खाने के तेल में पैकिंग का खेल, बड़ा पैकेट फिर भी मिल रहा कम वजन: मानक के अनुरूप एक लीटर तेल के पैकेट बेचना ही हुआ बंद
एवीएस न्यूज.भोपाल
नाप-तौल के सरकारी नियमों में हुए संशोधन ने निर्माता-विक्रेताओं को पैकिंग में मनमानी करने की छूट दे दी है। बाजार में उपभोक्ताओं को भ्रमित कर चतुराई से ठगा जा रहा है। बदले नियम और पैकिंग के खेल से ज्यादातर उपभोक्ता अनजान हैं। कंफेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के अनुसार बाजारों एक लीटर के समान आकार के पाउच में 800 ग्राम, 815 ग्राम, 870 ग्राम, 900 ग्राम और 910 ग्राम तेल उपभोक्ताओं को मिल रहा है। तमाम कंपनियों ने मानक एक लीटर तेल के पैकेट बेचना ही बंद कर दिए। कुछ बड़े ब्रांड ही एक लीटर (910 ग्राम) मानक मात्रा के पैक बना रहे हैं। ये ही कंपनियां पैक पर बड़े अक्षर में लीटर में मात्रा भी छाप रही हैं। जो तेल कारोबारियों और उपभोक्ताओं की परेशानियां बढ़ाए हुए है।
कैट के पूर्व प्रदेश महामंत्री रमाकांत तिवारी ने कहाकि सरसों तेल, तिल तेल, शुद्ध घी, ,बेसन सहित तमाम खाद्यान्न सामग्री में मिलावट हो रही है। ऐसे कोई वस्तु नहीं नही है जिसमें मिलावटी मुनाफाखोरी करने मिलावट नहीं कर रहे हैं। भारत सरकार ने शुद्ध घी पर 7 फीसदी जीएसटी कम की है। जिससे अब शुद्ध घी बनाने वालों को और मिलावट करने का मौका मिल गया है। तिवारी बताते है कि बाजार में 300 रुपए से लेकर 640 रुपए किलो के भाव तक शुद्ध घी बिक रहा है। उनके अनुसार वनस्पति घी में और शुद्ध घी में पहले 7 फीसदी का डिफरेंस था, लेकिन अब दोनों में बराबर -बराबर जीएसटी लग रहा है । जिसके चलते अब बाजारों में मिलावखोरी बढ़ने के साथ घटतौली के मामले भी तेजी के बढ़ने लगे हैं। तिवारी ने कहाकि अगर भारत सरकार ने तत्काल प्रभाव से मिलावट और कम वजन पर कार्रवाई नहीं की तो मुनाफाखोरी में जुटे मुनाफाखोर उपभोक्ताओं की गाढ़ी कमाई परे सरेआम डाका डालेंगी।
पैकिंग नियमों में बदलाव के बाद बड़ी कंपनियों की चाल
पहले तेल और रिफाइंड केवल तय पैकिंग में बिकता था जैसे एक किलो, 500 ग्राम, पांच किलो या 15 किलो ग्राम में । तब यह भी साफ था कि एक किलो पैक में करीब 910 मिली लीटर तेल ही होगा। लेकिन अब कंपनियों को छूट मिल चुकी है और वे 810 ग्राम, 750 ग्राम, 400 ग्राम जैसी अनियमित पैकिंग में भी तेल बाजार में उतार रही हैं।
सरकार से फिर से मानक पैकिंग लागू करने की मांग
तेल कारोबारी कहते हैं कि पहले पैकिंग तय थी, तो माल उठाने में भरोसा रहता था। अब हर कंपनी अलग साइज निकाल रही है। अगर हम एक ब्रांड का स्टॉक ले लें और अगले दिन दूसरी कंपनी उससे कम का पैक उतार दे, तो रिटेलर उसी की ओर चला जाता है। व्यापारी कहते हैं कि ग्राहक बोतल देखकर सोचता है कि यह एक किलो होगी, जबकि असल में 810 या 750 ग्राम ही होता है। कारोबारियों की मांग है कि सरकार को फिर से मानक पैकिंग लागू करनी चाहिए। एक किलो, 500 ग्राम और पांच किलो जैसे तय आकार ही मान्य हों, ताकि ग्राहक को धोखा न हो और व्यापारी भी संतुलित ढंग से कारोबार कर सकें।
2022 में नियमों में हुआ बदलाव, कंपनियों को मिली छूट
दरअसल, तेल की पैकिंग को लेकर पहले स्पष्ट कानून था। विधिक माप विज्ञान अधिनियम और पैकेज्ड वस्तु नियम 2011 के तहत कंपनियों को केवल तय पैकिंग में ही तेल बेचने की अनुमति थी। लेकिन अगस्त 2022 में सरकार ने नियमों में संशोधन कर कंपनियों को छूट दे दी कि वे किसी भी आकार में पैकिंग कर सकती हैं, जैसे 810 ग्राम, 750 ग्राम या 400 ग्राम। अब कंपनियों को सिर्फ इतना करना होता है कि पैक पर सटीक वजन और मात्रा साफ लिख दें। जिसका अनुपालन नहीं हो रहा है।
डिब्बा बंद व पैक्ड में भी घटतौली
डिब्बा बंद और पैक्ड वस्तुओं में भी घटतौली से उपभोक्ता को अतिरिक्त भार वहन करना पड़ रहा है। घटतौली में छोटे-बड़े सभी व्यापारी शामिल हैं। इतना ही नहीं देशी और विदेशी कंपनियां भी उपभोक्ताओं के साथ घटतौली करने से बाज नहीं आ रहीं। घटतौली रोकने के लिए बनाया गया बांट माप विभाग जो कार्रवाई करता है। वह ऊंट के मुंह में जीरा साबित होती है।

