गाजियाबाद| गाजियाबाद जिले के लोनी क्षेत्र में एक पत्रकार वार्ता से प्रारंभ हुआ विवाद अब भारतीय जनता पार्टी के ही दो गुटों के मध्य सीधी राजनीतिक जंग में बदल चुका है। रविवार को दोनों ही पक्षों की ओर से पृथक-पृथक महापंचायतों का आयोजन कर जोरदार शक्ति प्रदर्शन किया गया। दोनों मंचों से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप-प्रत्यारोप लगाए गए, जिसके पश्चात लोनी का राजनीतिक और सामाजिक वातावरण अत्यधिक तनावपूर्ण हो गया है।

क्षेत्र में शांति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए पुलिस-प्रशासन सतर्क मोड पर है। सुरक्षा की दृष्टि से लगभग 1,000 व्यक्तियों को शांति भंग की धाराओं में पाबंद किया गया है। दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी के संगठनात्मक ढांचे ने इसे दो नेताओं के मध्य का व्यक्तिगत विवाद करार दिया है।

विधायक नंदकिशोर के पक्ष में 36 बिरादरियों का समर्थन

सिरौली गांव स्थित एक विद्यालय परिसर में लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर के समर्थन में महापंचायत आयोजित की गई। इसमें समीपवर्ती ग्रामीण अंचलों से विशाल जनसमूह उमड़ा। आयोजकों ने इसे 36 बिरादरियों की संयुक्त हिंदू महापंचायत करार दिया। इस दौरान कानून-व्यवस्था और हालिया घटनाओं पर विमर्श के उपरांत तीन प्रमुख प्रस्ताव पारित किए गए:

  • प्रथम प्रस्ताव: 36 बिरादरियां पूरी एकजुटता के साथ स्थानीय विधायक नंदकिशोर गुर्जर के साथ खड़ी हैं।

  • द्वितीय प्रस्ताव: पार्टी में रहते हुए विधायक का विरोध करने वाले नेताओं की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की गई।

  • तृतीय प्रस्ताव: क्षेत्रीय सामाजिक विवादों के आपसी निस्तारण हेतु 51 सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय लिया गया।

महापंचायत को संबोधित करते हुए विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने स्पष्ट किया कि वे हिंदुत्व और गौरक्षा के विषयों पर अपना संघर्ष निरंतर जारी रखेंगे। उन्होंने लोनी का माहौल बिगड़ने वालों के विरुद्ध सख्त वैधानिक कार्रवाई की मांग की।

अनिल कसाना के पक्ष में 12 गांवों के प्रतिनिधियों की पंचायत

दूसरी ओर, रिस्तल गांव में भाजपा नेता अनिल कसाना के समर्थन तथा विधायक के विरोध में महापंचायत बुलाई गई। इसमें रिस्तल, कोतवालपुर, राजपुर, जावली और सीती सहित 12 गांवों के प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।

वक्ताओं ने विधायक के व्यवहार पर आपत्ति जताते हुए कहा कि लोनी की सामाजिक एकता और भाईचारे को क्षति पहुंचाना स्वीकार्य नहीं है। महापंचायत में विधायक के आचरण के विरुद्ध निंदा प्रस्ताव पारित कर पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व से दंडात्मक कार्रवाई का आग्रह किया गया। भाजपा नेता अनिल कसाना ने कहा कि यह विषय राजनीति का न होकर सामाजिक स्वाभिमान से जुड़ा है।

प्रशासनिक निगरानी और पुलिस कार्रवाई

डीसीपी देहात सुरेंद्र नाथ तिवारी के अनुसार, शांति व्यवस्था बनाए रखने हेतु लगभग 1,000 उपद्रवी एवं संदेहास्पद तत्वों को रेड कार्ड और पाबंदी के नोटिस जारी किए गए हैं। क्षेत्र में स्थानीय पुलिस बल द्वारा सूक्ष्म निगरानी रखी जा रही है।

वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष चैनपाल सिंह ने स्पष्ट किया कि यह दो पक्षों का व्यक्तिगत विषय है, जिसका संगठन से कोई सीधा संबंध नहीं है। पूरे घटनाक्रम की विस्तृत रिपोर्ट पार्टी आलाकमान को प्रेषित कर दी गई है।

विवाद का मुख्य कारण

उल्लेखनीय है कि 5 सितंबर को लोनी स्थित एक जलपान गृह में भाजपा नेता अनिल कसाना द्वारा एक आपराधिक घटना के संदर्भ में प्रेस वार्ता बुलाई गई थी। उक्त वार्ता में विधायक नंदकिशोर गुर्जर के अचानक पहुंचने के उपरांत दोनों पक्षों में तीखी झड़प हो गई थी। इस घटनाक्रम का वीडियो प्रसारित होने के पश्चात से ही क्षेत्र में बैठकों और महापंचायतों का दौर जारी है।