सेंट्रल स्क्वेयर फाउन्डेशन की भारत सर्वे फॉर ऐडटेक रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश के स्कूली छात्रों एवं अध्यापकों में ऐड-टेक के इस्तेमाल एवं डिजिटल पहुंच से जुड़े रूझानों पर डाली रोशनी
एवीएस न्यूज.भोपाल
नई दिल्ली आधारित अग्रणी गैर-लाभ संगठन सेंट्रल स्क्वेयर फाउन्डेशन, जो प्राइमरी शिक्षा में सुधार के लिए काम कर रहे हैं, ने हाल ही में भारत सर्वे फॉर ऐडटेक (BaSE) के दूसरे संस्करण का लॉन्च किया, जो फाउन्डेशन द्वारा संचालित अपनी तरह का पहला बड़े पैमाने का राष्ट्रीय सर्वेक्षण है।
यह सर्वेक्षण मध्य प्रदेश में कम आय वर्ग के अभिभावकों, बच्चों एवं अध्यापकों में टीचिंग और लर्निंग के लिए टेक्नोलॉजी के उपयोग और पहुंच के बारे में जानकारी प्रदान करता है।
इस अध्ययन के तहत 1253 परिवारों से तकरीबन 1500 लोगों और 250 शिक्षकों के साथ बातचीत की गई। सर्वेक्षण में उन परिवारों को शामिल किया गया, जहां 6-18 साल के बच्चे सरकारी, सरकार द्वारा सहायता प्राप्त और निम्न से मध्यम शुल्क वाले निजी स्कूलों में पढ़ते हैं। उन्हीं लोकेशनों के अध्यापकों के साथ भी सर्वे किया गया ताकि इस बात को बेहतर समझा जा सके कि क्लासरूम में टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किस तरह से किया जा रहा है।
मध्य प्रदेश में राज्य-स्तरीय परिणाम डिजिटल एक्सेस और टेक्नोलॉजी-इनेबल्ड लर्निंग के महत्वपूर्ण रूझानों पर रोशनी डालते हैं। अध्ययन में पता चला कि 93 फीसदी परिवारों के पास कम से कम एक स्मार्टफोन है, इनमें से 46 फीसदी परिवारों के पास एक से अधिक स्मार्टफोन हैं, यनि घर में डिजिटल एक्सेस उपलब्ध है। कम से कम 69 फीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन है, जिनमें से 66 फीसदी बच्चे रोज़ाना स्मार्टफोन का इस्तेमाल करते हैं।
हालांकि ऐसे ज़्यादातर मामलों में बच्चों को अपने परिवार के किसी सदस्य के साथ स्मार्टफोन शेयर करना पड़ता है, उनके पास अपनी खुद की डिवाइस नहीं है। स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वाले 52 फीसदी बच्चे इंटरनेट का उपयोग करते हैं, हालांकि कुछ मामलों में कनेक्टिविटी बीच-बीच में टूटती है।
सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि राज्य के 78 फीसदी बच्चे ऐडटेक टूल्स के बारे में जानते हैं और 58 फीसदी बच्चे लर्निंग के लिए टेक्नोलॉजी का उपयोग करते हैं। सबसे ज़्यादा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे प्लेटफॉर्म्स हैं- यूट्यूब (ऐडटेक इस्तेमाल करने वाले 97 फीसदी बच्चे इसका उपयोग करते हैं), इसके बाद व्हॉट्सऐप (72 फीसदी), गूगल (35 फीसदी), व्हॉट्सऐप/मेटा एआई (8 फीसदी), गूगल जेमिनाई (4 फीसदी)। सर्वेक्षण में यह भी पाया गया कि राज्य के 92 फीसदी अध्यापक ऐडटेक टूल्स का उपयोग करते हैं, 83 फीसदी अध्यापक सक्रियता के साथ इन टूल्स का उपयोग टीचिंग के लिए करते हैं।
अध्यापकां द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले ऐसे टूल्स हैं- यूट्यूब (ऐडटेक इस्तेमाल करने वाले 61 फीसदी अध्यापक इसका उपयोग करते हैं), इसके बाद व्हॉट्सऐप (46 फीसदी), गूगल (54 फीसदी), दीक्षा (16 फीसदी), प्रेरणा लक्ष्य (14 फीसदी)।
सर्वेक्षण के तहत श्क्षि में जनरेटिव एआई के शीघ्र इस्तेमाल और जागरुकता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया। ऐडटेक इस्तेमाल करने वाले 31 फीसदी छात्रों ने एआई के बारे में सुना है और 27 फीसदी लर्निंग के लिए इसके ऐप्लीकेशन जानते हैं।
ऐड-टेक इस्तेमाल करने वाले 15 फीसदी बच्चे लर्निंग के लिए जैनएआई का उपयोग करते हैंः जैनएआई का उपयोग करने वाले 44 फीसदी बच्चे सप्ताह में कई बार इसका उपयोग करते हैं, जबकि 49 फीसदी बच्चे रोज़ाना इसका उपयोग करते हैं।
वहीं अध्यापकों की बात करें तो ऐड-टेक इस्तेमाल करने वाले 78 फीसदी अध्यापकों ने एआई के बारे में सुना है और 69 फीसदी टीचिंग में इसके ऐप्लीकेशन को जानते हैं। ऐड-टेक इस्तेमाल करने वाले 38 फीसदी अध्यापक टीचिंग एवं स्कूल-संबंधी गतिविधियों के लिए जैनएआई का उपयोग करते हैं; जैन-एआई का उपयोग करने वाले 35 फीसदी अध्यापक सप्ताह में कई बार इसका उपयोग करते हैं, 40 फीसदी रोज़ाना इसका उपयोग करते हैं।
इन परिणामों पर बात करते हुए श्वेता शर्मा- कुकरेजा, मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ, सेंट्रल स्क्वेयर फाउन्डेशन ने कहा, ‘‘भारत सर्वे फॉर ऐडटेक इस विषय पर सबसे व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है कि किस तरह भारत में लर्निंग के लिए टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया जा रहा है। डिवाइसेज़ की पहुंच बहुत अधिक बढ़ चुकी है, अब इस बात को समझने की ज़रूरत है कि किस तरह बच्चे और अध्यापक टेक्नोलॉजी को अपनाकर रोज़मर्रा में लर्निंग के लिए इसका उपयोग कर रहे हैं।
ये रूझान नीति निर्माताओं, शिक्षकों एवं इनोवेटर्स के लिए बेहद उपयोगी है, जो यह सुनिश्चित करने के लिए काम करते हैं कि डिजिटल टूल्स हर बच्चे के लर्निंग के परिणामों को बेहतर बना सकें।’’
भारत सर्वे फॉर ऐडटेक 2025 रिपोर्ट का उद्देश्य नीति निर्माताओं, शिक्षकों और ऐडटेक इकोसिस्टम को यह जानकारी प्रदान करना है कि किस तरह टेक्नोलॉजी की पहुंच, उपयोग एवं जागरुकता- शिक्षा प्रणाली को बेहतर बना सकती है। परिवारां और क्लासरूम के अनुभवों का मूल्यांकन कर यह अध्ययन इस विषय पर रूझान प्रस्तुत करता है कि किस तरह डिजिटल टूल्स भारत के संदर्भ में टीचिंग एवं लर्निंग में सहयोग प्रदान कर सकते हैं।

