• एफएआई (FAI) का वार्षिक सेमिनार उर्वरक क्षेत्र का सबसे प्रभावी मंच है, जहाँ नीतियों और नवाचार पर चर्चा होती है और भारत में पोषक प्रबंधन तथा किसान-केंद्रित सुधारों की दिशा तय की जाती है।
  • 2025 का सेमिनार इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट (आईएनएम), जलवायु-अनुकूल उर्वरक तकनीकों और मिट्टी के स्वास्थ्य से जुड़े समाधानों को तेज़ी से आगे बढ़ाने पर केंद्रित होगा।
  • माननीय केमिकल्स एवं फ़र्टिलाइज़र्स तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री द्वारा उद्घाटित होने वाला यह कार्यक्रम सरकार, उद्योग और विज्ञान जगत के विशेषज्ञों को एक साथ लाएगा, वो भी ऐसे महत्वपूर्ण समय में जब भारत डिजिटल, मज़बूत और फ्यूचर-रेडी उर्वरक उत्पादन और उपयोग के नए दशक में प्रवेश कर रहा है।

नई दिल्ली : भारतीय उर्वरक संघ (एफएआई (FAI)) 10 से 12 दिसंबर तक अपना वार्षिक सेमिनार 2025 नई दिल्ली में आयोजित करेगी। इसका उद्घाटन माननीय केमिकल्स एवं फ़र्टिलाइज़र्स तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री, श्री जगत प्रकाश नड्डा द्वारा किया जाएगा। ‘हरे भविष्य के लिए उर्वरक प्रबंधन: किसानों के सशक्तिकरण को गति’ विषय पर आधारित यह सेमिनार उर्वरक उद्योग के लिए एक वैश्विक मंच होगा, जहाँ प्रमुख नीतिनिर्माता, वैज्ञानिक और उद्योग से जुड़े विशेषज्ञ एक साथ मिलकर सस्टेनेबल नुट्रिएंट मैनेजमेंट और किसान-केंद्रित विकास के अगले चरण पर चर्चा करेंगे।

इस कार्यक्रम में माननीय राज्य मंत्री सुश्री अनुप्रिया पटेल और उर्वरक विभाग के सचिव श्री रजत कुमार मिश्रा भी शामिल होंगे। इनके साथ ही तकनीकी प्रदाता, पर्यावरण विशेषज्ञ, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि और किसान प्रतिनिधि भी उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम में चार तकनीकी सत्रों और सोलह प्रस्तुतियों के दौरान भारत और विदेश से आए प्रतिनिधि उर्वरक नीति, पोषक तत्व दक्षता, हरित उत्पादन के नए तरीक़ों और नवाचारों पर विचार-विमर्श करेंगे।

इस कार्यक्रम पर टिप्पणी करते हुए, एफएआई (FAI) के चेयरमैन और कोरोमंडल इंटरनेशनल के एमडी एवं सीईओ, श्री एस. शंकरसुब्रमण्यम ने कहा, “जब भारत खाद्य सुरक्षा को मज़बूत करने के साथ-साथ सतत विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहा है, ऐसे समय में उर्वरक क्षेत्र एक बड़े बदलाव के मोड़ पर खड़ा है। एफएआई (FAI) का वार्षिक सेमिनार संवाद और ज्ञान-साझा करने के लिए एक व्यापक मंच प्रदान करता है, ताकि हरित और बेहतर पोषक प्रबंधन की दिशा तय की जा सके। उर्वरक उद्योग संसाधनों का बेहतर उपयोग करके और संतुलित पोषण को बढ़ावा देकर नवाचार और सस्टेनेबिलिटी को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह उर्वरक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के लिए सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। हम अपने लक्ष्यों को देश की कृषि जरूरतों के अनुरूप रखते हुए विकास, मजबूती और लंबे समय की खाद्य सुरक्षा को आगे बढ़ाते रहेंगे।”

