मुख्यमंत्री डॉ.मोहन यादव के दो साल बेमिसाल पर बोले, उद्योगपति, व्यापारी और संगठन के पदाधिकारी
पिछले दो वर्षों में एमएसएमई और स्टार्टअप क्षेत्रों में जबरदस्त वृद्धि हासिल हुई
आत्माराम सोनी.भोपाल
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली मध्य प्रदेश सरकार के दो साल पूरे होने पर उद्योग और व्यापारिक संगठनों ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। उद्योगपति और व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारियों ने कहाकि मुख्यमंत्री के मिलनसार, सहयोगी और आश्वस्त करने वाले नेतृत्व शैली की प्रशंसा की है, जिससे राज्य के कारोबारी माहौल में नया विश्वास पैदा हुआ है। पिछले दो वर्षों में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई ) और स्टार्टअप क्षेत्रों में जबरदस्त वृद्धि हासिल की गई है। विभाग ने महत्वपूर्ण नीतिगत सुधार किए हैं और औद्योगिक क्षेत्रों, सड़कों, जल आपूर्ति और बिजली आपूर्ति सहित बुनियादी ढांचे के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। कुल मिलाकर, उद्योग और व्यापारिक संगठनों ने सरकार के उद्योग-अनुकूल दृष्टिकोण और राज्य के आर्थिक विकास में योगदान देने की प्रतिबद्धता के प्रति संतोष और विश्वास व्यक्त किया है।

मोहन सरकार के दो वर्ष कई निर्णायक पहलों के प्रतीक रहा
डॉ. मोहन यादव की सरकार के दो वर्ष मध्यप्रदेश के विकास के लिए कई निर्णायक पहलों के प्रतीक रहे हैं। विशेष रूप से औद्योगिक विकास, बुनियादी ढांचे, कौशल संवर्धन, और जन-कल्याणकारी योजनाओं में तेजी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। मेरे अनुभव में सरकार ने उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने, रोज़गार सृजन बढ़ाने और नवाचार को प्रोत्साहित करने हेतु महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। विशेषकर औद्योगिक क्षेत्रों में स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर और डिजिटल समाधान के लिए उठाए गए प्रयास उल्लेखनीय हैं। मुझे विश्वास है कि यह गति आगे भी राज्य को नई ऊँचाइयों तक ले जाएगी।
राजीव अग्रवाल
अध्यक्ष, मंडीदीप इंडस्ट्रीज एसोसिएशन

मोहन सरकार ने पूरे प्रदेश में एक औद्योगिक फ्रेंडली वातावरण बनाया
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दो साल बेमिसाल रहा। मोहन सरकार ने 2 साल के कार्यक्रमों जरिए जिस गति से मध्य प्रदेश ने प्रगति की तरफ अपने कदम बढ़ाए हैं उन्हें संदेश रूप से बहुत उत्कृष्ट कहा जा सकता हैं। अलग-अलग स्थान पर इंवेस्टर्स मीट का आयोजन करके उन्होंने पूरे प्रदेश में एक औद्योगिक फ्रेंडली वातावरण बनाया है । इतना ही देश में सबसे पहले टेक्सटाइल मेगा पार्क , स्टाइल डिवाइसेज की नई पॉलिसी मध्य प्रदेश की सरकार ही लेकर आई है । घोषणाएं बहुत होती रहती हैं परंतु ट्रांसपेरेंट तरीके से भूमि की उपलब्धता मोहन सरकार ने कराई और बहुत लंबे समय से पेंडिंग चल रही एमएसएमई की सब्सिडी की समस्या समाप्त हुई। इस प्रकार सारे उद्यमियों को एक अच्छा साकारात्मक परिवर्तन मध्य प्रदेश में दिखाई पड़ रहा है। पर्यावरण में एक प्रो उद्योग, प्रो विकास हुआ है प्रति समय-समय पर फेडरेशन ने मुख्यमंत्री के सामने विषय रखें।
दीपक शर्मा
अध्यक्ष, फेडरेशन ऑफ एमपी चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज

मध्यप्रदेश सरकार 2047 के लक्ष्य को 2037 में ही प्राप्त कर लेगी
जहां तक डॉ.मोहन यादव के दो साल पूर्ण होने की बात है। यह तथ्य जगजाहिर है कि मुख्यमंत्री इस प्रदेश के चहुंमुखी विकास की योजनाओं पर पूरी ताकत से कार्य कर रहे हैं। उनकी सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत 2047 के मिशन से पूर्ण करने रूप से कटिबद्ध है। किसी भी प्रकार का विकास हो कृषि, उद्योग, स्वास्थ, पर्यटन, शिक्षा सभी क्षेत्र में अग्रणी होकर आगे बढ़ रही हैं। उद्योग के मामले में यह बिल्कुल सिद्ध है कि किसी भी प्रकार के अवसर को छोड़ना तो है ही नहीं ,पर अपनी ओर से अवसर निर्मित करने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रही हैं । मुझे तो लगता हैं कि मध्यप्रदेश की यह सरकार 2047 के लक्ष्य को 2037 में ही प्राप्त कर लेगी।
मनोज मोदी
को-चेयरमैन पीएचडीसीसीआई (एमपी ) भोपाल

