- अतिरिक्त बोझ से खरीदार और डेवलपर्स दोनों चिंतित - नई विकास योजना और मास्टर प्लान लागू नहीं, फिर भी लगातार की जा रही गाइडलाइन रेट में वृद्धि
एवीएस न्यूज.भोपाल
रियल एस्टेट सेक्टर वर्तमान में कई अनिश्चितताओं से जूझ रहा है जैसे -वैश्विक युद्ध और जियोपॉलिटिकल तनाव का व्यापक आर्थिक प्रभाव, एआई के कारण सर्विस सेक्टर, आईटी, प्रोफेशनल्स और कर्मचारियों के बीच बढ़ती असुरक्षा, स्टॉक्स, मेटल्स और अन्य एसेट क्लासेस में अस्थिरता,इन सब कारणों से यह वर्ष रियल एस्टेट सेक्टर के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण और अनिश्चित है। इस पर गाइडलाइन रेट में हुई वृद्धि बाजार पर अतिरिक्त बोझ डालेगी। यह कदम घर खरीदारों और डेवलपर्स दोनों के लिए चिंता का विषय बन गया है।
गाइडलाइन रेट में बढ़ोतरी सीधे तौर पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन चार्ज को बढ़ाती है, जिससे घर खरीदारों के लिए घर की कुल लागत बढ़ जाती है। कुछ क्षेत्रों में गाइडलाइन दरें 21 से 51 फीसदी तक वृद्धि का प्रस्ताव है और प्रमुख स्थानों में तो 200 फीसदी तक की वृद्धि देखी जा सकती है। बढ़े हुए गाइडलाइन रेट का मतलब है कि संपत्ति का न्यूनतम कानूनी पंजीकरण मूल्य बढ़ जाएगा, जिससे खरीदारों को अधिक नकदी की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घर खरीदने की सामथ्र्य कम होगी और अल्पावधि में आवास की मांग में गिरावट आ सकती है।

क्रेडाई मध्यप्रदेश अध्यक्ष मनोज मीक ने कहाकि राजधानी सहित राज्य में 2009 से लगातार गाइडलाइन रेट बढ़ाए जाते रहे हैं, जिससे अनेक क्षेत्रों में सरकारी दरें वास्तविक बाजार से ऊपर पहुंच चुकी हैं। भोपाल में लगभग 21 वर्षों से अन्य प्रमुख शहरों में 5 साल से नई विकास योजना या मास्टर प्लान लागू नहीं हो सकी, जिसके कारण वैध, निर्माण योग्य लैंड-यूज की उपलब्धता बाधित है।
जब वैध सप्लाई सीमित है, तब गाइडलाइन वृद्धि से नए हाउसिंग प्रोजेक्ट्स, अफोर्डेबिलिटी और निवेश तीनों प्रभावित होते हैं। विकास योजना के अभाव में अवैध कॉलोनियों का विस्तार हुआ है, जिससे बाजार के प्राइस-सिग्नल भी डिस्टॉर्ट हुए हैं। ऐसे विकृत संकेतों के आधार पर वैध बाजार की गाइडलाइन बढ़ाना न्यायसंगत नहीं है।
बायर और सेलर दोनों पर वैल्यू डिफरेंस का जोखिम
गाइडलाइन से कम मूल्य पर रजिस्ट्री कराना व्यवहारिक रूप से कठिन है, क्योंकि इनकम टैक्स प्रावधानों के कारण बायर और सेलर दोनों पर वैल्यू डिफरेंस का जोखिम बनता है। इसलिए ऊँची रजिस्ट्रीयों के आधार पर रेट बढ़ाना अपने-आप में वैज्ञानिक आधार नहीं माना जा सकता। प्रॉपर्टी का मूल्य केवल लोकेशन से तय नहीं होता, बल्कि लैंड-यूज, फ्रंटेज, रोड-विड्थ, एमेनिटीज, स्पेसिफिकेशन, टाइटल क्वालिटी और यूजेबिलिटी जैसे कारकों से तय होता है। मध्यप्रदेश में स्टाम्प ड्यूटी के साथ नगरीय निकाय कर, जनपद कर, उपकर आदि मिलकर कुल रजिस्ट्री लागत पहले से ही भारी है। ऐसे में दर वृद्धि बाजार पर अतिरिक्त बोझ डालेगी।
राजस्व का टिकाऊ आधार बढ़े हुए रेट नहीं, बल्कि बढ़ा हुआ वैध वॉल्यूम है
मीक ने कहा कि महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि अतीत में गाइडलाइन रेट स्थिर रहने पर भी राजस्व में पर्याप्त वृद्धि हुई है। गुजरात, तेलंगाना, महाराष्ट्र ने 2012-13 से नए इनकम टैक्स प्रावधानों के बाद अपने राज्यों में पूंजी निवेश बनाए रखने के लिए 4 से 11 वर्षों तक सर्किल रेट स्थिर रखे थे। इससे स्पष्ट है कि राजस्व का टिकाऊ आधार केवल बढ़े हुए रेट नहीं, बल्कि बढ़ा हुआ वैध वॉल्यूम है।

