एवीएस न्यूज.मुंबई
 भारत के शहरों में हवा की क्वालिटी लगातार खराब से बेहद गंभीर के बीच बदल रही है। इस बीच डॉक्टरों का मानना है कि प्रदूषण का हमारी सेहत पर असर उम्मीद से कहीं ज्यादा गहरा और लंबे समय तक रहने वाला है।

टाटा एआईजी ने देशभर के 400 से ज्यादा स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का एक सर्वेक्षण किया है, जिसमें यह खुलासा हुआ है कि प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से लड़ने के लिए हम अभी पूरी तरह तैयार नहीं हैं।
एआईजी जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड के कंज्यूमर बिजनेस क्लेम्स के हेड, राजगोपाल रुद्रराजू के अनुसार इस अध्ययन के अनुसार चार में से तीन डॉक्टरों का मानना है कि खराब हवा के कारण लोगों में सांस की तकलीफ, दिल की बीमारी और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याएं बढ़ रही हैं।

सर्वेक्षण में शामिल 60 फीसदी से ज्यादा डॉक्टरों का कहना है कि जब एक्यूआई 200 के ऊपर जाता है, तो यह सेहत के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। डॉक्टरों ने यह भी बताया कि जहरीली हवा का असर अब केवल बच्चों या बुजुर्गों पर ही नहीं, बल्कि नौकरीपेशा युवाओं पर भी बहुत ज्यादा हो रहा है। 
डॉक्टरों ने बताया कि प्रदूषण से होने वाली बीमारियां पहले से चल रही बीमारियों को और भी गंभीर बना देती हैं, जिससे इलाज मुश्किल और महंगा हो जाता है। सर्वे में शामिल 78 फीसदी डॉक्टरों का कहना है कि बढ़ता प्रदूषण उन मरीजों की हालत और बिगाड़ देता है जिन्हें पहले से बीपी, दिल की बीमारी या डायबिटीज जैसी समस्याएं हैं। इसके अलावा, दो तिहाई डॉक्टरों का मानना है कि लोग इस बात को नहीं समझते कि खराब हवा में लंबे समय तक रहना उनकी सेहत के लिए कितना खतरनाक हो सकता है।