राज्यमंत्री चंद्रशेखर पेम्मासानी ने 6जी के भविष्य को आकार देने के लिए डिजाइन नीत नवप्रवर्तन एवं उद्योग की गहरी भूमिका की वकालत की
एवीएस न्यूज.नई दिल्ली
सीओएआई की द्वितीय डिजिकॉम सीरीज- सीओएआई डिजिकॉम समिट 2026 आज शुरू हुआ जिसमें सरकारी अधिकारियों, नियामकों और उद्योग जगत के नेताओं ने अगली पीढ़ी के दूरसंचार नेटवर्कों और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं 5जी जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों द्वारा समर्थित एक सुरक्षित, लचीले और नवप्रवर्तन संचालित डिजिटल इकोसिस्टम की वकालत की।
यह आयोजन उद्घाटन सत्र के साथ शुरू हुआ जिसमें मुख्य अतिथि माननीय संचार एवं ग्रामीण विकास राज्यमंत्री डॉक्टर चंद्रशेखर पेम्मासानी के साथ ही ट्राई के चेयरमैन श्री अनिल कुमार लाहोटी, वोडाफोन आइडिया के सीईओ एवं सीओएआई के चेयरपर्सन श्री अभिजित किशोर, जीएसएमए के प्रमुख (एपीएसी) श्री जूलियन गोरमैन, एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री नितिन बंसल, एल्टियस टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के मुख्य परिचालन अधिकारी श्री अश्वनी खिल्लन, भारती एयरटेल के मुख्य नियामकीय अधिकारी एवं सीओएआई के उपाध्यक्ष श्री राहुल वत्स और सीओएआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल डॉक्टर एसपी कोचर सहित सरकार और उद्योग जगत से प्रमुख नेता शामिल हुए।
इस समिट की थीम थी “India’s Techade: Accelerating and Shaping the Digital Future,” जिसके तहत भारत के डिजिटल पथ को आकार देने में आने वाली प्रमुख चुनौतियों और अवसरों पर चर्चा के लिए नीति निर्माता, दूरसंचार ऑपरेटर, वैश्विक टेक्नोलॉजी लीडर, अकादमिक क्षेत्र से लोग और नवप्रवर्तक एकजुट हुए। इस आयोजन को एक भविष्य अनुरूप डिजिटल पारितंत्र के निर्माण में नीति निर्देश, उद्योग की प्राथमिकताओं और प्रौद्योगिकी उन्नयन के मुताबिक एक उच्च स्तरीय प्लेटफॉर्म के तौर पर प्रस्तुत किया गया है।
अपने उद्घाटन भाषण में माननीय संचार राज्यमंत्री डॉक्टर चंद्रशेखर पेम्मासानी ने कहा, “भारत का दूरसंचार क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है जिसे मजबूत सरकारी नीतिगत समर्थन और उद्योग नेतृत्व वाले निवेशों से आकार मिल रहा है। पिछले एक दशक में हमने स्पेक्ट्रम प्रबंधन में सुधारों, मार्ग के अधिकार और आधुनिक नियामकीय ढांचे से प्रेरित एक परिवर्तनकारी यात्रा देखी है। यह प्रगति सरकार और उद्योग के बीच एक साझीदारी को दर्शाती है जिससे व्यापक स्तर पर उत्पादन, किफायतीपन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा संभव हुई है। इस उद्योग ने महज 22 महीनों में 5जी का तेज विस्तार और वैश्विक स्तर पर सबसे अधिक डेटा उपयोग स्तरों में से एक सहित भारी निवेशों के साथ प्रतिक्रिया दी है। मैं ऑपरेटरों और विनिर्माताओं से डिजाइन आधारित विनिर्माण पर ध्यान देने, निर्यात ग्रेड की जांच एवं प्रमाणन सुविधाओं का निर्माण करने और डिजाइन, आईपी एवं प्रतिभा विकास के लिए वैश्विक टेक्नोलॉजी लीडर्स के साथ संयुक्त उपक्रम लगाने का अनुरोध करता हूं। एआई, 6जी और क्वांटम कम्युनिकेशंस के उभरने के साथ अगले चरण में डिजाइन आधारित विनिर्माण और गहन आरएंडडी भागीदारी पर ध्यान देना आवश्यक है ताकि भारत को वैश्विक मानकों को तैयार करने में मदद मिल सके।”
