एवीएस न्यूज.भोपाल 
भारत में ई-कॉमर्स कारोबार को मजबूत बनाने और अधिक विक्रेताओं को जोड़ने के लिए अमेजन ने बड़ा फैसला लिया है। कंपनी ने घोषणा की है कि अब 1,000 तक की कीमत वाले उत्पादों पर विक्रेताओं से कोई रेफरल शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह नया नियम 16 मार्च से लागू होगा। रेफरल शुल्क वह कमीशन होता है जो विक्रेता हर बिकने वाले उत्पाद पर अमेज़न को देते हैं। कंपनी का कहना है कि इस फैसले से छोटे व्यापारियों और नए उद्यमियों को सीधा फायदा मिलेगा।


अमेजन ने पिछले साल 300 तक के लगभग 1.2 करोड़ उत्पादों पर ‘जीरो रेफरल फीस’ नीति शुरू की थी। इसके बाद भारत में नए विक्रेताओं की संख्या में लगभग 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई। अब इस नीति का विस्तार करते हुए 1,000 तक की कीमत वाले 12.5 करोड़ से ज्यादा उत्पादों को शामिल किया गया है।


 छोटे शहरों के कारोबारियों पर फोकस
अमेजन इंडिया के सेलिंग पार्टनर सर्विसेज निदेशक अमित नंदा के अनुसार इस कदम का उद्देश्य खासकर टियर-2 और टियर-3 शहरों के छोटे व्यापारियों के लिए ऑनलाइन बिक्री को अधिक लाभदायक और आसान बनाना है। कंपनी ने कुछ शिपिंग शुल्क में भी कटौती की है, जिससे विक्रेताओं की कुल लागत कम होगी। अमेजन ने दिसंबर में घोषणा की थी कि वह 2030 तक भारत में 35 अरब डॉलर से अधिक निवेश करेगी। इसमें एआई इंफ्रास्ट्रक्चर, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और छोटे कारोबारियों की वृद्धि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। 
पिछले साल की गई फीस कटौती के बारे में बात करते हुए, रितेश बजाज, फाउंडर, तुलसी और सैलर, Amazon.in ने कहा, ‘‘एमेज़ॉन (Amazon) द्वारा 300 रुपये से कम मूल्य के प्रोडक्ट्स पर रेफरल फीस हटा लिए जाने से हमें काफी राहत मिली और हम मार्केटप्लेस में लो-टिकट आईटम बेचने में समर्थ बने, जो पहले बहुत मुश्किल होता था। इससे हमारे बिज़नेस में 1.5 गुना बढ़ोत्तरी हुई। यह एमेज़ॉन (Amazon) द्वारा सैलर्स को सपोर्ट देने का एक अच्छा निर्णय है।’’
Amazon.in पर सैलर तीन फुलफिलमेंट ऑप्शन चुन सकते हैं। वो खुद ग्राहक को ऑर्डर शिप कर सकते हैं; वो इज़ी शिप (ई.एस) का उपयोग कर सकते हैं, जिसमें उनके प्रोडक्ट उनकी दुकानों में रखे रहते हैं, और उनके पिकअप एवं डिलीवरी का काम एमेज़ॉन (Amazon) द्वारा संभाला जाता है। या वो फुलफिल्ड बाय एमेज़ॉन (एफबीए/एफसी) की मदद ले सकते हैं, जिसमें स्टोरेज, पैकिंग और शिपिंग का काम उनकी ओर से एमेज़ॉन (Amazon) द्वारा संभाला जाता है।
16 मार्च, 2026 से प्रति यूनिट होने वाली बचत के उदाहरण निम्नलिखित हैंः 999 रुपये मूल्य का फैशन ज्वेलरी नेकलेस बेचने वाले सैलर इज़ी शिप चैनल द्वारा प्रति यूनिट 224 रुपये की बचत कर सकेंगे, यानी उन्हें कुल फीस में 69 प्रतिशत की बचत होगी। प्रति यूनिट कुल फीस 324 रुपये से घटकर 100 रुपये रह जाएगी (500 ग्राम से कम वजन के प्रोडक्ट के लिए)। 798 रुपये मूल्य के ईयरफोन बेचने वाले सैलर फुलफिल्ड बाय एमेज़ॉन (एफसी) चैनल के माध्यम से प्रति यूनिट 139 रुपये की बचत कर सकेंगे, यानी कुल फीस में 56 प्रतिशत की कमी आएगी। प्रति यूनिट फीस 248 रुपये से कम होकर 109 रुपये रह जाएगी (500 ग्राम से कम वजन के प्रोडक्ट के लिए)। 299 रुपये मूल्य की टी-शर्ट बेचने वाले सैलर इज़ी शिप चैनल द्वारा प्रति यूनिट 15 रुपये की बचत कर सकेंगे, यानी उन्हें कुल फीस में 21 प्रतिशत की बचत होगी। प्रति यूनिट फीस 71 रुपये से घटकर 56 रुपये रह जाएगी।