ब्रुसेल्स। पेड़ों की छाल और काई में पाए जाने वाले 'एडिनेटा वागा' नामक सूक्ष्म जीव ने अपनी अद्भुत क्षमताओं से वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया है। बडेलॉयड रोटिफर प्रजाति का यह नन्हा जीव जानलेवा प्रोटॉन रेडिएशन की भारी बौछार झेलने के बाद भी जीवित रहने में सक्षम है, भले ही इसके डीएनए और क्रोमोसोम दर्जनों टुकड़ों में क्यों न बिखर जाएं।

रेडिएशन का इंसानों से सैकड़ों गुना अधिक असर बेअसर

बेल्जियम की यूनिवर्सिटी लिबरे डी ब्रुसेल्स की बायोलॉजिस्ट कारिन वैन डोनिक और उनकी टीम के शोध के मुताबिक, इस जीव पर 100 से 500 ग्रे तक की भयंकर प्रोटॉन रेडिएशन डाली गई, जबकि इंसानों के लिए मात्र 4 से 5 ग्रे की रेडिएशन भी घातक होती है। वैज्ञानिकों ने पाया कि यह जीव सूखे की स्थिति में निर्जीव सा हो जाता है और पानी मिलने पर फिर से सक्रिय हो जाता है।

टूटे हुए डीएनए के साथ नई संतानों को जन्म

इस जीव की सबसे अनोखी बात यह है कि यह टूटे हुए जेनेटिक मटेरियल के साथ ही नई संतानों को जन्म देता है, और इसकी आने वाली पीढ़ियां इस क्षति को खुद-ब-खुद ठीक करती रहती हैं। अब तक 'टार्डिग्रेड' (वाटर बियर) को सबसे कठोर जीव माना जाता था, जो डीएनए को अगली पीढ़ी में भेजने से पहले खुद ठीक करता है; लेकिन एडिनेटा वागा बिना ठीक किए ही बच्चों को जेनेटिक मटेरियल सौंप देता है।

मरम्मत की अनूठी प्रक्रिया (BIHER)

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस जीव के क्रोमोसोम में सेंट्रोमियर पूरे क्रोमोसोम पर फैले होते हैं (होलोसेंट्रिक संरचना), जिससे 50 टुकड़ों में टूटने पर भी हर टुकड़े में सेंट्रोमियर का हिस्सा सुरक्षित रहता है। इसकी मरम्मत की प्रक्रिया को 'ब्रेक इंड्यूस्ड होमोलॉगस एक्सटेंशन रिपेयर' (BIHER) कहा जाता है, जिसमें टूटा हुआ क्रोमोसोम अपने साबुत जुड़वां क्रोमोसोम को सांचे की तरह इस्तेमाल करता है और यह प्रक्रिया पीढ़ियों तक चलती है।

भविष्य के लिए क्रांतिकारी संभावना

'साइंस एडवांसेज' जर्नल में प्रकाशित यह रिसर्च भविष्य में मंगल ग्रह या गहरे अंतरिक्ष मिशनों पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को कॉस्मिक रेडिएशन से बचाने और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज में क्रांतिकारी साबित हो सकती है।