आरईसी पावर डेवलपमेंट एंड कंसल्टेंसी लिमिटेड (आरईसीपीडीसीएल) ने महाराष्ट्र की राज्यांतर्गत बिजली ट्रांसमिशन परियोजना से संबंधित कंपनी 'मुसलगांव पावर ट्रांसमिशन लिमिटेड' का हस्तांतरण सफल बोलीदाता 'महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड' को कर दिया है। यह हस्तांतरण 9 सितंबर को संपन्न हुआ। लगभग 560 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना को 12 माह की समयावधि में पूर्ण करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

इस परियोजना के अंतर्गत मुसलगांव में 220/132/33 केवी क्षमता का नया विद्युत उपकेंद्र निर्मित किया जाएगा। इसके अतिरिक्त मुसलगांव से बाबलेश्वर एवं रेमंड तक लगभग 111 किलोमीटर लंबी 220 केवी डबल सर्किट लाइन तथा मुसलगांव से सिन्नर तक लगभग 13 किलोमीटर लंबी 132 केवी डबल सर्किट लाइन बिछाई जाएगी। इस परियोजना हेतु आरईसीपीडीसीएल द्वारा शुल्क-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया आयोजित की गई थी। परियोजना का विकास 'बिल्ड, ओन, ऑपरेट एंड ट्रांसफर' (BOOT) मॉडल पर किया जाएगा।

आरईसी ने जारी किया देश का पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड

आरईसी लिमिटेड ने भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के रेगुलेटरी सैंडबॉक्स के अंतर्गत भारत का पहला टोकनाइज्ड कॉरपोरेट बॉन्ड सफलतापूर्वक जारी किया है। इस प्रायोगिक (पायलट) योजना के माध्यम से संस्थान ने 500 करोड़ रुपये जुटाए हैं। इस बॉन्ड हेतु निवेशकों से कुल 796 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं। आरईसी ने 1 वर्ष 9 माह की परिपक्वता अवधि वाले इस बॉन्ड पर 7.30 प्रतिशत वार्षिक ब्याज दर निर्धारित की है।

इसकी संपूर्ण प्रक्रिया एनएसई (NSE) के इलेक्ट्रॉनिक प्लेटफॉर्म पर पूर्ण की गई। संस्थान के अनुसार, टोकन प्रणाली के प्रयोग से बॉन्ड के आवंटन, भुगतान और शेयर बाजार में सूचीबद्धीकरण की प्रक्रिया एक ही दिवस में संपन्न हो गई। इन बॉन्ड्स को एनएसई एवं बीएसई पर सूचीबद्ध कराया गया है, जो देश के बॉन्ड बाजार में नवीन तकनीक के समावेश की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।

2030 तक 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है भारतीय पुस्तक बाजार

भारत का पुस्तक प्रकाशन उद्योग वर्ष 2030-31 तक बढ़कर लगभग दो लाख करोड़ रुपये का आकार ले सकता है। फेडरेशन ऑफ इंडियन पब्लिशर्स (FIP) ने नीलसनआईक्यू बुकडाटा के सहयोग से 'इंडिया बुक मार्केट रिपोर्ट 2026-2030' जारी की है। इस रिपोर्ट में देश के तीव्र गति से बढ़ते प्रकाशन क्षेत्र की संभावनाओं का मूल्यांकन किया गया है।

अध्ययन के अनुसार, मुद्रित पुस्तकों के साथ-साथ डिजिटल, शैक्षणिक पठन-पाठन तथा क्षेत्रीय भारतीय भाषाओं की पठन सामग्री की बढ़ती मांग इस वृद्धि का प्रमुख आधार है। रिपोर्ट में लेखकों और प्रकाशकों के बौद्धिक संपदा अधिकारों (कॉपीराइट) की सुरक्षा को भी अत्यंत महत्वपूर्ण बताया गया है। नीलसनआईक्यू बुकडाटा के कार्यकारी निदेशक विक्रांत माथुर के अनुसार, यह रिपोर्ट देश के प्रकाशन क्षेत्र में उपलब्ध नए अवसरों और इसके भविष्य के ढांचे को समझने में सहायक सिद्ध होगी।