ट्राई चेयरमैन श्री अनिल कुमार लाहोटी ने कहा, “भारत के दूरसंचार क्षेत्र ने पिछले कुछ वर्षों में एक व्यापक स्तर पर किफायतीपन के साथ ऐसी कनेक्टिविटी उपलब्ध कराई है जोकि वैश्विक स्तर पर बेजोड़ है। प्रगतिशील नीतियों, नियामकीय निश्चिंतता और उद्योग द्वारा सतत निवेश की वजह से यह उपलब्धि संभव हो सकी। पिछले 10 वर्षों में मोबाइल नेटवर्क 4.5 गुना से अधिक बढ़ा है और आज इसमें सबसे बड़ी 5जी तैनातियों में से एक शामिल है। जहां क्षमता विस्तार जारी है, सर्वव्यापी कवरेज की उपलब्धता को लेकर उपभोक्ताओं की अपेक्षा बढ़ रही है। जबरदस्त आधारभूत ढांचा और उपभोक्ता संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए हमारे सतत प्रयासों में स्पेक्ट्रम बढ़ाने की सिफारिश, इनडोर कनेक्टिविटी और डिजिटल सहमति के लिए नियामकीय रूपरेखा का विकास और स्पैम पर रोक के लिए एआई का उपयोग शामिल है।”
वोडाफोन आइडिया के सीईओ एवं सीओएआई के चेयरपर्सन श्री अभिजित किशोर ने कहा, “भारत का दूरसंचार क्षेत्र, व्यापक कनेक्टिविटी और वैश्विक स्तर पर बेजोड़ किफायती दरों के माध्यम से देश के डिजिटल परिवर्तन का आधार बना हुआ है। नीति को लेकर निश्चिंतता और नियामकीय स्थिरता महत्वपूर्ण बनी हुई है क्योंकि दीर्घकालीन ढांचागत निवेश के लिए एक ऐसी पूर्वानुमानित रूपरेखा की जरूरत है जो सरकार, नियामकों और उद्योग के मध्य सतत रचनात्मक जुड़ाव के साथ ही पूंजी की गहनता और इस क्षेत्र की रणनीतिक आर्थिक भूमिका को मान्यता देती हो। आगे चलकर, इस क्षेत्र को अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी के लिए तैयार करना होगा जहां भावी प्रौद्योगिकियां महज प्रौद्योगिकी तैयारी की ही नहीं, बल्कि मानकों, स्पेक्ट्रम रणनीति और व्यापक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की भी मांग करेंगी।”
सीओएआई के महानिदेशक लेफ्टिनेंट डॉक्टर एसपी कोचर ने कहा, “दूरसंचार आज महज कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक मूल्यवर्धित क्षैतिज संरचना है जो वित्त, स्वास्थ्य, शासन और उपक्रम जैसे क्षेत्रों को शक्ति प्रदान कर रहा है। जैसा कि हम भारत की डिजिटल यात्रा के अगले चरण में कदम रख रहे हैं, अब ध्यान विश्वास और सहयोग पर आधारित बुद्धिमान, सुरक्षित और लचीले नेटवर्क बनाने पर केंद्रित करना होगा। यह डिजिकॉम समिट का दूसरा संस्करण है। हम एक अनोखे कार्यक्रम का आयोजन करने में सफल रहे हैं और दूरसंचार क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवी इस बात पर प्रकाश डालने के लिए एकत्रित हुए हैं कि तकनीकी शिक्षा भारत की देन कैसे है।”
भारती एयरटेल के मुख्य नियामकीय अधिकारी एवं सीओएआई के उपाध्यक्ष श्री राहुल वत्स ने कहा, “हम एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर हैं जहां विश्वास, लचीलापन और नवप्रवर्तन उद्योग के लिए केंद्रीय प्राथमिकताएं बन रही हैं। नियामक और नीतिगत वातावरण को मजबूत करने में हुई प्रगति को स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है। साथ ही, यह उद्योग आरएंडडी को आगे बढ़ाने, ग्राहक अनुभव बढ़ाने और अधिक लचीले नेटवर्कों का निर्माण करने को लेकर प्रतिबद्ध बना हुआ है। जैसा कि एआई ने इस क्षेत्र को नया आकार देना शुरू कर दिया है, भागीदार इस बदलाव को अपनाने और नेतृत्व प्रदान करने के लिए तैयार हैं। इस पूरे पारितंत्र में सतत गठबंधन इस उद्योग को आगे ले जाने में महत्वपूर्ण साबित होगा।”
