ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 104 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचा


 एवीएस न्यूज.भोपाल
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होने और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीद से अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल  के दाम 104 डालर प्रति बैरल से लुढ़ककर 90 से 93 डालर के दायरे में आ गए हैं।

 ब्रेंट क्रूड ऑयल  के दाम में आई इस गिरावट के बाद ट्रांसपोर्ट उद्योग और व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर क्रूड ऑयल सस्ता होने का सीधा लाभ आम उपभोक्ताओं और परिवहन क्षेत्र को मिलना चाहिए।

 


आल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन अध्यक्ष राजेंद्र कपूर उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का भाव करीब 104 डॉलर प्रति बैरल से घटकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है।

अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम अवधि बढ़ने तथा समुद्री आपूर्ति मार्गों में स्थिरता की संभावनाओं के चलते वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव कम हुआ है। इसके बावजूद देश में पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में कोई कमी नहीं की गई है। पेट्रोल और डीजल   ऊंचे स्तर पर बिक रहा है, जबकि कई राज्यों में उपभोक्ताओं को इससे भी अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है।


ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का कहना है कि डीजल की ऊंची कीमतों ने पहले से दबाव झेल रहे परिवहन क्षेत्र की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ईंधन लागत के अलावा एनवायरमेंट कम्पनसेशन चार्ज , लगातार बढ़ते टोल टैक्स, भारी जुर्माने और विभिन्न परिचालन प्रतिबंधों ने व्यावसायिक वाहनों के संचालन को महंगा बना दिया है।

उद्योग से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि माल ढुलाई लागत बढ़ने का असर सीधे वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है, जिससे महंगाई को बढ़ावा मिलता है। ऐसे में यदि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी की जाती है तो इसका लाभ केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे आर्थिक तंत्र को मिलेगा।


 अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर
ट्रांसपोर्ट क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि भारत में 75 प्रतिशत से अधिक माल ढुलाई सड़क मार्ग से होती है। ऐसे में यदि ट्रकों की परिचालन लागत लगातार बढ़ती रही तो आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो सकती है और इसका असर व्यापार, उद्योग तथा उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।


व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ देशवासियों तक पहुंचाने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों की समीक्षा कर तत्काल राहत दी जाए। उनका मानना है कि इससे ट्रांसपोर्ट उद्योग को संबल मिलेगा, माल ढुलाई लागत कम होगी और महंगाई पर भी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। उद्योग जगत का कहना है कि जब वैश्विक बाजार में कच्चा तेल सस्ता हुआ है तो उसका फायदा आम जनता तक पहुंचना चाहिए, ताकि आर्थिक गतिविधियों को गति मिले और उपभोक्ताओं को बढ़ती लागत से राहत मिल सके।


 ट्रांसपोर्ट उद्योग और व्यापारिक संगठनों ने केंद्र सरकार से मांग की है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट का लाभ तत्काल उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाए। पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में शीघ्र कमी की जाए। परिवहन क्षेत्र को राहत देकर महंगाई नियंत्रण और आर्थिक गतिविधियों को गति देने के लिए सकारात्मक कदम उठाए जाएं।


उद्योग प्रतिनिधियों का मानना है कि यदि ईंधन कीमतों में राहत दी जाती है तो न केवल ट्रांसपोर्ट सेक्टर को संबल मिलेगा, बल्कि माल ढुलाई लागत कम होने से महंगाई पर भी अंकुश लगेगा और आम जनता को सीधा फायदा होगा।