भारत का उर्वरक उद्योग देश की खाद्य सुरक्षा का एक महत्वपूर्ण आधार बना हुआ है। वर्ष 2024–25 में घरेलू उत्पादन 51 मिलियन टन तक पहुँच गया है, जो दस साल पहले 38 मिलियन टन था। देश में 150 से अधिक कंपनियाँ कुल पोषक तत्वों की आवश्यकता का लगभग तीन-चौथाई पूरी करती हैं, जबकि शेष भाग आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। सीमित खनिज संसाधन होने के बावजूद, उर्वरक क्षेत्र ने उत्पादन क्षमता बढ़ाकर और नई तकनीकों को अपनाकर—जिसमें नवीकरणीय ऊर्जा और ग्रीन अमोनिया जैसी पहलें शामिल हैं—वैश्विक प्रतिस्पर्धा में अपनी पकड़ मजबूत की है।

भारत में 14 करोड़ से अधिक किसान परिवार उर्वरक का उपयोग करते हैं, और देश की उर्वरक खपत लगभग 70 मिलियन टन है, जो चीन के बाद दूसरे स्थान पर है। सिंचाई का दायरा बढ़ने, किसानों का अधिक मूल्य वाले फसलों की ओर रुझान बढ़ने और मिट्टी के स्वास्थ्य पर ज़्यादा ध्यान देने से पोषक तत्वों की मांग लगातार बढ़ रही है।

इसी संदर्भ में, एफएआई (FAI) के महानिदेशक डॉ. सुरेश कुमार चौधरी ने कहा,“भारत का उर्वरक क्षेत्र एक ऐसे दशक में प्रवेश कर रहा है जहाँ नवाचार, स्थिरता और डिजिटल तकनीक पोषक तत्वों के उपयोग को नए तरीके से परिभाषित करेंगे। हमारा ध्यान एकीकृत पोषक प्रबंधन को तेज़ी से बढ़ाने, जलवायु-रोधी और अगली पीढ़ी के उत्पादों को आगे बढ़ाने, और मिट्टी के स्वास्थ्य को मजबूत करने पर होगा। वार्षिक सेमिनार 2025 विज्ञान-आधारित, तकनीक-सक्षम और भविष्य के लिए तैयार उर्वरक क्षेत्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”

उद्योग की बदलती जरूरतों को पूरा करने के लिए उर्वरक क्षेत्र में इंटीग्रेटेड न्यूट्रिएंट मैनेजमेंट (आईएनएम) पर विशेष ज़ोर दिया जा रहा है। इसके तहत पारंपरिक उर्वरकों के साथ वैकल्पिक उर्वरकों और आधुनिक, तकनीक-आधारित समाधानों को जोड़ा जा रहा है। यह बदलाव सरकार की कई प्रमुख पहलों—जैसे PM-PRANAM, प्राकृतिक खेती मिशन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, परंपरागत कृषि विकास योजना, गोबरधन, नमो ड्रोन दीदी, और किसान सुविधा केंद्र नेटवर्क के विस्तार—के अनुरूप है, ताकि एक संतुलित और टिकाऊ कृषि व्यवस्था बनाई जा सके जो जिम्मेदार खेती को बढ़ावा दे।

देश की खाद्य सुरक्षा और किसानों की आजीविका के लिए उर्वरकों का महत्व देखते हुए, सरकार पूरे वर्ष इसकी उपलब्धता और किफ़ायती कीमत सुनिश्चित करने के लिए अनुकूल सब्सिडी जारी रखे हुए है। वित्त वर्ष 2024–25 में सरकार ने यूरिया और न्यूट्रिएंट-बेस्ड सब्सिडी योजनाओं के तहत 1.9 लाख करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी प्रदान की। इसके अलावा, नई उत्पादन क्षमता बढ़ाने और सऊदी अरब, जॉर्डन, मोरक्को, क़तर और रूस जैसे संसाधन-संपन्न देशों के साथ रणनीतिक साझेदारियाँ बनाने से आपूर्ति सुरक्षा और मज़बूत हुई है। इसने वैश्विक बाज़ार में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में पोषक तत्वों की खपत को स्थिर रूप से बढ़ाने में मदद की है।