एरिक्सन इंडिया के प्रबंध निदेशक श्री नितिन बंसल ने कहा, “भारत की डिजिटल यात्रा आगे बढ़ाने के साथ नेटवर्कों का सुरक्षित, लचीला और इंटेलिजेंट होना आवश्यक है। इस देश ने सबसे तेज 5जी विस्तारों में से एक हासिल किया है जहां मजबूत आधारभूत ढांचा और उच्च डेटा उपभोग मौजूद है। आगे चलकर, 5जी एडवांस्ड एप्लीकेशंस को सपोर्ट प्रदान करते हुए एक महत्वपूर्ण ढांचा के तौर पर काम करेगा। इंडस्ट्रीयल ऑटोमेशन के एक अहम अवसर के तौर पर उभरने के साथ एआई, क्लाउड और 5जी जैसी प्रौद्योगिकियां डिजिटलीकरण को गति देंगी। भावी वृद्धि को सहयोग देने के लिए अब इंटेलिजेंट नेटवर्कों के निर्माण पर ध्यान देना आवश्यक है।”
जीएसएमए के प्रमुख (एपीएसी) श्री जूलियन गोरमैन ने भारत की वैश्विक भूमिका रेखांकित करते हुए कहा, “भारत का डिजिटल परिवर्तन एक निर्णायक चरण में पहुंच चुका है जहां मोबाइल नेटवर्क व्यापक स्तर पर डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवप्रवर्तन को सुगम बना रहे हैं। हालांकि, 6जी में नेतृत्व विश्वसनीय होने के लिए 5जी को उपभोक्ता की गति से परे जाकर उद्योग के परिवर्तन का एक इंजन बनना है। करीब 47 प्रतिशत अब भी ऑफलाइन होने के साथ इस यूसेज अंतर को पाटना और विश्वास का निर्माण, समावेशी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी डिजिटल वृद्धि हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण होगा।”
एल्टियस टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट के मुख्य परिचालन अधिकारी श्री अश्वनी खिल्लन ने कहा, “भारत का डिजिटल परिवर्तन, एक मजबूत एवं सुव्यवस्थित पारिस्थितिकी तंत्र का ही परिणाम है जहां प्रगतिशील नीति, एक गतिशील ऑपरेटर परिदृश्य और जबरदस्त दूरसंचार ढांचा ने पिछले तीन दशकों से अधिक समय से मिलकर काम किया है। यूपीआई और ई-कॉमर्स जैसी निर्बाध डिजिटल सेवाओं को सुगम बनाने से लेकर विश्व के सबसे बड़े 5जी नेटवर्कों में से एक का निर्माण करने तक इस क्षेत्र ने बुनियादी तौर पर भारत के लोगों के रहन सहन और काम के तरीकों को नया आकार दिया है। आगे चलकर, एआई और 6जी जैसी प्रौद्योगिकियां आकार लेंगी और दूरसंचार ढांचा इस देश के लिए समावेशी, डिजिटल वृद्धि के अगले चरण को ताकत प्रदान करने में महत्वपूर्ण बना रहेगा।”
उद्घाटन सत्र के दौरान बातचीत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित नेटवर्कों, स्पैम और डिजिटल धोखाधड़ी से निपटने, 5जी को आगे बढ़ाने, 6जी प्रौद्योगिकियों के लिए तैयारी और डिजिटल आधारभूत ढांचा एवं विनिर्माण पारितंत्र को मजबूत करने सहित प्रमुख विषयों पर केंद्रित रही। डिजिकॉम समिट 2026 में नेटवर्क के लचीलेपन, नियामकीय रूपरेखाओं, अगली पीढ़ी की कनेक्टिविटी और डिजिटल आधारभूत ढांचा पर कई सत्रों का आयोजन किया गया जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों और वैश्विक विशेषज्ञों ने प्रतिभाग कर अपने विचार रखे।

