राजा भोज की विरासत बचाने आगे आया वीआईटी भोपाल; विश्व जल दिवस पर बड़ा तालाब के लिए निकाली पदयात्रा।
भोपाल : विश्व जल दिवस के अवसर पर वीआईटी भोपाल यूनिवर्सिटी के आर्किटेक्चर विभाग एवं एंटीक आर्केड क्लब द्वारा बड़ा तालाब के आसपास जागरूकता पदयात्रा आयोजित की गई। कार्यक्रम में मनोज कुर्मी, सुपरिटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई), भोपाल सिटीजंस फोरम के संयोजक सुरेंद्र तिवारी, सिटीजंस फोरम के सदस्य कमल राठी, गांधी भवन ट्रस्ट से जुड़े प्रतिनिधि, पर्यावरण, जल विज्ञान एवं भू-विज्ञान के विशेषज्ञ, मीडिया प्रतिनिधि तथा विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
यह कार्यक्रम वीआईटी के चांसलर डॉ. जी. विश्वनाथन, वाइस प्रेसिडेंट श्री शंकर विश्वनाथन, ट्रस्टी श्रीमती रमणी बालासुंदरम, असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट श्रीमती कादम्बरी एस विश्वनाथन, वाइस चांसलर डॉ. सतीश मोढ़, प्रो वाइस चांसलर डॉ. टी. बी. श्रीधरन तथा एक्टिंग रजिस्ट्रार श्री के. के. नायर के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. शीतल शर्मा ने बताया कि यह जागरूकता पदयात्रा प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य नागरिकों को भोपाल की इस अमूल्य प्राकृतिक धरोहर के संरक्षण के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने कहा कि बड़ा तालाब पर उनके शोध कार्य के अंतर्गत झील और उसके जलग्रहण क्षेत्र में हो रहे परिवर्तनों का लगातार अध्ययन किया जा रहा है।
पदयात्रा का उद्देश्य बड़ा तालाब में बढ़ते अतिक्रमण, गहराई में कमी, तलछट के कारण सिकुड़ती सीमाओं तथा उसके पारिस्थितिक संतुलन पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभावों की ओर ध्यान आकर्षित करना रहा।
उन्होंने कहा कि यह पदयात्रा केवल झील की प्राकृतिक सुंदरता तक सीमित पहल नहीं है, बल्कि इसके स्वास्थ्य, स्वच्छता, जल गुणवत्ता, पारिस्थितिक संतुलन और दीर्घकालिक स्थिरता को केंद्र में रखकर ठोस योजनाएं बनाने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है।
इस पहल के माध्यम से अनियोजित शहरीकरण से उत्पन्न चुनौतियों के प्रति भी जागरूकता बढ़ाने का संदेश दिया गया। साथ ही, शहर की झीलों, हरित क्षेत्रों और प्राकृतिक संतुलन को सुरक्षित रखने के लिए नागरिक भागीदारी की आवश्यकता पर बल दिया गया।
बड़ा तालाब, जिसे परमार राजा भोज द्वारा निर्मित ऐतिहासिक जल संरचना के रूप में जाना जाता है, देश की प्रमुख मानव निर्मित झीलों में शामिल है। यह भोपाल शहर की पेयजल आपूर्ति, जलवायु संतुलन और पर्यावरणीय स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण आधार है। ऐसे में इसका संरक्षण केवल पर्यावरणीय विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और शहरी नियोजन से भी जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा है।
यह कार्यक्रम प्रशासन, विशेषज्ञों और नागरिकों के बीच संवाद स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ, जिससे बड़ा तालाब संरक्षण के लिए वैज्ञानिक, व्यावहारिक और प्रभावी निर्णयों का मार्ग प्रशस्त हो सके।

