त्योहारी खपत बढ़ने से खाद्य तेल का भाव हुआ गरम
.भोपाल। आगामी त्योहार रक्षाबंधन, कृष्ण जन्माष्टमी के मद्देनजर स्थानीय थोक जिंस बाजार में खाद्य तेलों में शहरी और देसावरी दोनों ही खरीदारी का जोर होने के सोयाबीन, सरसों और मूंगफली सहित सभी खाद्य तेल की खपत बढ़ गई है। पिछले महीनों की अपेक्षा तेलों की खपत में इजाफा होने से सभी खाद्य तेलों के भाव गरम यानी बढ़ गए है। स्थानीय तेल व्यापारी और तेल ब्रोकर्स की मानें तो जुलाई माह में तेल के भाव में 15 से 20 फीसदी की तेजी आई है।
तेल ब्रोकर रमाकांत तिवारी ने बताया कि सरसो तेल जो 130 से 140 रुपए लीटर था वह बढ़कर 175 से 180 रुपए लीटर पहुंच गया है। सोयाबीन तेल जो 121 से 122 रुपए लीटर बिक रहा था वह अब 132 से 133 रुपए लीटर और मूंगफली ते 140 रुपए लीटर से बढ़क 170 रुपए लीटर के स्तर पर पहुंच गया है। तिवारी ने बताया कि आगामी त्यौहारी सीजन को देखते हुए तेल की खपत में 20 फीसदी का इजाफा हुआ है ।
डिब्बाबंद और पैकेट बंद खाद्य तेलों के कम वजन पर तत्काल रोक की मांग
उपभोक्ताओं को कम वजन के तेल के पैकेट बेचकर धोखा देने की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर, खाद्य तेलों की पैकेजिंग में कम वजन के मुद्दे पर तत्काल रोक लगाने की मांग की जा रही है। क्योंकि खाद्य तेलों के कारोबार में कम वजन की शिकायतें आ रही हैं, जिससे उपभोक्ताओं में चिंता बढ़ रही है। कुछ व्यापारियों और उपभोक्ताओं ने शिकायत की है कि उन्हें डिब्बाबंद खाद्य तेलों में निर्धारित मात्रा से कम वजन मिल रहा है। उपभोक्ता संगठनों और व्यापारियों ने सरकार से खाद्य तेलों में कम वजन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।
व्यापारियों ने सरकार से खाद्य तेलों के वजन में अनियमितताओं की जांच करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की भी मांग की है। तेल ब्रोकर रमाकांत तिवारी ने कहा कि खाद्य तेलों में कम वजन एक गंभीर मुद्दा है जिस पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। सरकार को इस मामले की जांच करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। तिवारी ने उपभोक्ताओं को भी जागरूक होने और कम वजन वाले उत्पादों को खरीदने से बचने की सलाह दी जाती है। उल्लेखनीय है कि हाल के वर्षों में व्यापारियों ने खाद्य तेलों की पैकेजिंग में अनियमित आकार के पैकेट (जैसे 800 ग्राम, 810 ग्राम, 850 ग्राम) का उपयोग करके ग्राहकों को धोखा देना शुरू कर दिया है, जिन्हें 1 किलोग्राम के रूप में बेचा जाता है। इस धोखाधड़ी को रोकने के लिए सरकार 500 ग्राम, 1 किलोग्राम, 2 किलोग्राम और 5 किलोग्राम जैसे पारंपरिक पैकेजिंग आकारों को फिर से अनिवार्य करने पर विचार कर रही है।