डॉ. मोहन के दो साल वैश्विक निवेश सम्मेलनों के माध्यम से औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन को मजबूती दी
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश सरकार ने इन दो वर्षों में निवेश-प्रोत्साहन नीतियां, क्षेत्रीय प्रोत्साहन पैकेज और वैश्विक निवेश सम्मेलनों के माध्यम से औद्योगिक विस्तार और रोजगार सृजन को मजबूती दी है। राज्य में आयोजित ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025’ (जीआईएस-2025) ने औद्योगिक निवेश को नए आयाम दिए। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में लगभग30.77 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए, जो किसी भी राज्य द्वारा एकत्रित सबसे उच्च राशि में से एक मानी जा रही है और देश-विदेश के प्रमुख उद्योगों तथा समूहों ने भागीदारी की। इनमें प्रमुख निवेशकों में अडाणी समूह शामिल है, जिसने लगभग 1.10 लाख करोड़ का बहु-क्षेत्रीय निवेश प्रस्ताव रखा है, जिससे अनुमानित 1.20 लाख से अधिक प्रत्यक्ष रोजगार सृजन की सम्भावना है। जीआईएस -2025 के अंतर्गत 600 से अधिक बिजनेस-टू-गवर्नमेंट (बी2जी) और 5,000 से अधिक बिजनेस-टू-बिजनेस (बी2बी) बैठकें आयोजित हुईं, जिससे उद्योगों और नीति-निर्माताओं के बीच सहयोग के बेहतर अवसर बने। सरकार के आंकड़ों के अनुसार जीएसआई-2025 के निवेश प्रस्तावों के क्रियान्वयन की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं जिसके अंतर्गत भूमि आबंटन, अनुमोदन प्रक्रियाएं तथा औद्योगिक अप्रूवल्स पर लगातार निगरानी रखकर कई प्रस्तावों को वास्तविक निवेश में बदलने पर कार्य प्रगति में है, जिससे भविष्य में बड़े पैमाने पर उत्पादन इकाइयों-निर्माण और रोजगार सृजन की उम्मीद है। कुल मिलाकर इन दो वर्षों में औद्योगिक विकास और निवेश-आकर्षण में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। जीआईएस-2025 के निवेश प्रस्तावों ने राज्य को वैश्विक निवेश मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है और अब इन प्रस्तावों को वास्तविक परियोजनाओं तथा रोजगार के अवसरों में बदलने पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है जो निश्चित ही सराहनीय है। आगामी वर्ष को प्रदेश के कुटीर, लघु उद्योगों को समर्पित वर्ष घोषित किया जाए तो प्रदेश बेरोजगारी से पूर्णतः मुक्त प्रदेश होगा।
सीए (डॉ.) गौतम कोठारी,
डी.लिट.अध्यक्ष , पीथमपुर औद्योगिक संगठन

कानून व्यवस्था सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई
मोहन यादव की सरकार केवल प्रचार- प्रसार पर टिकी हुई है, धरातल पर शून्य है। कानून व्यवस्था सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। भ्रष्टाचार हर सत्ता दल करता है। कांग्रेस के समय भ्रष्टाचार प्रॉपर चेनल के माध्यम से होता था जिससे मंत्री से निचले स्तर का अधिकारी भयभीत रहता था। आज छोटे -छोटे अधिकारियों ने जिला संगठन बना कर सीधे ऊपर महीना बांध रखा है। जिससे प्रशासनिक अधिकारियों की पकड़ इन छोटे अधिकारियों पर कम हो गई है, जिसमें राजस्व और पुलिस विभाग प्रमुखता से आम जनता को प्रभावित कर रहा है।
अजय सिंह
अध्यक्ष, मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन

इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की तय टाइमलाइन होनी चाहिए
यह जानकर बहुत खुशी हुई कि आइटी और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े 4 लाख करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट्स का कमर्शियल ऑपरेशन एमपी में 18-30 महीनों में शुरू होने वाला है। हालांकि, महिलाओं की सुरक्षा, बड़े शहरों में ट्रैफिक मैनेजमेंट और सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्किंग जैसी इंफ्रास्ट्रक्चर की देखभाल और डेवलपमेंट अभी भी चिंता है, इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की तय टाइमलाइन होनी चाहिए।
आशीष पांडेय
अध्यक्ष, भोपाल ऑटोमोबाइल एसोसिएशन

