सांची डेयरी में कम समय में ईआरपी प्रणाली सफलतापूर्वक लागू करने की तकनीकी विधि को समझा 
एवीएस न्यूज.भोपाल
एमपी स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एमपीसीडीएफ) भोपाल के प्रबंध संचालक (एमडी) डॉ. संजय गोवाणी से तेलंगाना डेयरी डेवलपमेंट कोआपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (टीजीडीडीसीएफ), हैदराबाद के चेयरमैन गुथा अमित कुमार रेड्डी और प्रबंध संचालक (एमडी) के. चंद्रशेखर रेड्डी (आईएएस) ने महासंघ भोपाल मुख्यालय पर अपने दल के साथ  भेंट की। इस अवसर पर एमपीसीडीएफ प्रबंध संचालक और एनडीडीबी के आईटी प्रमुख ए.व्ही. रामचंद्र कुमार ने स्वागत किया। टीजीडीडीसीएफ दल ने सांची डेयरी में कम समय में एनडी-ईआरपी प्रणाली सफलतापूर्वक लागू करने की तकनीकी विधि को विस्तार से समझा तथा सांची परिवार को धन्यवाद भी दिया है। 
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) और एमपी स्टेट कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लिमिटेड (एमपीसीडीएफ) भोपाल मध्यप्रदेश के बीच सहकार्यरता अनुबंध के बाद 9 माह की कम अवधि में भी आईटी सुदृढ़ीकरण करके एनडी-ईआरपी (नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड डेयरी ईआरपी) प्रणाली को एमपीसीडीएफ सहित संबद्ध सहकारी दुग्ध संघों में सफलता पूर्वक सांची डेयरी में लागू किया। सांची में ईआरपी संचालन को और अधिक कुशल बनाया है, बल्कि पूरे राज्य में डेयरी क्षेत्र के डिजिटलीकरण की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।


 डिजिटल इंडिया के लक्ष्य का ठोस कदम
इस अवसर पर राष्ट्रीय डेरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) के आईटी प्रमुख ने एनडी-ईआरपी प्रणाली के सफल कार्यान्वयन से होने वाले प्रमुख लाभ के बारे में टीजीडीडीसीएफ दल को उपयोगिता के बारे में बताया कि एनडी-ईआरपी प्रणाली रीयल-टाइम डेटा विश्लेषण और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि करता है, खरीद, उत्पादन, वितरण और लेखा जैसे विभागों का एकीकृत प्रबंधन को बनाए रखता है, इसके संचालन में पारदर्शिता और समय की बचत होती है, उत्पादकता और जवाबदेही में सुधार हुआ है तथा डिजिटल इंडिया के लक्ष्य की ओर एक और ठोस कदम भी माना जा रहा है। 
 

एंड टू एंड डिजीटाईजेशन की सार्थक पहल
इस अवसर पर एमपीसीडीएफ भोपाल के प्रबंध संचालक ने टीजीडीडीसीएफ दल को बताया कि एमपीसीडीएफ तथा सहकारी दुग्ध संघों की गतिविधियों के एंड टू एंड डिजीटाईजेशन की ओर कदम बढ़ाते हुए ईआरपी का सफल क्रियान्वयन एक सार्थक कदम है। उन्होंने बताया कि इसके माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को उनके द्वारा प्रदाय किये गये दूध की मात्रा, गुणवत्ता तथा मूल्य की जानकारी तत्काल प्राप्त हो सकेगी। इससे भुगतान प्रक्रिया भी तेज ओर पारदर्शी हो गई है। दुग्ध संकलन प्रक्रिया अधिक सुव्यवस्थित तथा प्रभावी बनी है। उन्होंने बताया कि डिजीटल बदलाव प्रदेश में सहकारी डेयरी क्षेत्र में विभिन्न गतिविधियों के क्रियान्वयन को प्रभावी बनाने, दक्षता बढ़ाने ओर अधिक जवाबदेही लाने में सक्षम हो रहा है।