एवीएस  न्यूज.मुंबई

 हिंदी ज़ी5 पर अलग-अलग नजरिए से दमदार कहानियां देखने को मिलती हैं। मिसेज़ में शादी के अंदर अपनी पहचान के लिए एक महिला की लड़ाई को दिखाया गया, वहीं अस्सी में बलात्कार, पीड़िता को दोष देने की सोच और न्याय पाने की राह में महिलाओं के सामने आने वाली मुश्किलों को सामने रखा गया। इस तरह, प्लेटफॉर्म ने हमेशा ऐसी कहानियों को जगह दी है, जो परंपराओं के हिसाब से चलने के बजाय उनसे सवाल करती हैं। अब बंदर के साथ हिंदी ज़ी5 हमारे समय की एक बेहद असहज और विवादित चर्चा को सामने ला रहा है। हमने सालों से ऐसी कहानियां सुनी हैं, जिनमें महिलाएं हिम्मत जुटाकर अपनी बात सामने रखती हैं। बंदर एक चौंकाने वाला सवाल पूछता है: क्या पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं?

#MeTooForMen की चर्चा से जुड़ी बंदर एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसकी जिंदगी एक महिला के लगाए आरोप के बाद पूरी तरह बदल जाती है। सच्चाई सामने आने से पहले ही लोगों की राय, मीडिया की जांच-पड़ताल और समाज का फैसला उस पर हावी हो जाता है। अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी और बॉबी देओल के दमदार अभिनय से सजी बंदर इस बात को दिखाती है कि किसी व्यक्ति को दोषी मान लेने के कितने गंभीर और दुखद परिणाम हो सकते हैं। फिल्म यह सवाल उठाती है कि जब किसी पर लगाया गया आरोप ही उसकी सजा बन जाए, तो क्या होता है। बंदर के जरिए हिंदी ज़ी5 ऐसी कहानियां पेश करने की अपनी कोशिश जारी रखता है, जो आम धारणाओं  पर सवाल उठाती हैं, समाज की जटिल सच्चाइयों को सामने लाती हैं और उन नजरियों को भी आवाज देती हैं, जिन्हें अक्सर चर्चा में जगह नहीं मिलती। यह इस विश्वास को और मजबूत करता है कि दमदार कहानियां यहीं देखने को मिलती हैं।

यह फिल्म एक क्राइम ड्रामा / साइकोलॉजिकल थ्रिलर है, जो 28 अगस्त 2026 को प्रीमियर होगी। इसका निर्माण सैफ्रन मैजिकवर्क्स और ज़ी स्टूडियोज़ ने किया है। फिल्म में बॉबी देओल, सान्या मल्होत्रा, सपना पब्बी, सबा आज़ाद, इंद्रजीत सुकुमारन, राज बी. शेट्टी, जितेंद्र जोशी और अन्य कलाकार प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

बंदर की कहानी समर मेहरा की है, जो कभी एक लोकप्रिय टीवी कलाकार हुआ करता था, उसकी जिंदगी तब पूरी तरह बदल जाती है, जब उसकी पूर्व साथी उस पर बलात्कार का आरोप लगाती है। आरोप लगते ही मीडिया में हलचल मच जाती है और मामला कानूनी लड़ाई तक पहुंच जाता है। इस बीच, समर खुद को एक ऐसी व्यवस्था में फंसा हुआ पाता है, जहां सच्चाई सामने आने से पहले ही लोग अपनी राय बना लेते हैं।

सत्ता, सहमति, मीडिया की पड़ताल और न्याय के आपसी संबंधों को सामने लाते हुए बंदर एक मुश्किल सवाल उठाती हैक्या पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं? ऐसे पीड़ित, जो आरोपों, लोगों की धारणा और मीडिया ट्रायल का सामना करते हैं। जब आरोप ही सजा बन जाता है, तब यह फिल्म दर्शकों को इस सच्चाई का सामना करने के लिए मजबूर करती है कि किसी की बात सुने बिना उसे दोषी मान लेने के क्या परिणाम हो सकते हैं। दमदार अभिनय और अप्रत्याशित मोड़ों से भरपूर बंदर एक रोमांचक ड्रामा है, जो अंत तक दर्शकों के मन में सवाल बनाए रखती है।

बंदर #MeTooForMen की चर्चा को एक बेबाक और विचारोत्तेजक नजरिए से सामने लाती है और एक ऐसे पहलू की कहानी कहती है, जिसे आमतौर पर कम देखा या सुना गया है। फिल्म एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जो परिस्थितियों में फंस जाता है, जहां आरोप ही उसके लिए सजा बन जाता है। यह फिल्म आरोपों, लोगों की सोच, मीडिया ट्रायल और किसी की पूरी बात सुने बिना उसे दोषी मान लेने के मानवीय प्रभाव को सामने लाती है। बंदर दर्शकों को अपनी धारणाओं पर सवाल उठाने और यह सोचने के लिए प्रेरित करती है कि समाज कितनी जल्दी कहानी के सभी पक्ष सामने आने से पहले ही अपना फैसला सुना देता है। बॉबी देओल अपने करियर के बेहतरीन प्रदर्शनों में से एक देते हैं, जबकि दमदार कलाकारों की पूरी टीम फिल्म को और प्रभावशाली बनाती है। भावनात्मक ड्रामा, सस्पेंस और सामाजिक टिप्पणी के मेल के साथ बंदर सच्चाई, निष्पक्षता और न्याय को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म देती है।

