हिंदी ज़ी5 ने “हाथरस – 16 दिन” का रोमांचक ट्रेलर जारी किया है, यह एक प्रभावशाली जांच आधारित डॉक्यू-सीरीज़ है, जो अब हिंदी ज़ी5 पर स्ट्रीम हो रही है
एवीएस न्यूज. मुंबई
हिंदी ज़ी5 ने अपनी आगामी ओरिजिनल इन्वेस्टिगेटिव डॉक्यू-सीरीज़ “हाथरस – 16 दिन” का ट्रेलर जारी कर दिया है। यह सीरीज़ भारत के सबसे भयावह और चर्चित बलात्कार मामलों में से एक की गहन पड़ताल करती है, जिसने पूरे देश की अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया था, निर्देशक पैट्रिक ग्राहम द्वारा बनाई गई यह सीरीज़ 2020 के हाथरस हादसे के बाद के उन 16 दिनों की भयावह यात्रा को दिखाती है, जिसमें जाति, लैंगिक भेदभाव, संस्थागत चुप्पी और सच्चाई की लगातार चलती खोज के जटिल पहलुओं को उजागर किया गया है।
ग्रामीण उत्तर प्रदेश की पृष्ठभूमि पर आधारित डॉक्यूबे ओरिजिनल हाथरस – 16 दिन का प्रीमियर 15 मई 2026 को हुआ। पत्रकार तनुश्री पांडे की नज़र से यह डॉक्यू-सीरीज़ उस असहज और कठोर वास्तविकता को सामने लाती है, जो हाथरस में एक युवा दलित महिला के साथ हुए इस अपराध के बाद सामने आई थी। यह सीरीज़ अब केवल हिंदी ज़ी5 पर विशेष रूप से स्ट्रीम की जा रही है।
यह ट्रेलर उत्तर प्रदेश के हाथरस में एक युवा दलित महिला के साथ हुए हमले के बाद की घटनाओं की एक भयावह झलक पेश करता है, और उसके बाद देशभर में फैले आक्रोश को भी दर्शाता है। जिसकी शुरुआत एक क्रूर अपराध के रूप में होती है, वह धीरे-धीरे जाति व्यवस्था, राजनीतिक शक्ति, मीडिया की भूमिका और उन तंत्रों की गहन जांच में बदल जाती है, जो अक्सर सच्चाई को दबाने का काम करते हैं। इस कहानी के केंद्र में पत्रकार तनुश्री पांडे की साहसिक रिपोर्टिंग है, जिसमें वह संस्थागत बाधाओं, धमकियों और सार्वजनिक आलोचना का सामना करते हुए इस मामले को राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने की कोशिश करती हैं। प्रत्यक्ष गवाहों के बयानों, मौके पर की गई रिपोर्टिंग, अभिलेखीय फुटेज, और पत्रकारों, कार्यकर्ताओं, कानून-प्रवर्तन अधिकारियों तथा नीति-निर्माताओं के दृष्टिकोणों के माध्यम से “हाथरस – 16 दिन” केवल एक त्रासदी को नहीं दोहराता, बल्कि उस पूरे तंत्र की पड़ताल करता है जिसने इसके बाद की परिस्थितियों को आकार दिया।
कावेरी दास, बिज़नेस हेड – हिंदी ज़ी5 और चीफ़ चैनल ऑफिसर - &TV, ने कहा, “हिंदी ज़ी5 में हम उन कहानियों को प्रस्तुत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जो वास्तव में मायने रखती हैं, ऐसी कहानियाँ जो न केवल दर्शकों को आकर्षित करती हैं, बल्कि उन्हें अपने आसपास की वास्तविकताओं पर विचार करने के लिए भी प्रेरित करती हैं। “हाथरस – 16 दिन” केवल किसी सुर्खियाँ बटोरने वाली घटना का पुनर्कथन नहीं है; यह उन मौजूदा व्यवस्थाओं, पूर्वाग्रहों और संस्थागत चुप्पी की पड़ताल है जो आज भी हमारे समाज को प्रभावित करती हैं।
इस डॉक्यू-सीरीज़ के माध्यम से हमारा उद्देश्य एक ऐसी कथा प्रस्तुत करना है जो साहसी और विचारोत्तेजक हो, साथ ही संवेदना और सत्य के आधार पर टिकी हो।"
“हाथरस – 16 दिन” के निर्देशक पैट्रिक ग्राहम ने कह,” “हाथरस – 16 दिन मेरे लिए केवल एक और सच्ची घटनाओं पर आधारित क्राइम डॉक्यूमेंट्री नहीं थी। यह उन बड़े सामाजिक और संस्थागत तंत्रों की पड़ताल थी, जो ऐसी घटनाओं के पीछे काम करते हैं—जाति, लैंगिक भेदभाव, सत्ता और कहानी पर नियंत्रण की वो परतें, जो अक्सर यह तय करती हैं कि किसकी बात सुनी जाएगी।
मुझे सबसे अधिक प्रभावित उन पत्रकारों का असाधारण साहस करता है, जिन्होंने इस कहानी को दबने नहीं दिया, खासकर तनुश्री पांडे, जिनकी जवाबों की तलाश इस डॉक्यूमेंट्री की भावनात्मक धुरी बन गई। अंततः यह कहानी उन आवाज़ों के बारे में है जिन्हें अक्सर अनसुना कर दिया जाता है, क्योंकि वे समाज के उन प्राचीन पदानुक्रमों में नीचे मानी जाती हैं, जो आज भी समाज के कुछ हिस्सों में मौजूद हैं।”






