एवीएस न्यूज.नागपुर 
 वरिष्ठ अस्थिरोग विशेषज्ञ डॉ. आकाश सावजी ने कहा कि ऑस्टियोआर्थराइटिस मुख्य रूप से घुटनों और कूल्हों को प्रभावित करता है। जोड़ों में दर्द, जकड़न, सूजन और चलने-फिरने में कठिनाई इसके प्रमुख लक्षण हैं। बढ़ती उम्र, आयु से जुड़ी सूजन तथा रक्त-कोशिकाओं की कमी या उनका स्थायी रूप से नष्ट होना, रोग की प्रगति को प्रभावित करने वाले अहम कारक हैं।  यह समय अस्थिरोग (ऑर्थोपेडिक) रोगियों, विशेषकर बुज़ुर्गों के लिए काफी चुनौतीपूर्ण होता है।  

 

उन्होंने कहाकि बढ़ती उम्र के साथ ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी बीमारियां बुज़ुर्गों को घेर लेती हैं, जिनका असर सर्दियों के मौसम में और अधिक बढ़ जाता है। शोध यह भी दर्शाते हैं कि गतिशीलता में कमी के कारण बुज़ुर्गों की मानसिक स्थिति पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। लंबे समय तक सीमित गतिविधि अवसाद को बढ़ावा देती है और शरीर की कार्यक्षमता तेजी से घटने लगती है, जिससे पूरा परिवार भी मानसिक रूप से प्रभावित होता है।

डॉ. सावजी ने कहाकि पिछले तीन दशकों में दुनिया भर में ऑस्टियोआर्थराइटिस जैसी आयु-सम्बंधित बीमारियों के इलाज में प्लेटलेट रिच प्लाज़्मा थेरेपी का उपयोग तेजी से बढ़ा है। हालिया अध्ययनों से यह सिद्ध हुआ है कि पीआरपपी टेंडन की क्षति और सूजन को कम करने, दर्दनाशक दवाओं के बिना दर्द में उल्लेखनीय राहत देने तथा ऊतकों के पुनर्जीवन और मरम्मत को प्रोत्साहित करने में प्रभावी है।