भोपाल। भारत का भूमि बाजार 2025 की पहली छमाही में 2,898 एकड़ जमीन बेचकर 2024 के सभी बाजारों से आगे निकल गया। 2025 की पहली छमाही में 76 सौदों में 2,898 एकड़ से अधिक भूमि का लेनदेन हुआ। जबकि 2024 में 133 सौदों में 2,515 एकड़ भूमि का लेनदेन हुआ था। इसका मतलब है कि 2025 की पहली छमाही में 2024 के पूरे वर्ष की तुलना में 15 फीसदी अधिक भूमि का लेन-देन हुआ। 
क्रेडाई मध्यप्रदेश के अध्यक्ष मनोज मीक ने बताया कि इस रिकॉर्ड तोड़ वृद्धि के पीछे डेवलपर्स की मानसिकता में एक स्पष्ट बदलाव होना है। अब डेवलपर्स दीर्घकालिक सोच रहे हैं क्योंकि भारतीय रियल एस्टेट के भविष्य में विश्वास बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। उन्होनें बताया कि हालाकि मुंबई महानगर क्षेत्र, बेंगलुरु और पुणे में लगातार गतिविधियां देखी जा रही हैं, लेकिन अब ध्यान टियर 2 और टियर 3 शहरों पर केंद्रित हो रहा है। 65 फीसदी से ज्यादा जमीन के सौदे कोंबटोर, अहमदाबाद और अमृतसर जैसे शहरों से हुए, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि विकेंद्रीकरण सिर्फ भविष्य का चलन नहीं है। यह पहले से ही चल रहा है।  


- जमीन के लेन-देन में ऐतिहासिक उछाल दर्ज  
भारत के रियल एस्टेट क्षेत्र में तेजी जारी है क्योंकि 2025 की पहली छमाही में ज़मीन के लेन-देन में ऐतिहासिक उछाल दर्ज किया गया है।  अकेले 2025 की पहली छमाही में 2,898 एकड़ से ज्यादा जमीन के 76 सौदे हुए, जो 2024 में हुए कुल लेन-देन के आंकड़े को पार कर गया, जब 2,515 एकड़ से ज़्यादा ज़मीन के 133 सौदे हुए थे। 2025 के पहले छह महीनों में संचयी लेनदेन मूल्य 30,885 करोड़ रुपए तक पहुंच गया, जिसमें लगभग 1.47 लाख करोड़ रुपए की राजस्व क्षमता और 233 मिलियन वर्ग फुट की कुल विकास क्षमता है।


   -भविष्य को आकार देने वाले रुझान
 संयुक्त विकास समझौतों (जेडीए) में वृद्धि पर भी प्रकाश डालते हुए मीक ने कहाकि यह 2024 में साल-दर-साल 150 प्रतिशत बढ़ गया है। ये व्यवस्थाएं जोखिम-साझाकरण और पूंजी अनुकूलन के लिए तेजी से पसंद की जा रही हैं, विशेष रूप से उभरते आर्थिक गलियारों और बुनियादी ढांचा-केंद्रित क्षेत्रों में। 2021 और 2024 के बीच भारत में कुल 8,960 एकड़ भूमि के 347 सौदे हुए, जिनका मूल्य 86,582 करोड़ रुपए था, जिसमें 7.01 लाख करोड़ रुपए की राजस्व क्षमता और 608 मिलियन वर्ग फुट की विकास क्षमता थी। 2025 में यह प्रवृत्ति और तेज हो गई है। 


- रियल एस्टेट  प्रमुख आर्थिक स्तंभ के रूप में स्थापित होगा
उन्होंने कहाकि भारत का भूमि बाजार संरचनात्मक विकास के दौर से गुजर रहा है, जो विविध परिसंपत्तियों की मांग, निवेशकों के बढ़ते विश्वास और परिपक्व होते नियामकीय एवं वित्तपोषण परिदृश्य से प्रेरित है। रणनीतिक डेवलपर्स, औद्योगिक खिलाड़ियों और वैश्विक निवेशकों के इस क्षेत्र में प्रवेश के साथ, भूमि खरीद का यह उन्माद 2025 के बाद भी जारी रहने की उम्मीद है, जो भारत के अगले विकास चक्र में रियल एस्टेट को एक प्रमुख आर्थिक स्तंभ के रूप में स्थापित करेगा।