निर्देशक अनुराग कश्यप ने कहा, “मुझे इस कहानी की सबसे खास बात यह लगी कि यह मुश्किल सवाल पूछने से नहीं डरती। इनमें से एक सवाल ऐसा भी है, जिसका सामना करने में समाज अक्सर असहज महसूस करता है: क्या पुरुष भी पीड़ित हो सकते हैं? यह फिल्म दर्शकों को हर बात को सिर्फ सही या गलत के नजरिए से देखने के बजाय, असल जिंदगी में मौजूद उन जटिल परिस्थितियों को समझने की कोशिश करने के लिए प्रेरित करती है, जहां सब कुछ सिर्फ काला या सफेद नहीं होता। यह फिल्म सवाल उठाती है कि क्या हम किसी को दोषी मानने से पहले उसकी बात सच में सुनने के लिए तैयार हैं, क्या पीड़ित होने, सच्चाई और संवेदनशीलता को लेकर हमारी समझ कभी-कभी हमारी अपनी धारणाओं से प्रभावित होती है। फिल्म को कुछ बेहतरीन कलाकारों के शानदार अभिनय का सहारा मिला है, खासकर बॉबी ने अपने किरदार में पूरी तरह ढलकर उसमें वह संवेदनशीलता और गहराई दिखाई है, जिसकी इस भूमिका को जरूरत थी। फिल्म का अब तक का सफर चाहे जैसा भी रहा हो, मेरा मानना है कि इसकी कहानी आज भी प्रासंगिक है और इस पर चर्चा होनी चाहिए। मुझे खुशी है कि अब बंदरहिंदी ज़ी5 के जरिए ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचेगी। मुझे उम्मीद है कि दर्शक इसे देखें, इसे अपने तरीके से समझें और फिल्म खत्म होने के बाद भी इस पर चर्चा जारी रखें।

अभिनेता बॉबी देओल ने कहा,बंदर उन चुनिंदा फिल्मों में से एक है, जिसने मुझे मेरी सहज सीमाओं से पूरी तरह बाहर निकलने के लिए मजबूर किया। इस किरदार ने मुझसे सिर्फ एक अभिनेता के तौर पर ही नहीं, बल्कि एक इंसान के तौर पर भी बहुत कुछ मांगा। मुझे अपनी झिझक छोड़कर पूरी प्रक्रिया पर भरोसा करना था और अनुराग के नजरिए के सामने खुद को पूरी तरह समर्पित करना था। मुझे अनुराग की कहानी कहने का तरीका इसलिए पसंद है क्योंकि वह कभी आसान और सीधा रास्ता नहीं चुनते। वह आपको असहज और अनपेक्षित पहलुओं को तलाशने के लिए प्रेरित करते हैं और यही बात इस सफर को मेरे लिए इतना खास बनाती है। इस किरदार को निभाना चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ मेरे लिए खुद को नए तरीके से व्यक्त करने का मौका भी था और मैंने इसके हर पल का भरपूर आनंद लिया। यह फिल्म मेरे दिल के बहुत करीब है और मुझे उम्मीद है कि हिंदी ज़ी5 पर इसके प्रीमियर से इसे वह बड़ा दर्शक वर्ग मिलेगा, जिसकी यह हकदार है और ज्यादा से ज्यादा लोग इस अनोखी कहानी को देख और समझ पाएंगे।

अभिनेत्री सपना पब्बी ने कहा, “बंदर मेरे करियर के सबसे खास अनुभवों में से एक रही है। जब अनुराग सर ने मुझे गायत्री के किरदार के लिए चुना, तो मैं तुरंत उसके कई पहलुओं और अनिश्चित स्वभाव से प्रभावित हो गई। गायत्री जैसे किरदार बहुत कम देखने को मिलते हैं। गायत्री एक जटिल किरदार है, जिसके फैसले कहानी को आगे बढ़ाते हैं और उसे निभाना मेरे लिए भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण होने के साथ-साथ बेहद संतोषजनक भी रहा। मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई कि अनुराग सर ने मुझ पर भरोसा किया और मुझे इस किरदार के अलग-अलग पहलुओं को समझने की पूरी आजादी दी। मुझे खुशी है कि अब यह फिल्म हिंदी ज़ी5 पर ज्यादा से ज्यादा दर्शकों तक पहुंचेगी और मैं चाहती हूं कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस अनोखी कहानी को देखें।