स्मार्ट, डिजिटल और किसान-केंद्रित मंडी” का विजन 


एवीएस न्यूज . भोपाल
मध्य प्रदेश सरकार ने कृषि उपज मंडी समितियों के व्यापक आधुनिकीकरण की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की है। इसका उद्देश्य प्रदेश की मंडियों को पूरी तरह डिजिटल, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और किसान-केंद्रित विपणन केंद्रों के रूप में विकसित करना है, जिससे किसानों को बेहतर मूल्य, त्वरित भुगतान और राष्ट्रीय बाजारों तक आसान पहुंच मिल सके।

 


 

डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन पर सबसे ज्यादा जोर
मंडी बोर्ड के प्रबंध संचालक सह आयुक्त कुमार पुरुषोत्तम के मुताबिक योजना के तहत “ई-मंडी 2.0” को सभी 259 मंडियों और 298 उप मंडियों तक विस्तारित किया जाएगा। इसके अंतर्गत मंडी संचालन को पेपरलेस बनाने, एआई  आधारित निर्णय प्रणाली लागू करने और डिजिटल लॉग एवं ऑडिट ट्रेल सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। नई व्यवस्था में ऑनलाइन किसान एंट्री, डिजिटल नीलामी, इलेक्ट्रॉनिक बिक्री प्रमाण पत्र, डिजिटल तौल प्रणाली, क्यूआर  आधारित सत्यापन और मोबाइल आधारित मंडी संचालन जैसे फीचर्स शामिल किए जाएंगे। इसके साथ ही भुगतान ट्रैकिंग को भी पूरी तरह डिजिटल किया जाएगा।


एमपी फार्म गेट ऐप का विस्तार
“एमपी फार्म गेट” के माध्यम से किसानों को खेत, खलिहान और गोदाम से सीधे उपज बेचने की सुविधा दी जा रही है। अगले 5 वर्षों में इसके उपयोगकर्ताओं को 11 लाख से बढ़ाकर 15 लाख तक ले जाने और डिजिटल कृषि व्यापार को 40% तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। साथ ही एफपीओ इंटीग्रेशन को 100% तक करने की योजना है। इस प्लेटफॉर्म में जियो-टैग्ड प्रोड्यूस लिस्टिंग, एआई आधारित कीमत पूर्वानुमान और ई-नीलामी जैसी नई सुविधाएं जोड़ी जाएंगी।


आधुनिक मंडी इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
प्रदेश में क्लीनिंग, ग्रेडिंग और पैकेजिंग यूनिट्स के बड़े नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। ए, बी, सी और डी श्रेणी की मंडियों के अनुसार 5 टीपीएच और 2 टीपीएच क्षमता के प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इससे कृषि उपज की गुणवत्ता, मूल्य और निर्यात क्षमता में सुधार होगा।


स्मार्ट मंडी मॉडल तैयार
सभी प्रमुख मंडियों को स्मार्ट मंडी के रूप में विकसित किया जाएगा, जहां फ्री वाई-फाई, सीसीटीवी सर्विलांस, कमांड सेंटर, एलईडी  डिस्प्ले बोर्ड, स्मार्ट पार्किंग, सोलर एनर्जी और स्मार्ट वॉटर मैनेजमेंट जैसी सुविधाएं उपलब्ध होंगी।


किसान सेवा केंद्र होंगे मजबूत
हर मंडी में वन स्टॉप किसान सुविधा केंद्र स्थापित किए जाएंगे, जहां किसान पंजीयन, भुगतान जानकारी, फसल सलाह, बीमा और ऋण सहायता जैसी सेवाएं एक ही स्थान पर मिलेंगी।


100% डिजिटल भुगतान का लक्ष्य
नई व्यवस्था में सभी मंडियों में शत-प्रतिशत कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा दिया जाएगा। यूपीआई, एईपीएस , नेट बैंकिंग और डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर के माध्यम से तत्काल और पारदर्शी भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा।


हरित और सतत मंडी का लक्ष्य
योजना में सोलर रूफटॉप, वर्षा जल संचयन, कचरा प्रबंधन, प्लास्टिक मुक्त मंडी और ऊर्जा दक्ष व्यवस्था जैसे ग्रीन इनिशिएटिव भी शामिल किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इस व्यापक आधुनिकीकरण से मध्य प्रदेश की कृषि विपणन व्यवस्था राष्ट्रीय स्तर पर एक मॉडल सिस्टम के रूप में उभर सकती है।