सीहोर : वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ एडवांस्ड साइंसेज़ एंड लैंग्वेजेज द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर एक प्रेरक शैक्षणिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह आयोजन वर्ष 1928 में नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. सी. वी. रमन द्वारारमन प्रभावकी खोज की स्मृति में किया गया। कार्यक्रम को मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (एमपीसीएसटी), भोपाल का सहयोग प्राप्त हुआ तथा इसका समन्वयन डॉ. अभिनव कुमार और डॉ. सौरभ मिश्रा ने विश्वविद्यालय प्रबंधन के समर्थन से किया।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत उद्बोधन से हुई, जिसने पूरे आयोजन को चिंतनशील और भविष्य उन्मुख दिशा प्रदान की। मुख्य अतिथि, भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (आईआईएसईआर) भोपाल के डॉ. वरदराजन श्रीनिवासन नेप्रकाश से जीवन तक: प्रश्न पूछने की शक्तिविषय पर मुख्य व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि हर वैज्ञानिक उपलब्धि की शुरुआत जिज्ञासा से होती है। उन्होंने विद्यार्थियों को आलोचनात्मक चिंतन और अंतःविषयक सहभागिता को अपनाने के लिए प्रेरित किया, ताकि विज्ञान समाज में सार्थक परिवर्तन ला सके।

कार्यक्रम में समकालीन वैज्ञानिक क्षेत्रों पर विशेषज्ञ व्याख्यान भी आयोजित किए गए। डॉ. सिद्धार्थ मैती ने बायोइंजीनियरिंग और बायोमेडिकल विज्ञान पर अपने विचार रखते हुए जैविक प्रणालियों की समझ में गणितीय संरचनाओं की भूमिका को रेखांकित किया। वहीं डॉ. रुद्र कल्याण नायक ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर व्याख्यान देते हुए अनुसंधान, उद्योग और दैनिक जीवन में एआई की बढ़ती भूमिका और उभरते रुझानों पर प्रकाश डाला।

इस अवसर पर सी.एम. राइज स्कूल, आष्टा और गवर्नमेंट हाई स्कूल, कोठारी के विद्यार्थियों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ प्रश्नोत्तरी तथा मॉडल प्रस्तुति प्रतियोगिताएँ भी आयोजित की गईं। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में सी.एम. राइज स्कूल, आष्टा ने प्रथम और द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि गवर्नमेंट हाई स्कूल, कोठारी ने तृतीय स्थान हासिल किया। मॉडल प्रस्तुति प्रतियोगिता में दोनों विद्यालयों से उत्कृष्ट प्रविष्टियों का चयन विजेता के रूप में किया गया।

समापन सत्र में डॉ. वरदराजन श्रीनिवासन और डॉ. गीतांजलि गिरि द्वारा विजेताओं को पुरस्कार प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस आयोजन के माध्यम से वीआईटी भोपाल विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक दृष्टिकोण को सुदृढ़ करने, विद्यालय और विश्वविद्यालय के बीच सहभागिता को मजबूत बनाने तथा भावी नवप्रवर्तकों को प्रेरित करने की अपनी प्रतिबद्धता को पुनः स्थापित किया।