पंप संचालक बोले- सरकारी डिपो से पिछले 2 महीने से सप्लाई हो रहा पेट्रोल पंपों को ई-20 पेट्रोल
एवीएस न्यूज..भोपाल
भोपाल सहित प्रमुख शहरों में सरकारी डिपो से ई20 पेट्रोल की सप्लाई पिछले दो महीने से रही है जो आईओसीएल, एचपी और बीपीसीएल के पेट्रोल पंपों तक पहुंच रही है। जो मुख्य रूप से 2023-24 के बाद बनी गाड़ियों के लिए उपयुक्त है, लेकिन पुरानी गाड़ियों के माइलेज पर इसका असर पड़ेगा।
मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय सिंह ने उक्त जानकारी देते हुए बताया कि सरकार ने 1 अप्रैल 2026 से पूरे देश में बिकने वाले पेट्रोल को ई20 बनाने का आदेश दिया है। इसका मतलब है कि पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाएगा और इसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर 95 होगा। यह फैसला तेल आयात कम करने, प्रदूषण घटाने और गन्ना व मक्का जैसी फसलों की मांग बढ़ाने के लिए लिया गया है। क्योंकि एथेनॉल इन्हीं फसलों से बनता है और यह पेट्रोल की तुलना में ज्यादा साफ जलता है।
अजय सिंह के अनुसार पेट्रोलियम मंत्रालय ने 17 फरवरी की अधिसूचना में बताया कि केंद्र सरकार निर्देश देती है कि पेट्रोलियम कंपनियां राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भारतीय मानक ब्यूरो के विनिर्देशों के अनुसार 20 प्रतिशत तक एथेनॉल के साथ मिश्रित मोटर स्पिरिट (पेट्रोल) की बिक्री करेंगी, जिसका न्यूनतम रिसर्च ऑक्टेन नंबर (रॉन) 95 होगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि पहले 10 फीसदी एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय से पहले ही हासिल कर लिया गया था।

अब शुद्ध इथेनॉल से चलने वाले आ रहे ट्रैक्टर
अजय सिंह ने कहाकि ई 20 पेट्रोल के बाद अब सरकार फ्लेक्सी फ्यूल ईंधन से चलने वाले वाहन को भी भारत में चलाने की अनुमति दे दी है। सबसे पहले फ्लेक्सी फ्यूल (शुद्ध इथेनॉल) से चलने वाले ट्रैक्टर भारत में आ रहे हैं। ऐसे ईंधन से चलने वाले ट्रैक्टर किसानों द्वारा डीजल जो लगभग 92 रुपए लीटर की जगह 56 रुपए लीटर के इथेनॉल से चलेंगे। जिससे किसानों के फसल लागत में लगने वाले ईंधन की कीमत में 35 प्रतिशत की बचत होगी।
भोपाल, मप्र सहित पूरे भारत में ई20 पेट्रोल की बिक्री शुरू
भोपाल सहित पूरे भारत में 1 अप्रैल 2026 से ई20 पेट्रोल (20 फीसदी इथेनॉल प्लस 80 फीसदी पेट्रोल) मानक ईंधन के रूप में लागू हो गया है। यह कदम पेट्रोलियम मंत्रालय की एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम के तहत है, जिसका उद्देश्य विदेशी मुद्रा की बचत, प्रदूषण कम करना और उच्च गुणवत्ता वाला 95रॉन ईंधन प्रदान करना है। अब देश के सभी पेट्रोल पंपों पर ई20 पेट्रोल ही मुख्य मानक ईंधन के रूप में उपलब्ध होगा। नई गाड़ियां (जो ई20 के अनुकूल हैं) सुचारू रूप से चलेंगी, लेकिन 2023 से पहले की पुरानी गाड़ियों के पार्ट्स और माइलेज (2-4 फीसदी गिरावट) पर असर पड़ सकता है। यह ईंधन भारतीय मानक ब्यूरो के मानकों के अनुरूप 95रॉन का है, जो इंजन पर दबाव कम करता है।

रिलायंस पेट्रोल पंप पर काफी समय पहले ही से ई -30 पेट्रोल की उपलब्धता
रिलायंस पेट्रोल पंप सहित भारत के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर 1 अप्रैल 2026 से ई20 पेट्रोल की आपूर्ति अनिवार्य रूप से शुरू हो गई है। हालांकि जिओ-बीपी ने सरकार की समय सीमा के अनुरूप काफी पहले ही 2023 से ई20 पेट्रोल के प्रारंभिक रोलआउट की घोषणा की थी। ई20 पेट्रोल से पुरानी गाड़ियों (बीएस3,बीएस4) के माइलेज में 10-15 फीसदी तक की कमी आ सकती है, लेकिन नई बीएस6 गाड़ियों पर इसका प्रभाव कम (1-2फीसदी माइलेज कमी) पड़ने का अनुमान है।
समीर भार्गव
संचालक, रिलायंस पेट्रोप पंप

वायु गुणवत्ता में सुधार होगा
20 फीसदी एथेनॉल युक्त पेट्रोल (ई20) का उपयोग पारंपरिक ईंधन की तुलना में कम कार्बन मोनोऑक्साइड, हाइड्रोकार्बन और नाइट्रोजन ऑक्साइड उत्सर्जित करता है, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होता है। इसके अलावा सरकार वाहन निर्माताओं को फ्लेक्स-ईंधन इंजन विकसित करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है, जो पूरी तरह से एथेनॉल पर चल सकते हैं।
आर.के. बामोरिया, पेट्रोल पंप संचालक
पुरानी कारों में ई20 पेट्रोल के नुकसान
जंग और लीकेज का खतरा- पुरानी कारों में लगे रबर पाइप, सील और धातु के पार्ट ई20 के लिए बने नहीं होते। इससे फ्यूल लाइन में जंग लग सकती है और पेट्रोल लीक होने का खतरा बढ़ जाता है।
- माइलेज कम हो जाता है-ई20 में एथेनॉल होता है, जिसकी ताकत (ऊर्जा) पेट्रोल से कम होती है। इसलिए गाड़ी पहले के मुकाबले 5–10 फीसदी कम माइलेज दे सकती है।
- गाड़ी की पावर कम लगती है- पुराने इंजन ई20 के हिसाब से सेट नहीं होते, इसलिए गाड़ी चलाते समय पावर कम महसूस हो सकती है, खासकर पुरानी कार्बोरेटर वाली गाड़ियों में।
- ठंड में स्टार्ट करने में दिक्कत- सर्दियों या ठंडे मौसम में पुरानी कारों को स्टार्ट करना मुश्किल हो सकता है, क्योंकि ई20 पेट्रोल जल्दी वाष्पित (उड़ता) नहीं होता।
- इंजन खराब होने का खतरा- अगर लंबे समय तक ई20 इस्तेमाल किया जाए, तो फ्यूल पंप, इंजेक्टर और इंजन के अंदरूनी हिस्सों को नुकसान हो सकता है, जिससे महंगी मरम्मत करनी पड़ सकती है।

