एवीएस न्यूज.भोपाल

 

प्रधानमंत्री नरेंद मोदी की ओर से सोने की खरीदी को लेकर एक साल तक संयम  बरतने जैसी चर्चाओं और अपील के बाद भोपाल सहित मध्यप्रदेश और देशभर के सर्राफा बाजार में हलचल तेज हो गई है।  बाजार में इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं।

ज्वैलर्स और सर्राफा कारोबार से जुड़े संगठनों का कहना है कि यदि लंबे समय तक सोने की खरीदी में गिरावट आती है, तो इसका सीधा असर कारोबार, रोजगार और कारीगर वर्ग पर पड़ेगा। छोटे ज्वैलर्स पहले ही कमजोर मांग और बढ़ती कीमतों से दबाव में हैं। 


 बाजार में मंदी जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई 
बाजार विशेषज्ञ एवं बिजनेश मोटिवेशनल स्पीकर,  अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मंडल  और प्रदेश महामंत्री नवनीत अग्रवाल ने कहाकि बिक्री घटने की स्थिति में नकदी प्रवाह प्रभावित हो सकता है और कई छोटे कारोबारियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे बाजार में मंदी जैसी स्थिति बनने की आशंका जताई जा रही है।  सोने की उपलब्धता/कीमत में असंतुलन बढ़ता है, तो अवैध कारोबार या तस्करी की गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। हालांकि विशेषज्ञ इसे केवल संभावित जोखिम के रूप में देख रहे हैं।


 असर सिर्फ ज्वेलरी कारोबार में नहीं, बल्कि लाखों परिवारों, कारीगरों पर भी दिखेगा  
ज्वैलर्स आनंद सोनी का कहना है कि भारत में सोना सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और सामाजिक रीति-रिवाजों का हिस्सा है, इसलिए मांग पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है, लेकिन अल्पकालिक गिरावट से पूरे सेक्टर पर दबाव जरूर बन सकता है।  आनंद सोनी ने कहाकि यदि आने वाले महीनों में बिक्री नहीं बढ़ी, तो इसका असर सिर्फ ज्वेलरी कारोबार तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाखों परिवारों, कारीगरों और पूरे बाजार पर दिखाई देगा। 
 

 

बाजार में मंदी बढ़ने पर रोजगार संकट भी पैदा हो सकता 
सराफा व्यवसायी संजीव गर्ग (गांधी)का कहना है कि लगातार महंगे होते सोने के कारण आम ग्राहक हल्के गहनों या पुरानी ज्वेलरी एक्सचेंज की तरफ बढ़ रहे हैं। शादी और त्योहारों के सीजन में भी ग्राहकों की संख्या उम्मीद से कम है। कई शहरों में छोटे ज्वैलर्स पुराने स्टॉक और नकदी संकट से जूझ रहे हैं। यही स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो छोटे व्यापारियों के सामने दुकान चलाना मुश्किल हो सकता है। इसका सीधा असर कारीगरों, डिजाइनरों, सेल्स स्टाफ और सप्लाई चेन से जुड़े लाखों लोगों पर पड़ेगा। कई कारोबारियों ने आशंका जताई है कि बाजार में मंदी बढ़ने पर रोजगार संकट भी पैदा हो सकता है।


इधर आर्थिक जानकारों का कहना है कि यदि  सराफा बाजार कमजोर होता है और सोने पर टैक्स तथा आयात शुल्क ऊंचे बने रहते हैं, तो अवैध कारोबार और तस्करी की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। हालांकि विशेषज्ञ इसे फिलहाल आशंका मान रहे हैं, लेकिन उनका कहना है कि भारत में पहले भी ऊँची ड्यूटी के दौरान गोल्ड स्मगलिंग बढ़ने के मामले सामने आ चुके हैं।
छोटे ज्वैलर्स का कहना है कि बड़े ब्रांड किसी तरह बाजार में टिक सकते हैं, लेकिन स्थानीय दुकानों और पारंपरिक सर्राफा कारोबार पर सबसे ज्यादा दबाव है।

कई व्यापारियों ने सरकार से टैक्स राहत, कारोबार समर्थन और बाजार में भरोसा बढ़ाने वाले कदम उठाने की मांग की है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सोना केवल निवेश नहीं, बल्कि परंपरा और सामाजिक सुरक्षा का हिस्सा है, इसलिए इसकी मांग पूरी तरह खत्म होना मुश्किल है। लेकिन मौजूदा हालात ने गोल्ड मार्केट के सामने नई चुनौती जरूर खड़ी कर दी है।