मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी, स्मार्ट एवं ग्रीन पोर्ट संचालन और शिपबिल्डिंग क्षमता पर फोकस से महाराष्ट्र भारत की वैश्विक व्यापार प्रतिस्पर्धा को मजबूत कर सकता है। साथ ही इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम करने और देश के निर्यात को अधिक प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद मिलेगी।

समिट में वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत समुद्री बुनियादी ढांचा, आधुनिक बंदरगाह और बेहतर कनेक्टिविटी भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम बनाएंगे।