भोपाल।  भारतीय रेलवे देश की रीढ़ मानी जाती है यह न केवल यात्री परिवहन का प्रमुख माध्यम है, बल्कि माल ढुलाई के क्षेत्र में भी इसकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। लेकिन इसी माल ढुलाई व्यवस्था के एक अभिन्न अंग, रेलवे वैगनों के आवंटन और संचालन में आज ऐसी गंभीर अनियमितताएं और भ्रष्टाचार उत्पन्न हो चुका है, जो न केवल ईमानदार रोड ट्रांसपोर्ट व्यवसायियों को हाशिए पर डाल रहा है, बल्कि सरकारी राजस्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा बन गया है।


- वैगन आवंटन में पारदर्शिता का घोर अभाव 
रेलवे के नियमों के अनुसार माल ढुलाई के लिए वैगन का आवंटन एक निष्पक्ष और आवश्यकता आधारित प्रक्रिया होनी चाहिए। लेकिन हकीकत यह है कि बिना ऊंचे स्तर पर जान-पहचान या भ्रष्टाचार के सहारे, आम व्यापारी या ट्रांसपोर्ट व्यवसायी को वैगन का मासिक या वार्षिक आवंटन मिलना लगभग असंभव हो गया है। कई जगहों पर दलालों का बोलबाला है, जो मोटी रकम लेकर वैगन दिलवाने का व्यवसाय चला रहे हैं।


पीसीसी से अधिक वजन - ओवरलोडिंग बनाम सुरक्षा 
रेलवे बोर्ड वर्ष 2019 की अनुमेय वहन क्षमता (पीसीसी) चार्ट के अनुसार  बॉक्सएन वैगन की पीसीसी -57.8 टन, बीसीएनएचएल वैगन की पीसीसी  63 टन निर्धारित है परंतु ग्राउंड रिपोर्ट्स और ट्रांसपोर्टरों से प्राप्त जानकारियों से पता चलता है कि इन वैगनों में औसतन 15 से 25 फीसदी तक अधिक वजन लादा जा रहा है। यानी एक बॉक्सएन वैगन में 65 से 72 टन तक का भार डाला जा रहा है। यह न केवल रेलवे ढाँचे   को नुकसान पहुँचा रहा है, बल्कि बड़े स्तर पर दुर्घटनाओं की संभावना भी बढ़ा रहा है।


- माल की जानकारी और दस्तावेजीकरण का अभाव 
जब कोई ट्रक सड़कों पर माल ले जाता है, तो उसे जीएसटी चालान, ई-वे बिल, वाहन फिटनेस, टोल भुगतान, परमिट आदि जैसी अनेकों औपचारिकताओं से गुजरना होता है। इसके विपरीत, रेलवे वैगनों में भेजे जाने वाले माल की न तो कोई गहन जांच होती है, न ही कोई दस्तावेज माँगे जाते हैं, और न ही किसी सरकारी विभाग को यह पता होता है कि वैगन में क्या भरा है। यह स्थिति कर चोरी को जन्म देती है और असंगठित व्यापार को बढ़ावा देती है। इससे न केवल सरकार को हज़ारों करोड़ रुपए के राजस्व की हानि होती है, बल्कि ईमानदार व्यवसायियों को भी बाज़ार में असमान प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ता है।


- प्रतिबंधित और अवैध माल का निर्बाध परिवहन
एक और चिंताजनक पहलू यह है कि कई बार प्रतिबंधित, विस्फोटक या अनधिकृत सामग्रियां भी इन वैगनों के माध्यम से बेधड़क एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाई जाती हैं। बिना निगरानी और चेकिंग के यह प्रक्रिया राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुकी है। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि कहीं न कहीं रेलवे के अंदरूनी सिस्टम में भी लापरवाही या मिलीभगत है।


- राजस्व का नुकसान और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में असंतुलन 
संभावित आर्थिक हानि का विश्लेषण - भारतीय रेलवे द्वारा 2023-24 में कुल माल ढुलाई 91500 मिलियन टन, अनुमानित अवैध या अघोषित ट्रांसपोट 3-5 फीसदी (45-75 मिलियन टन), औसतन फ्रेट दर 1.60 - 2.30 रुपए प्रति टन प्रति किलोमीटर, संभावित वार्षिक राजस्व हानि 3000 -5000 करोड़ रुपए। यदि इस ओवरलोडिंग पर लगे दंड शुल्क और टैक्स चोरी को जोड़ दिया जाए, तो यह हानि कई हजार करोड़ को पार कर सकती है।


- एक न्यायसंगत परिवहन प्रणाली के लिए जरूरी 
 च्च स्तरीय जांच समिति का गठन किया जाए, जो वैगन आवंटन प्रणाली और ओवरलोडिंग की विस्तृत जांच करें। जीएसटी इनवॉइस, ई-वे बिल और सामग्री विवरण को रेलवे मालवाहन में भी अनिवार्य किया जाए। वैगन आवंटन को डिजिटल, पारदर्शी और सार्वजनिक बनाया जाए। सीबीआईसी, डीजीजीआई और रेलवे सतर्कता निदेशालय की संयुक्त निगरानी होनी चाहिए।  ईमानदार ट्रांसपोर्टरों को बराबरी का अवसर दिया जाए, जिससे देश की लॉजिस्टिक्स प्रणाली संतुलित व सुरक्षित बनी रहे।

 


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 ओवरलोडिंग और पारदर्शिता के अभाव में काम 
रेलवे को भारत की प्रगति की धुरी कहा जाता है, लेकिन जब यह प्रणाली भ्रष्टाचार, ओवरलोडिंग और पारदर्शिता के अभाव में काम करने लगे तो उसका असर न केवल व्यापार, बल्कि सुरक्षा और राजस्व पर भी पड़ता है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि इस अनदेखे संकट को गंभीरता से लिया जाए और तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।
राजेंदर कपूर
अध्यक्ष, ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन