• सहयोगात्मक नवाचार का उद्देश्य बीमारी की शुरुआती निगरानी, नैदानिक निर्णय लेने (क्लीनिकल डिसीजन-मेकिंग) और रिमोट रेस्पिरेटरी केयर को मजबूत करना है

 

सीहोर: वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी और सहयोगी संस्थानों के शोधकर्ताओं ने एक इंटेलिजेंट रिमोट मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किया है। इसे पल्मोनरी फाइब्रोसिस के निरंतर मूल्यांकन में सहायता करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। पल्मोनरी फाइब्रोसिस फेफड़ों की एक प्रगतिशील और गंभीर बीमारी है, जिसकी प्रगति पर नज़र रखने और उपचार को बेहतर बनाने के लिए अक्सर दीर्घकालिक निगरानी की आवश्यकता होती है। इस नवाचार को एक भारतीय यूटिलिटी पेटेंट प्रदान किया गया है, जो स्वास्थ्य सेवा की गंभीर चुनौतियों के लिए तकनीक-आधारित समाधान विकसित करने के यूनिवर्सिटी के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

पल्मोनरी फाइब्रोसिस के कारण फेफड़ों के ऊतकों (लंग टिश्यूज) में स्थायी रूप से घाव (अपरिवर्तनीय स्कारिंग) हो जाते हैं, जिससे सांस लेना लगातार कठिन हो जाता है और मरीजों के जीवन की गुणवत्ता पर गंभीर असर पड़ता है। इस बीमारी की निगरानी करना एक बड़ी चुनौती रही है, क्योंकि डॉक्टरों को अक्सर बीमारी की प्रगति और उपचार के असर का मूल्यांकन करने के लिए समय-समय पर अस्पताल के दौरों और क्लिनिकल असेसमेंट पर निर्भर रहना पड़ता है।

 

इस अंतर को कम करने के लिए, वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी और सहयोगी संस्थानों के शोधकर्ताओं ने "एपरेटस फॉर डायनेमिक मॉनिटरिंग एंड एनालिसिस इन पल्मोनरी फाइब्रोसिस" (Apparatus for Dynamic Monitoring and Analysis in Pulmonary Fibrosis) विकसित किया है। यह एक इंटेलिजेंट सिस्टम है, जिसे मरीज से जुड़े क्लिनिकल डेटा को लगातार प्राप्त करने और उसका विश्लेषण करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। इस तकनीक का उद्देश्य स्वास्थ्य पेशेवरों को वास्तविक समय (रियल टाइम) में बीमारी की प्रगति की निगरानी करने, समय पर क्लिनिकल हस्तक्षेप करने, उपचार रणनीतियों को बेहतर बनाने और मरीजों के अधिक व्यक्तिगत व डेटा-संचालित प्रबंधन को सक्षम करने में मदद करना है।

 

इस नवाचार को पेटेंट आवेदन संख्या '202421039574' के आधार पर 'भारतीय पेटेंट संख्या 588547' के तहत प्रदान किया गया है, जिसे 21 मई 2024 को दायर किया गया था और 7 मई 2026 को प्रदान किया गया। इस पेटेंट तकनीक को वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग के डॉ. रजनीश कुमार पटेल और डॉ. सिद्धार्थ सिंह चौहान द्वारा विकसित किया गया है। इसमें वीआईटी भोपाल की पूर्व शोधकर्ता और वर्तमान में एसआरएम यूनिवर्सिटी दिल्ली-एनसीआर में कार्यरत डॉ. नैन्सी कुमारी, एनआईटी अगरतला से डॉ. कृष्ण कुमार पांडे, मैनिट (MANIT) भोपाल से अमित पटेल और सुनील कुमार गौतम ने सहयोग किया है। भविष्य के अनुकूल हेल्थकेयर इकोसिस्टम को ध्यान में रखकर तैयार किए गए इस सिस्टम का उपयोग मरीजों की निरंतर निगरानी, क्लिनिकल निर्णय समर्थन, रिमोट हेल्थकेयर डिलीवरी, टेलीमेडिसिन, उपचार मूल्यांकन, श्वसन रोग अनुसंधान और व्यक्तिगत पल्मोनरी देखभाल में किया जा सकता है। मरीज के डेटा के समय-आधारित विश्लेषण (लॉन्गीट्यूडिनल एनालिसिस) को सक्षम करके, यह तकनीक डॉक्टरों को समय पर महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने का प्रयास करती है जिससे दीर्घकालिक बीमारी के प्रबंधन में सुधार हो सके।

 

इस नवाचार पर वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट सुश्री कादंबरी एस. विश्वनाथन ने कहा “यह पेटेंट उस इंटरडिसिप्लिनरी (अंतरविषयी) अनुसंधान संस्कृति का एक मजबूत प्रमाण है जिसे हम वीआईटी भोपाल में विकसित कर रहे हैं। पल्मोनरी फाइब्रोसिस को ट्रैक और मैनेज करना एक कठिन काम बना हुआ है, और डॉक्टरों को एक ऐसा सिस्टम प्रदान करके जो मरीज के डेटा की निरंतर निगरानी और विश्लेषण करता है, हमारे शोधकर्ता श्वसन देखभाल (रेस्पिरेटरी केयर) में एक वास्तविक अंतर को दूर कर रहे हैं। इस नवाचार को सामने लाने के लिए साथ मिलकर काम करने वाले शोधकर्ताओं की टीम को बहुत-बहुत बधाई।”

 

शोध टीम की ओर से डॉ. रजनीश कुमार पटेल ने कहा "पल्मोनरी फाइब्रोसिस एक जटिल बीमारी है जिसमें यह समझने के लिए निरंतर निगरानी की आवश्यकता होती है कि समय के साथ मरीज की स्थिति कैसे बदल रही है। हमारा उद्देश्य एक ऐसा इंटेलिजेंट सिस्टम विकसित करना था जो मरीज के डेटा का गतिशील रूप से विश्लेषण करके डॉक्टरों की सहायता कर सके, जिससे समय पर हस्तक्षेप और अधिक सूचित उपचार निर्णय लेने में मदद मिले। हमें उम्मीद है कि यह तकनीक भविष्य की कनेक्टेड और व्यक्तिगत श्वसन देखभाल में योगदान देगी।"

 

यह पेटेंट वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के बढ़ते बौद्धिक संपदा (इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी) पोर्टफोलियो में एक नया अध्याय जोड़ता है और शैक्षणिक अनुसंधान को वास्तविक दुनिया के व्यावहारिक अनुप्रयोगों के साथ प्रभावशाली तकनीकों में बदलने के इसके फोकस को मजबूत करता है। अनुसंधान, नवाचार और अंतरविषयी सहयोग में निरंतर निवेश के माध्यम से, यूनिवर्सिटी इंजीनियरिंग और स्वास्थ्य सेवा को जोड़ने वाले समाधान विकसित करना जारी रखे हुए है, साथ ही विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के लिए भारत को एक वैश्विक केंद्र बनाने के दृष्टिकोण में भी अपना योगदान दे रही है।