एवीएस न्यूज.भोपाल


ज्वेलरी इंडस्ट्री से जुड़े व्यापारियों, निर्माताओं, कारीगरों और विभिन्न संगठनों ने सरकार से व्यापारिक नियमों और टैक्स व्यवस्था को सरल एवं व्यावहारिक बनाने की मांग उठाई है।

उद्योग जगत का कहना है कि वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों में सोने की सिल्लियां और सिक्के की बिक्री को सीमित रखते हुए मुख्य रूप से ज्वैलरी व्यवसाय को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि पूरे उद्योग और रोजगार तंत्र को सुरक्षित रखा जा सके।
भोपाल के व्यापारी नेता संजीव गर्ग “गांधी” ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की अपील करते हुए कहा कि ज्वेलरी इंडस्ट्री सहित देश के व्यापारिक वर्ग की वास्तविक समस्याओं पर गंभीरता से विचार होना चाहिए, ताकि व्यापार और रोजगार दोनों सुरक्षित रह सकें। उन्होंने कहाकि अगस्त 2025 से देश के कई हिस्सों में ज्वैलरी की तुलना में सोने की सिल्लियां और सिक्के की बिक्री में तेजी देखी गई है।

उनका मानना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो इसका नकारात्मक असर विनिर्माण क्षेत्र, कारीगर वर्ग, खुदरा और थोक व्यापार सहित पूरे रोजगार चक्र पर पड़ सकता है।
गांधी ने कहाकि वर्तमान समय में सरकार वैश्विक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कई बड़े फैसले ले रही है, लेकिन उद्योगों से जुड़े नियम और नीतियाँ बनाते समय व्यापारिक वास्तविकताओं को भी समझना जरूरी है। उनका आरोप है कि देश में टैक्स सिस्टम और अनुपालन व्यवस्था अत्यधिक जटिल होती जा रही है, जिससे व्यापार विस्तार प्रभावित हो रहा है।

उद्योग से जुड़े लोगों के अनुसार एक निश्चित टर्नओवर तक व्यापार सामान्य रूप से होता है, लेकिन सीमा पार होने वाले ही व्यवसायों में कई प्रकार के अनुपालन, नोटिस, दस्तावेजीकरण होते हैं और कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। इसी कारण अनेक व्यापारी अपने व्यवसाय को विस्तार देने से बचते हैं। व्यापारिक संगठनों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक जटिल नियम और ऊँची कर दरें भ्रष्टाचार तथा अनौपचारिक व्यवस्थाओं को बढ़ावा देती हैं।

उनका कहना है कि सरकार को टैक्स सिस्टमको सरल, पारदर्शी और व्यापार वृद्धि को प्रोत्साहित करने वाला बनाना चाहिए, ताकि व्यापारी बिना भय और अनावश्यक दबाव के अपने कारोबार को आगे बढ़ा सकें।


 आयात ड्यूटी बढ़ने से ज्वेलरी सेक्टर में हड़कंप, निवेशकों में बढ़ी चिंता
खिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के प्रांतीय महासिचव नवनीत अग्रवाल ने कहाकि  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सोशल अपील और स्वर्ण निवेश को नियंत्रित करने की दिशा में उठाए गए कदमों के बाद शेयर बाजार में ज्वेलरी कंपनियों के स्टॉक्स में तेज गिरावट दर्ज की गई, जिससे निवेशकों में चिंता का माहौल बन गया है। कारोबार के दौरान कई प्रमुख ज्वैलरी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव देखने को मिला। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इम्पोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं की लागत में वृद्धि होगी, जिसका सीधा असर जूलरी उद्योग की मांग और कंपनियों के मुनाफे पर पड़ेगा। इससे ग्राहकों को भी महंगी जूलरी खरीदनी पड़ सकती है।


 उन्होंने कहाकि सरकार का यह कदम को स्वर्ण आयात कम करने की दिशा में उठाया गया प्रयास बताया है, लेकिन यह भी कहा कि अनाधिकृत और अवैध मार्गों से होने वाले स्वर्ण आयात पर भी समान रूप से सख्ती जरूरी है। संगठन का मानना है कि यदि तस्करी और गैरकानूनी आयात पर नियंत्रण नहीं किया गया तो वैध कारोबार प्रभावित होता रहेगा। उधर, शेयर बाजार में निवेशकों ने सरकार के इस फैसले को फिलहाल नकारात्मक संकेत के रूप में लिया है।  


 बोले सराफा व्यापारी-‘बाजार पर पड़ेगा बड़ा असर’
सराफा व्यापारियों का कहना है कि इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से सोना-चांदी की लागत और बढ़ जाएगी, जिसका सीधा असर ग्राहकों की मांग पर पड़ेगा। सराफा व्यापारी नवनीत अग्रवाल  के मुताबिक आने वाले दिनों में ज्वेलरी की बिक्री धीमी हो सकती है और बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही ऊंचे दामों के बीच यह फैसला सेक्टर पर दोहरा दबाव बना रहा है, जिससे शॉर्ट टर्म में कारोबार प्रभावित हो सकता है।