एथर 2025 रिपोर्ट में सामने आया कि सॉफ्टवेयर से भारतीय शहरों में राईडिंग के व्यवहार में क्या परिवर्तन आ रहा है
• एथर 2025 राईड डेटा में सामने आया कि मुंबई के मुकाबले बैंगलुरू के राईडर अचानक ब्रेक चार गुना अधिक लगाते हैं। कोलकाता के राईडर सबसे ज्यादा हॉर्न बजाते हैं।
एवीएस न्यूज.भोपाल
एथर एनर्जी की 2025 ईयर-एंड राईडिंग इनसाईट के मुताबिक भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर के राईडर्स के बीच दैनिक आवागमन के लिए कनेक्टेड टेक्नोलॉजी का उपयोग बढ़ता जा रहा है। इस रिपोर्ट में शहरवार राईडिंग व्यवहार प्रदर्शित कर रहा है कि सॉफ्टवेयर मोबिलिटी में क्या परिवर्तन लेकर आ रहा है।
भारत में पाँच लाख से अधिक कनेक्टेड एथर स्कूटर से एकत्रित किए गए डेटा में राईडिंग के व्यवहार, सुरक्षा उपायों और आवागमन की आदतों का खुलासा हुआ है। डेटा में सामने आया कि मुंबई के मुकाबले बैंगलुरू के राईडर अचानक ब्रेक चार गुना अधिक लगाते हैं। इससे शहर में ज्यादा अप्रत्याशित ट्रैफिक और बार-बार रुकने और चलने की परिस्थिति प्रदर्शित होती है।
एथर एनर्जी के चीफ बिज़नेस ऑफिसर, रवनीत फोकेला ने कहा, ‘‘टू-व्हीलर भारत में सबसे अधिक व्यापक स्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाले व्यक्तिगत मोबिलिटी समाधान हैं। लेकिन लोग दैनिक राईड किस प्रकार करते हैं, इसकी रियल-टाईम विज़िबिलिटी बहुत कम है। हमारी ईयर-एंड राईडिंग इनसाईट प्रदर्शित करती है कि सॉफ्टवेयर आवागमन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है, जो सड़क की परिस्थितियों के मुताबिक राईडर्स को बेहतर प्रतिक्रिया देने, राईडिंग के व्यवहार की निगरानी करने तथा सुरक्षा बढ़ाने में समर्थ बनाता है।’’
फोकेला ने कहा कि कनेक्टेड फीचर्स लगातार तेजी से अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘वित्तवर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में हमारे 88 प्रतिशत ग्राहकों ने हमारा कनेक्टेड सॉफ्टवेयर संग्रह, एथरस्टैक प्रो भी खरीदा। इससे प्रदर्शित होता है कि राईडर्स सॉफ्टवेयर को केवल एक एड-ऑन नहीं मानते हैं, बल्कि ऐसी टेक्नोलॉजी अपनाना चाहते हैं, जो उनके दैनिक आवागमन के अनुभव को और अधिक बेहतर बना दे।’’
डेटा में सामने आया कि राईडर सॉफ्टवेयर का उपयोग नैविगेशन और सुरक्षा के अलावा भी कर रहे हैं। महिला वर्ल्ड कप फाईनल के दौरान 31,000 से अधिक राईडर्स ने लाईव मैच स्कोर अपने स्कूटर के डैशबोर्ड पर देखा। इससे प्रदर्शित होता है कि कनेक्टेड इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर किस प्रकार दैनिक जीवन में शामिल होकर एक इंटरैक्टिव प्लेटफॉर्म बनते जा रहे हैं।
विभिन्न शहरों में हॉर्न बनाने के पैटर्न में भी काफी अंतर था। कोलकाता में हॉर्न देश में सबसे अधिक बजाया गया। यहाँ पर हर घंटे औसतन 131 बार हॉर्न बजाया गया। इससे इस शहर में घना ट्रैफिक और काफी तेज आवाज में सिग्नल देने की आदत प्रदर्शित होती है। इसके विपरीत, पुणे और हैदराबाद जैसे शहर सबसे अधिक शांत शहरों में थे, जिससे यहाँ राईडिंग के लिए ज्यादा शांत और प्रत्याशित वातावरण प्रदर्शित होता है। दक्षिण भारत में टियर 2 शहरों और छोटे शहरों में भी राईडिंग का स्थिर व्यवहार प्रदर्शित हुआ, जहाँ अचानक ब्रेक लगाने और हॉर्न बजाने की तीव्रता कम रही।
सुरक्षा से संबंधित सॉफ्टवेयर फीचर्स का उपयोग भी रोज बढ़ रहा है। एथर का फॉलसेफ सिस्टम स्कूटर के गिरने पर मोटर की पॉवर को अपने आप काट देता है। मुंबई और बैंगलुरू में यह फीचर कम बार एक्टिवेट हुआ। औसतन प्रति स्कूटर हर दो साल में केवल एक बार एक्टिवेट हुआ। इसके मुकाबले, दिल्ली और हैदराबाद जैसे शहरों में इस फीचर की एक्टिवेशन दर ज्यादा दर्ज हुई। इससे सड़क की परिस्थितियों, ट्रैफिक के घनत्व और राईडिंग के स्टाईल में अंतर प्रदर्शित होता हैै। कनेक्टेड फीचर, लाईव लोकेशन शेयरिंग सुरक्षा बढ़ाने और लोकेशन की जानकारी देने के लिए डिज़ाईन किया गया है। इसका उपयोग ज्यादा ट्रैफिक वाले शहरों में अधिक हुआ। आगरा, कोटा और नई दिल्ली के राईडर्स ने अपनी लाईव लोकेशन पोर्वोरिम और रामनगर जैसे छोटे व शांत शहरों के मुकाबले दो से तीन गुना ज्यादा बार शेयर की।
ये जानकारियाँ प्रदर्शित करती हैं कि भारत में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर का बाजार हार्डवेयर और इलेक्ट्रिफिकेशन से आगे बढ़ रहा है। अचानक ब्रेक लगाने, हॉर्न बजाने, सेफ्टी फीचर्स के उपयोग और लाईव लोकेशन शेयरिंग का शहरवार डेटा देश में सड़क की बदलती परिस्थितियों और शहरों के ट्रैफिक में राईडर्स के लिए सॉफ्टवेयर की बढ़ती भूमिका को प्रदर्शित करता है।

