मोहम्मद नबील पर उठे सवाल, मदरसे में रहता था अलग-थलग; एक साल पहले पहुंचा था देवबंद
आजमगढ़| आतंकी संगठन अलकायदा इन इंडियन सब-कॉन्टिनेंट (AQIS) की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के आरोप में यूपी एटीएस द्वारा गिरफ्तार किए गए मोहम्मद नबील के संबंध में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं। जांच में पता चला है कि लगभग एक वर्ष पूर्व वह देवबंद गया था। एटीएस अब यह पता लगाने में जुटी है कि उसकी देवबंद यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था। दीदारगंज थाना क्षेत्र के ग्राम चितारा महमूदपुर निवासी नबील गांव में लोगों से अधिक मेलजोल नहीं रखता था और अपने मकान की ऊपरी मंजिल पर अकेले रहता था। उसकी गिरफ्तारी के पश्चात गांव में पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
नबील के पिता दानिश वर्तमान में सऊदी अरब में कार्यरत हैं। नबील अपने दादा-दादी के साथ गांव में रहता था, जबकि उसकी मां अपनी पुत्रियों के साथ फूलपुर स्थित मायके में रहती हैं।
तीन वर्ष पूर्व पूर्ण किया था हिफ्ज का कोर्स
स्थानीय निवासियों के अनुसार, नबील की प्रारंभिक धार्मिक शिक्षा फूलपुर स्थित बाबू मदरसे में हुई थी, जहां उसने लगभग तीन वर्ष पूर्व हिफ्ज का कोर्स पूरा किया था। इसके उपरांत वह सरायमीर के मदरसा मदरतुल इस्लाम में अध्ययनरत था। पड़ोसियों का कहना है कि उसकी सामान्य गतिविधियों से किसी आपराधिक पृष्ठभूमि या बड़े विवाद का अंदेशा नहीं होता था।
सीसीटीएनएस (CCTNS) पोर्टल पर उपलब्ध विवरण के अनुसार, नबील के परिवार का कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं मिला है। एटीएस वर्तमान में नबील के डिजिटल उपकरणों, सोशल मीडिया खातों और संपर्कों की गहनता से पड़ताल कर रही है। एसपी ग्रामीण चिराग जैन ने बताया कि सुरक्षा की दृष्टि से उसके आवास के समीप पुलिस बल तैनात किया गया है।
साढ़े तीन महीने के भीतर आजमगढ़ में एटीएस का दूसरा बड़ा एक्शन
आतंकी नेटवर्क और कट्टरपंथी गतिविधियों के विरुद्ध एटीएस ने साढ़े तीन महीने के भीतर जिले में यह दूसरी बड़ी वैधानिक कार्रवाई की है। इससे पूर्व 31 मई 2026 को निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर (संजरपुर) से मोहम्मद शेख को गिरफ्तार किया गया था। तत्पश्चात 12 सितंबर को 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को हिरासत में लिया गया। दोनों ही मामलों में सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को कट्टरपंथी विचारधारा से जोड़ने के आरोप हैं।
एटीएस के अनुसार, मोहम्मद शेख पाकिस्तानी आतंकी नेटवर्क के संपर्क में था। जांच में यह तथ्य भी उजागर हुआ था कि उसे किसी अन्य राज्य की महिला राजनीतिज्ञ को निशाना बनाने का दायित्व दिया गया था, जिसके लिए उसने अवैध असलहा भी जुटा लिया था। वहीं, 12 सितंबर को पकड़ा गया नबील ऑनलाइन माध्यमों से प्रतिबंधित संगठन की विचारधारा फैलाने में संलग्न था।
डिजिटल गतिविधियों पर कड़ी निगरानी
इन दोनों कार्रवाइयों से स्पष्ट है कि जांच एजेंसियों की दृष्टि अब केवल पारंपरिक अपराधों तक सीमित न रहकर सोशल मीडिया एवं ऑनलाइन डिजिटल नेटवर्क पर केंद्रित है। एटीएस युवाओं को इंटरनेट के माध्यम से दिग्भ्रमित करने वाले नेटवर्क को ध्वस्त करने हेतु निरंतर जांच आगे बढ़ा रही है।


