कोलकाता: साहस और समय पर मिली चिकित्सा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जब मणिपाल अस्पताल, मुकुंदपुर में चिकित्सकों की टीम ने 16 वर्षीय कूचबिहार निवासी आकाश डे के हृदय में एक दुर्लभ और जीवनरक्षक पेसमेकर प्रत्यारोपण सफलतापूर्वक किया। मणिपाल अस्पताल समूह के इस इकाई में डॉ. पारिजात देब चौधरी, परामर्शदाता – इंटरवेंशनल हृदय रोग विशेषज्ञ के नेतृत्व में यह जटिल प्रक्रिया पूरी की गई, जो इतनी कम उम्र के मरीजों में बेहद दुर्लभ मानी जाती है। इस मामले की सबसे खास बात यह है कि सर्जरी के कुछ ही दिनों के भीतर किसान के बेटे आकाश ने स्वास्थ्य लाभ कर अपनी माध्यमिक परीक्षा भी दी।

कूचबिहार के खोलता गांव के निवासी आकाश लंबे समय से लगातार थकान, चक्कर आना, सांस लेने में तकलीफ और बार-बार बेहोशी जैसे लक्षणों से परेशान था। धीरे-धीरे ये समस्याएं उसके दैनिक जीवन और पढ़ाई, दोनों को प्रभावित करने लगीं, खासकर उस समय जब उसकी पढ़ाई का महत्वपूर्ण चरण चल रहा था। स्थिति बिगड़ने पर चिंतित परिवार उसे उन्नत उपचार के लिए मणिपाल अस्पताल, मुकुंदपुर लेकर आया। आर्थिक चिंताओं के बावजूद अस्पताल ने बिना किसी देरी के उसे सर्वोत्तम उपचार उपलब्ध कराया। यह प्रक्रिया पश्चिम बंगाल सरकार की स्वास्थ्य साथी योजना के तहत सफलतापूर्वक की गई, जिससे कठिन समय में समय पर और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा संभव हो सकी।

विस्तृत जांच के बाद डॉ. चौधरी ने आकाश में कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक का निदान किया। यह एक गंभीर स्थिति है, जिसमें हृदय की धड़कन को नियंत्रित करने वाले विद्युत संकेत ठीक से काम नहीं करते, जिससे हृदय की धड़कन अत्यंत धीमी हो जाती है। यदि इसका समय पर उपचार न किया जाए, तो यह जीवन के लिए खतरा बन सकता है। इस समस्या के समाधान के लिए उसके हृदय में एक स्थायी पेसमेकर लगाया गया, जो धड़कन को नियमित बनाए रखने में मदद करता है। आमतौर पर पेसमेकर प्रत्यारोपण बुजुर्ग मरीजों में अधिक देखा जाता है, जबकि किशोरों में यह अत्यंत दुर्लभ है। वैश्विक स्तर पर 18 वर्ष से कम आयु के मरीजों में पेसमेकर लगाने के मामले 1 प्रतिशत से भी कम हैं, जिससे आकाश का मामला विशेष बन जाता है।

अद्भुत साहस का परिचय देते हुए आकाश ने उपचार के प्रति अच्छा प्रतिसाद दिया और मात्र चार दिनों के भीतर उसकी स्थिति में लगातार सुधार देखने को मिला। इसके तुरंत बाद वह अपनी माध्यमिक परीक्षा में शामिल हो सका, जो एक बड़ी उपलब्धि साबित हुई।

आकाश डे, जिनके परिवार में उनके पिता ही एकमात्र कमाने वाले हैं, ने कहा, “सर्जरी से पहले मैं हमेशा बहुत कमजोर और चक्कर महसूस करता था। मुझे डर था कि मैं अपनी परीक्षा नहीं दे पाऊंगा। लेकिन उपचार के बाद मैं जल्दी ठीक होने लगा। मैं डॉ. पारिजात देब चौधरी और मणिपाल अस्पताल, मुकुंदपुर की पूरी टीम का आभारी हूं, जिनकी वजह से मैं इतनी जल्दी ठीक होकर अपनी माध्यमिक परीक्षा दे सका।”

इस बारे में डॉ. पारिजात देब चौधरी ने कहा, “कम्प्लीट हार्ट ब्लॉक एक गंभीर और संभावित रूप से जानलेवा स्थिति है, जिसमें हृदय की विद्युत प्रणाली सही तरीके से काम नहीं करती और धड़कन बहुत धीमी हो जाती है। यह आमतौर पर बुजुर्गों में देखा जाता है, लेकिन 16 वर्षीय मरीज में इसका होना इसे विशेष और चुनौतीपूर्ण बनाता है। युवा मरीजों में लगातार थकान, चक्कर या बेहोशी जैसे लक्षणों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, जिससे निदान में देरी हो सकती है। आकाश के मामले में समय पर जांच और उपचार बेहद महत्वपूर्ण था। पेसमेकर लगाने से उसकी हृदय गति सामान्य हुई, रक्त संचार बेहतर हुआ और उसकी ऊर्जा में सुधार आया। इस मामले की खास बात केवल सर्जरी की सफलता ही नहीं, बल्कि मरीज की मजबूत इच्छाशक्ति भी है। उसने कम समय में स्वस्थ होकर अपनी परीक्षा दी, जो उपचार की प्रभावशीलता और उसके दृढ़ संकल्प को दर्शाता है। नियमित जांच के साथ वह सामान्य और सक्रिय जीवन जी सकेगा।”

वर्तमान में आकाश स्वस्थ हो रहा है और नियमित चिकित्सकीय परामर्श के साथ वह सामान्य जीवन जीने की उम्मीद है। उसकी यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि समय पर निदान, उन्नत चिकित्सा सुविधा और मजबूत इच्छाशक्ति से जीवन की कठिन परिस्थितियों को भी पार किया जा सकता है।