आत्माराम सोनी.भोपाल
राजधानी भोपाल सहित समूचे प्रदेश में मानसून की विदाई तो हो चुकी है, लेकिन आसमान से गिरती बेमौसम बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।  क्योंकि धान और मक्का की फसलें कटाई के पहले बर्बाद हो रही है। खेतिहरों के अनुसार खेतों में धान और मक्का की फसल जहां आड़ी हो  गई है वहीं खलिहानों में रखी फसलें पानी में भीगनें के कारण सड़ रही है।  गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब मध्य प्रदेश में बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेरा हो। पिछले तीन सालों में मौसम के अनियमित पैटर्न ने प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को गहरा झटका दिया है।  

 


 बारिश की बदौलत अब 200 से 250 रुपए क्विंटल और कम भाव मिलेंगे:  भागीरथ पाटीदार  
कृषि उपज मंडी समिति भोपाल के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा किसान मोर्चा के पूर्व प्रदेश मंत्री भागीरथ पाटीदार के अनुसार वर्तमान में हो रही है बारिश किसानों के लिए आफत की बारिश साबित हो रही है। खेतों में खरीदी पूसा बासमती धान की फसल आड़ी हो गई हैं, तो जिन किसानों ने फसल की कटाई कर खलिहानों में धान की फसल को गहाई के लिए रखा है वह गीली हो गई है । अत: इस बारिश के बाद किसान को अब उचित दाम नहीं मिलेगा। पाटीदार ने कहा कि मंडियों में पूसा धान और मक्का के भाव पिछले साथ से काफी कम है लेकिन आफत की बारिश की बदौलत किसानों को 200 से 250 रुपए प्रति क्विंटल और कम भाव मिलेंगे। 

 


सरकार धान और मक्का उत्पादक किसानों के हित में सार्थक कदम उठाए: राजेश जैन 
मध्यप्रदेश राज्य कृषि विपणन (मंडी) बोर्ड के पूर्व सदस्य राजेश जैन ने कहा कि बेमौसम बारिश से खरीदी फसल उत्पादक किसानों को भारी नुकसान हो रहा है।  बारिश से खेतों में पानी भरने से फसलें आड़ी हो गई है जिसका दाना सूखनें के बाद दाना दागी हो जाएगा और किसानों को उचित दाम नहीं मिलेगा। अत: सरकार को धान और मक्का उत्पादक किसानों के हित में सार्थक कदम उठाना चाहिए। 

 


 मौसम की यह मार किसानों की कमर तोड़ रही : भगवान सिंह परमार 
धान उत्पादक किसान और भोपाल कृषि उपज मंडी समिति के पूर्व सदस्य भगवान सिंह परमार ने कहाकि भोपाल जिले के किसानों के साथ मध्यप्रदेश के कई जिलों में जारी बारिश से खरीफ सीजन की फसल को भारी नुकसान पहुंच रहा है।  उनका कहना है कि प्रदेश के कई गांवों के खेतों में पानी का स्तर इतना बढ़ गया है कि हार्वेस्टर मशीनें चल ही नहीं पा रहीं। खेतों में फिसलन और पानी की वजह से फसल कटाई पूरी तरह रुक चुकी है। बारिश ने मक्का की फसल को भी भारी नुकसान पहुंच रहा है । मौसम की यह मार किसानों की कमर तोड़ रही है और आर्थिक स्थिति को गहरा झटका लगा रहा है।  क्योंकि धान के दानों में नमी बढ़ गई है। जिससे उसकी गुणवत्ता और बाजार भाव दोनों गिर जाएंगे। वहीं, मकई की फसल में पानी भरने से फफूंद लगने का खतरा बढ़ गया है। 


 मकई की फसल को बड़ा नुकसान पहुंचाया :  मनीष मरेले 
मक्का कारोबारी मनीष मरेले ने बताया कि बारिश से मक्का उत्पादक किसानों को आर्थिक नुकसान हो रहा है। नई फसल आने से भाव में घटे हुए है लेकिन अब बारिश के मक्का की गुणवत्ता पर असर पड़ेगा, जिससे मंडियों में किसानों को अब और कम भाव मिलेगें।

 
किसानों को भारी आर्थिक नुकसान : संजीव जैन 
 भोपाल ग्रेन मर्चेंट एंड ऑयल सीड्स एसोसिएशन के  प्रवक्ता संजीव जैन ने कहाकि बारिश और हवा के कारण कई किसानों की धान की फसल गिर गई है। आशंका जताई कि बारिश जल्द नहीं रुकी तो खेतों में पानी भरने से फसलें सड़ सकती हैं। जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। उनका कहना है कि मौसम विभाग की चेतावनी है कि 30 अक्टूबर पर मौसम इसी तरह रहेगा। अत: मौसम  विभाग के इस अलर्ट के बाद किसानों के चेहरे पर संकट के बदला छा गए है। किसान अपनी धान और अन्य फसलों की कटाई को लेकर पशपेश में है। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार बारिश से अब तक सैकड़ों एकड़ फसल प्रभावित हो चुकी है। अत:राहत मुआवजा योजना पर विचार किया जाएगा।