बायोफ्यूलसर्कल ने मध्य प्रदेश में नए बायोमास बैंक शुरू कर किसानों से संबंध मजबूत किए
‘पराली से प्रगति’ के माध्यम से 2 लाख किसानों के साथ मध्य प्रदेश में 50,000 मीट्रिक टन और पूरे देश में 6.5 लाख मीट्रिक टन धान की पराली एकत्र करने का लक्ष्य
भोपाल। अग्रणी डिजिटल बायोएनर्जी सप्लाई चेन प्लेटफॉर्म बायोफ्यूलसर्कल मध्य प्रदेश में ग्रामीण स्तर पर अपनी पहुँच बढ़ा रहा है, ताकि बायोमास एकत्रीकरण के लिए एक सस्टेनेबल इकोसिस्टम बनाया जा सके। किसानों से सीधे जुड़ाव और ग्रामीण स्थिरता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मजबूत करते हुए, कंपनी ने आज सतना जिले के नागोद तहसील में स्थित मधिकला ग्राम पंचायत के अंतर्गत मधिकला बायोमास बैंक का उद्घाटन किया। इसके अलावा, राज्य भर में पांच और बायोमास बैंक स्थापित किए जा रहे हैं: जिनमें भोपाल जिले में बनखेड़ी, ताजपुरा और कानोरा, तथा सतना जिले के नागोद और बांधा शामिल हैं। इन बायोमास बैंकों में मुख्य कच्चा माल धान की पराली होगी।
मध्य प्रदेश में, बायोफ्यूलसर्कल इस सीजन में 50,000 मीट्रिक टन धान की पराली एकत्र करने का लक्ष्य रखता है और इसके लिए 12,000 से अधिक किसानों से जुड़ रहा है। पूरे देश में, कंपनी इस फसल सीजन में 2 लाख से अधिक किसानों के साथ मिलकर 6.5 लाख मीट्रिक टन बायोमास एकत्र करने का लक्ष्य रखती है।
मशीनरी आधारित कटाई, फसल अवशेष प्रबंधन और किसानों के लिए वैकल्पिक आय के स्रोत को बढ़ावा देने वाली, मध्य प्रदेश सरकार की “फसल अवशेष प्रबंधन – वेस्ट टू वैल्यू” पहल के साथ, बायोफ्यूलसर्कल राज्य में पराली जलाने को कम करने और स्वच्छ ऊर्जा उपयोग को बढ़ावा देने के प्रयासों को मजबूत कर रहा है। सतना और भोपाल जिलों में बायोमास बैंक स्थापित करके, बायोफ्यूलसर्कल धान की पराली को बाजार योग्य वस्तु में बदलने के लिए एक तैयार प्लेटफॉर्म बना रहा है। कंपनी किसान समूहों, स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी), स्थानीय उद्यमियों और उपकरण साझेदारों के साथ साझेदारी इकोसिस्टम मॉडल के माध्यम से काम कर रही है, ताकि ग्रामीण समुदाय न केवल बायोमास की आपूर्ति कर सकें, बल्कि इसकी वैल्यू चेन में सक्रिय रूप से भाग लेकर लाभ भी प्राप्त कर सकें।
‘पराली से प्रगति’ के तहत, बायोफ्यूलसर्कल सस्टेनेबल बायोमास प्रबंधन के आर्थिक और पर्यावरणीय लाभों को उजागर करता है। मधिकला बायोमास बैंक के उद्घाटन समारोह में सरकारी अधिकारी भी उपस्थित थे, जहां पराली जलाने को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में हरित आजीविका बढ़ाने के साझा दृष्टिकोण पर जोर दिया गया। वर्तमान में, बायोफ्यूलसर्कल भारत के 7 स्थानीय बाजारों में 66 बायोमास बैंक चला रहा है, और 10 बड़े बाजारों में कुल मिलाकर 10 लाख मीट्रिक टन वार्षिक आपूर्ति क्षमता है।
सुहास बक्सी, को-फाउंडर और चेयरमैन, बायोफ्यूलसर्कल, ने कहा,“भारत के पास अपनी विशाल बायोमास संसाधनों का उपयोग कर सतत ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा देने की अपार क्षमता है, जो अनुमानित रूप से सालाना 235 मिलियन मीट्रिक टन है। बायोफ्यूलसर्कल में, हम केवल इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बना रहे हैं, बल्कि एक डिजिटल रूप से सक्षम इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं, जो किसानों, ग्रामीण उद्यमियों और उद्योगों को एक मूल्य श्रृंखला में जोड़ता है। बायोमास केवल अवशेष नहीं है; यह ग्रामीण भारत का ऊर्जा सुरक्षा और जलवायु सहनशीलता में योगदान है। हमारी भूमिका इस परिवर्तन को बड़े पैमाने पर संभव बनाना और यह सुनिश्चित करना है कि किसानों को उनके योगदान के लिए वास्तविक आय और पहचान मिले । इस विस्तार के साथ, हम बायोमास बैंकों की भूमिका को राष्ट्रीय स्तर पर सस्टेनेबल बायोएनर्जी अपनाने के एक सहायक के रूप में मजबूत कर रहे हैं।”
इस सीजन में, बायोफ्यूलसर्कल ने किसानों से जुड़ने और उन्हें आसानी से समझने योग्य तरीके से शिक्षित करने के लिए अपने आधिकारिक मैस्कॉट प्रकृति को लॉन्च किया है। प्रकृति बायोफ्यूल सर्कल के किसान जुड़ाव अभियान का चेहरा है, जो मशीनरी आधारित बायोमास एकत्र एकत्रीकरण, फसल अवशेष प्रबंधन और बायोएनर्जी जैसे जटिल विषयों को सरल और समझने योग्य तरीके से किसानों तक पहुँचाती है। किसान कार्यशालाओं, खेत प्रदर्शनों, सामुदायिक कार्यक्रमों और मधिकला उद्घाटन जैसे समारोह में, प्रकृति गांवों में संवाद को आगे बढ़ा रही है और किसानों को “पराली से प्रगति” के उद्देश्य से जोड़ रही है।

