फेफड़ों के कैंसर के उपचार और संदिग्ध कैंसर की पहचान पर ऑन्कोलॉजी सीएमई का आयोजन
एवीएस न्यूज. भोपाल
आरजीसीआईआरसी (राजीव गांधी कैंसर संस्थान एवं अनुसंधान केंद्र) ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए), ग्रेटर भोपाल शाखा के सहयोग से 5 सितंबर 2026 को जहांनुमा पैलेस होटल, भोपाल में ऑन्कोलॉजी कंटीन्यूइंग मेडिकल एजुकेशन (सीएमई) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया। इस शैक्षणिक सत्र में क्षेत्र के डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य पेशेवरों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में फेफड़ों के कैंसर के सर्जिकल उपचार, संदिग्ध कैंसर वाले मरीजों की जांच और कैंसर स्क्रीनिंग पर विस्तार से चर्चा की गई। इस सीएमई का उद्देश्य ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों और व्यापक चिकित्सा समुदाय के बीच ज्ञान का आदान-प्रदान मजबूत करना था।
इसमें संभावित कैंसर के मामलों की पहचान, समय पर रेफरल और बदलते उपचार विकल्पों को समझने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में डॉ. एल. एम. दारलोंग, प्रमुख – थोरैसिक ऑन्कोसर्जरी, आरजीसीआईआरसी, और डॉ. अभिनव देवान, सलाहकार – मेडिकल ऑन्कोलॉजी, आरजीसीआईआरसी ने विशेष सत्र लिए।
“लंग कैंसर एंड इट्स सर्जिकल मैनेजमेंट इन करंट एरा” विषय पर बोलते हुए डॉ. एल. एम. दारलोंग ने फेफड़ों के कैंसर की सर्जरी में हो रहे बदलाव और सही मरीजों में सर्जरी की भूमिका पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि बेहतर डायग्नोस्टिक जांच, सही स्टेजिंग, नई सर्जिकल तकनीकें और बहु-विषयक उपचार योजना डॉक्टरों को बेहतर उपचार निर्णय लेने में मदद कर रही हैं।
डॉ. दारलोंग ने यह भी बताया कि सर्जरी का निर्णय लेने से पहले हर मरीज का अलग-अलग मूल्यांकन जरूरी है। इसमें कैंसर का प्रकार और स्टेज, ट्यूमर की स्थिति, मरीज की समग्र सेहत और फेफड़ों की कार्यक्षमता जैसे कई पहलू शामिल होते हैं। सत्र में यह भी बताया गया कि किन मरीजों को सर्जिकल मूल्यांकन से लाभ मिल सकता है और अलग-अलग ऑन्कोलॉजी विशेषज्ञों के बीच तालमेल क्यों महत्वपूर्ण है।
सीएमई के दौरान डॉ. एल. एम. दारलोंग ने कहा, “फेफड़ों के कैंसर के उपचार में काफी बदलाव आया है और सही तरीके से चुने गए मरीजों में सर्जरी आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। सही स्टेजिंग, सही मरीज का चयन और बहु-विषयक योजना सबसे उपयुक्त उपचार तय करने के लिए बेहद जरूरी हैं। ऐसे सीएमई कार्यक्रम उन डॉक्टरों के साथ सहयोग मजबूत करने में मदद करते हैं, जो अक्सर मरीजों के पहले संपर्क बिंदु होते हैं।”
दूसरा सत्र “अप्रोच टू अ पेशेंट विद सस्पेक्टेड मैलिग्नेंसी एंड स्क्रीनिंग ऑफ कैंसर” विषय पर डॉ. अभिनव देवान ने लिया। उन्होंने बताया कि जब किसी मरीज में कैंसर की आशंका हो, तो डॉक्टरों को किस तरह आगे बढ़ना चाहिए। इसमें मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, चिंताजनक संकेतों और लक्षणों की पहचान, जरूरी जांच और समय पर विशेषज्ञ के पास रेफर करना शामिल है।
सत्र में कैंसर स्क्रीनिंग की भूमिका और उन लोगों की पहचान पर भी चर्चा हुई, जिन्हें उम्र, जोखिम कारकों, पारिवारिक इतिहास और लक्षणों के आधार पर आगे जांच की जरूरत हो सकती है। डॉ. देवान ने इस बात पर जोर दिया कि कैंसर विशेषज्ञ केंद्रों से बाहर काम करने वाले डॉक्टर भी शुरुआती स्तर पर संदेह पहचानने और मरीजों को सही जांच की दिशा में आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
डॉ. अभिनव देवान ने कहा, “कैंसर की शुरुआत कई बार ऐसे लक्षणों से हो सकती है, जो सामान्य या अस्पष्ट लगते हैं। व्यवस्थित क्लीनिकल जांच, चेतावनी संकेतों की सही पहचान और समय पर रेफरल से मरीज को जल्दी सही निदान और उपचार तक पहुंचाने में बड़ा फर्क पड़ सकता है। कुछ कैंसर और उच्च जोखिम वाले लोगों में स्क्रीनिंग भी एक महत्वपूर्ण साधन है।”
सीएमई में भोपाल के चिकित्सा समुदाय ने सक्रिय भागीदारी की। चर्चा में वास्तविक क्लीनिकल स्थितियों, रेफरल प्रक्रिया और बहु-विषयक कैंसर उपचार से जुड़े विषय शामिल रहे। संवादात्मक सत्रों ने प्रतिभागियों को अपने अनुभव साझा करने और रोजमर्रा की चिकित्सा प्रैक्टिस से जुड़े सवालों पर स्पष्टता पाने का अवसर दिया।
आरजीसीआईआरसी ने आईएमए ग्रेटर भोपाल और स्थानीय चिकित्सा समुदाय का उनके सहयोग और सहभागिता के लिए आभार व्यक्त किया। इस तरह की शैक्षणिक पहलों के माध्यम से संस्थान निरंतर चिकित्सा शिक्षा को बढ़ावा देता है, साक्ष्य-आधारित ऑन्कोलॉजी प्रथाओं को प्रोत्साहित करता है और विशेष कैंसर केंद्रों तथा क्षेत्रीय स्वास्थ्य सेवाओं के बीच बेहतर तालमेल बनाने का प्रयास करता है।
अपने मूल्यों नैतिकता, सहानुभूति और उत्कृष्टता के मार्गदर्शन में आरजीसीआईआरसी शिक्षा, शोध, बहु-विषयक सहयोग और बेहतर क्लीनिकल निर्णयों तक व्यापक पहुंच के माध्यम से कैंसर देखभाल को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।


