गोहरापदर, छत्तीसगढ़ : माइक्रोफाइनेंस (सूक्ष्म वित्त) भारत के ग्रामीण इलाकों में उद्यमिता और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का महत्वपूर्ण ज़रिया बना हुआ है। इसके मद्देनज़र, आईआईएफएल समूह की सहायक कंपनी और 2008 में स्थापित आरबीआई पंजीकृत माइक्रोफाइनेंस संस्थान - आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस लिमिटेड ने महिला उद्यमियों के लिए तैयार अपने संयुक्त देयता समूह (जॉइंट लायबिलिटी ग्रुपजेएलजी) ऋण मॉडल के माध्यम से छत्तीसगढ़ के गोहरापदर गांव की निवासी शबाना मोहम्मद को अपने पारंपरिक गद्दा बुनाई कौशल को सफल व्यवसाय में तब्दील करने में मदद की। यह अपने-आप में देश के ग्रामीण इलाके में वित्तीय समावेश की परिवर्तनकारी शक्ति का उदाहरण है।

 

शबाना ने सरकारी सहायता प्राप्त कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण प्राप्त किया है और उनके पास पहले से भी कुशल कारीगरी थी, लेकिन अपना उद्यम शुरू करने के लिए वित्तीय साधन की कमी थी। 2021 में, उन्होंने कपास, कपड़ा और धागा जैसे कच्चे माल खरीदने के लिए आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस से ₹50,000 का अपना पहला संयुक्त देयता समूह (जॉइंट लायबिलिटी ग्रुपजेएलजी) ऋण लिया। उनके गद्दों की खूबियों ने स्थानीय खुदरा विक्रेताओं और ग्राहकों का ध्यान आकर्षित किया, जिससे उन्हें स्थिर आय का स्रोत हासिल करने में मदद मिली।

 

शबाना ने अपनी शुरुआती सफलता से उत्साहित होकर उत्पादन बढ़ाने और दक्षता तथा गुणवत्ता में सुधार लाने वाली एक इलेक्ट्रिक बुनाई मशीन में निवेश करने के लिए ऋण चक्रों के ज़रिये अपनी विकास यात्रा जारी रखी। आज, वह प्रति माह लगभग 300 गद्दे बनाती हैं और पूरे छत्तीसगढ़ के स्कूलों, कॉलेजों और बाज़ारों में इनकी आपूर्ति करती हैं।

 

शबाना की कहानी, उद्यमशीलता की उपलब्धियां तो बयान करती ही है, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि इसने उनके समुदाय की कई महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता हासिल करने के लिए प्रेरित किया। उनका व्यवसाय अब उनके परिवार की आकांक्षाओं पाने में मदद करता है, उनका बड़ा बेटा उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहा है जबकि छोटा बेटा स्कूल जाता है।

 

आईआईएफएल समस्ता फाइनेंस लिमिटेड के एक प्रवक्ता ने इस सफलता के बारे में कहा, "शबाना की यात्रा समावेशी वित्त के मूल उद्देश्य को दर्शाती है। माइक्रोफाइनेंस महिलाओं को ऋण और स्थायी आजीविका के निर्माण के लिए आत्मविश्वास प्रदान कर उन्हें सशक्त बनाता है।

 

उचित सहयोग और समर्थन मिले तो हर महिला अपने परिवार, अपने समुदाय और अपने लिए बदलाव की सूत्रधार बन सकती है।"