खसरा नंबर 675 की 94 टुकड़ों वाली कहानी पर प्रशासन की नजर
अब 15 दिन में देना होगा हिसाब—कॉलोनी बसाने से पहले जवाब देने की बारी


एवीएस न्यूज.उमरिया/मानपुर 
मानपुर में जमीन के खेल की कहानी अब प्रशासन की फाइल तक पहुंच गई है। जिस खसरा नंबर 675 की जमीन को 94 छोटे-छोटे टुकड़ों में बांटकर बेचने और वहां अवैध कॉलोनी विकसित किए जाने की जानकारी प्रशासन के संज्ञान में आई, उस मामले में अब कलेक्टर राखी सहाय ने सार्वजनिक सूचना जारी कर कार्रवाई की दिशा में पहला बड़ा कदम उठा दिया है।

प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद जमीन से जुड़े लोगों में हलचल तेज हो गई है।
सार्वजनिक सूचना में राजनारायण भट्ट उर्फ ‘पुच्चू’ का नाम सामने आया है। अब तक जमीन के टुकड़े करने और बेचने की चर्चा थी, लेकिन कलेक्टर के एक्शन के बाद कहानी का अगला अध्याय जवाब और आपत्ति से शुरू होने वाला है। प्रशासन ने संबंधित भूमि का प्रबंधन मध्यप्रदेश शासन के अधिकार में लेने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

94 प्लॉट का सवाल, अब 15 दिन में जवाब!

प्रशासन के मुताबिक ग्राम मानपुर स्थित खसरा नंबर 675 को 94 छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजित कर विक्रय किए जाने और अवैध प्लॉटिंग के जरिए कॉलोनी विकसित किए जाने की जानकारी मिली है। अब जिन लोगों का इस जमीन से कोई हित जुड़ा है, उन्हें सार्वजनिक सूचना जारी होने के 15 दिन के भीतर अपनी आपत्ति और कारण बताना होगा।

यानी जिस जमीन पर प्लॉटों की गिनती 94 तक पहुंच गई, वहां अब प्रशासन जवाबों की गिनती शुरू करेगा। सवाल सीधा है—जमीन का प्रबंधन सरकार के अधिकार में आखिर क्यों न ले लिया जाए?

प्लॉटिंग की रफ्तार पर प्रशासन ने लगाया ब्रेक

मध्यप्रदेश नगरपालिका (कॉलोनाइजर का रजिस्ट्रीकरण, निर्बंधन तथा शर्तें) नियम, 2021 के नियम 22 के तहत कलेक्टर ने यह कदम उठाया है। प्रशासन का मानना है कि मामले में लोकहित प्रभावित हो सकता है, इसलिए भूमि के प्रबंधन को शासन के अधिकार में लेने की प्रक्रिया शुरू की गई है।

अब तक अगर कहानी में प्लॉट काटने और बेचने की रफ्तार तेज थी, तो कलेक्टर की सार्वजनिक सूचना ने उस रफ्तार पर फिलहाल सरकारी ब्रेक लगा दिया है।

7 सितंबर तक अखबार में छपेगा नोटिस

कलेक्टर कार्यालय ने मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगर पालिका मानपुर को सार्वजनिक सूचना का समाचार पत्र में प्रकाशन कराने के निर्देश दिए हैं। इसकी प्रति 7 सितंबर 2026 से पहले उपलब्ध कराने को कहा गया है।

अब मानपुर की इस जमीन की कहानी अखबार के पन्नों तक पहुंच चुकी है। यानी मामला सिर्फ जमीन के नक्शे और प्लॉटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक रिकॉर्ड में भी बाकायदा दर्ज हो गया है।

‘पुच्चू’ के सामने अब प्रशासन के सवाल

राजनारायण भट्ट उर्फ ‘पुच्चू’ से जुड़े इस मामले में फिलहाल प्रशासन ने अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है, बल्कि संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। लिहाजा अब अगली नजर इस बात पर रहेगी कि 15 दिन के भीतर क्या जवाब आता है और प्रशासन उस जवाब पर क्या फैसला लेता है।

फिलहाल इतना जरूर है कि 94 टुकड़ों में बंटी जमीन की कहानी अब एक सरकारी नोटिस के जरिए फिर से एक जगह आ गई है। प्लॉट चाहे 94 हों, लेकिन सवाल फिलहाल एक ही है—किस नियम के तहत जमीन को काटकर कॉलोनी का रूप दिया गया?