~ एक खूबसूरत कथा जो याद दिलाती है कि घर वहीं है जहां माँ है… ‘बिंदी’ में नजर आएँगी राधिका मुथुकुमार (काजल), सांची भोयर (बिंदी), क्रुशाल आहुजा (अविराज) और मानव गोहिल (दयानंद) ~
कहते हैं माँ का प्यार सबसे अंधेरे कारागार को भी घर बना देता है। अपनी दमदार, सच्ची और जिंदादिल कहानियों की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए, कलर्स लेकर आ रहा है ‘बिंदी’ — न्याय के लिए बेटी की लड़ाई की गाथा। जेल की चारदीवारी में जन्मी और पली-बढ़ी बिंदी की पूरी दुनिया उसकी माँ काजल है, जिनका अटूट स्नेह लोहे की सलाखों को भी उम्मीद और प्यार के आशियाने में बदल देता है। लेकिन जब क़ानून बिंदी को उसकी माँ से अलग कर बाहर की दुनिया में धकेल देता है, तो उनकी नाज़ुक खुशियाँ बिखर जाती हैं।
मथुरा की पृष्ठभूमि पर आधारित यह कहानी एक मासूम बच्ची की है, जो पहली बार एक अराजक और शत्रुतापूर्ण दुनिया से रूबरू होती है। जल्द ही अतीत के परदे उठते हैं और बिंदी को पता चलता है कि उसके पिता अविराज ने लालच में आकर उसकी माँ को धोखा दिया और निर्दयी माफिया डॉन दयानंद चौधरी से मिलकर साज़िश रची। अन्याय के खिलाफ उठ खड़ी हुई बिंदी संकल्प लेती है कि वह पढ़-लिखकर एक दिन काजल को जेल से मुक्त कराएगी। लेकिन जब अविराज और दयानंद फिर से उसके सामने आते हैं, तो क्या उसकी जंग माँ को घर लाने के लिए काफ़ी साबित होगी?
काजल के रूप में राधिका मुथुकुमार, बिंदी के रूप में सांची भोयर, अविराज के रूप में क्रुशाल आहूजा और दयानंद के रूप में मानव गोहिल अभिनीत, 'बिंदी' का प्रीमियर 17 सितंबर को होगा और यह हर दिन रात 08:30 बजे कलर्स और जियोहॉटस्टार पर प्रसारित होगा।
काजल की भूमिका निभा रहीं राधिका मुथुकुमार कहती हैं, “जब मैंने पहली बार काजल की कहानी सुनी, तो भीतर तक टूट गई। एक औरत जो कभी एक साधारण और प्यार करने वाले परिवार का हिस्सा थी, आज उन सलाखों के पीछे है—एक ऐसे अपराध की सज़ा भुगतते हुए, जो उसने कभी किया ही नहीं। उसी अंधेरे में उसकी छोटी-सी बेटी—जो उसी जेल में पैदा हुई और बड़ी हुई—उसकी एकमात्र लाइफलाइन है। माँ जेल की दीवारों के बीच भी अपनी बच्ची के लिए प्यार की दुनिया बुनती है ताकि बेटी को बेड़ियों का बोझ न महसूस हो। लेकिन उन दीवारों के बाहर की दुनिया जेल से भी ज्यादा क्रूर है, जहाँ अविराज और दयानंद जैसे लोग हर मोड़ पर खतरा बनकर खड़े हैं। काजल का किरदार निभाना मेरे लिए केवल अभिनय नहीं, बल्कि एक आशीर्वाद है—क्योंकि यह सफर हमें याद दिलाता है कि सबसे अंधेरे कोनों में भी माँ का प्यार ही सबसे बड़ी उम्मीद और ताक़त है।”

मुख्य भूमिका निभा रहीं सांची भोयर कहती हैं, "बिंदी का किरदार निभाना मेरे लिए सम्मान की बात है। वह एक छोटी सी मासूम बच्ची है जिसकी पूरी दुनिया उसकी माँ का प्यार है, और उसके लिए सबसे बड़ा सपना अपनी माँ की योद्धा बनना और एक दिन उसे जेल से बाहर लाना है। मेरे लिए, यह भूमिका एक चुनौती की तरह थी जिसे मुझे आगे बढ़ते हुए और अभिनय में महारत हासिल करते हुए स्वीकार करना था। जब उसे उसकी माँ से अलग कर दिया जाता है और एक ऐसी दुनिया में धकेल दिया जाता है जो उसका मज़ाक उड़ाती है, तो वह दयालुता से उसका सामना करने का विकल्प चुनती है—और यही बात उसे मेरे लिए खास बनाती है।"
अविराज का किरदार निभाने को लेकर उत्साहित क्रुशाल आहूजा कहते हैं, "काजल अपनी बेटी के लिए जमीन-आसमान एक कर सकती है, जबकि मेरा किरदार, अविराज, इस बात से अनजान है कि उसकी एक बेटी भी है। उसके बारे में डरावनी बात यह है कि वह सिर्फ एक खलनायक नहीं है। दयानंद के साथ मिलकर अपनी पत्नी के साथ छल करने में उसे जरा भी पछतावा नहीं है; वह पैसों के लिए किसी भी हद तक जा सकता है और यही उसे खतरनाक बनाता है। यह पहली बार है जब मैं एक नकारात्मक किरदार निभा रहा हूँ, जो इस सफर को और भी रोमांचक बनाता है। एक अभिनेता के तौर पर, मैं मानवीय व्यवहार के गहरे पहलुओं को समझने के लिए उत्सुक हूँ, और मुझे उम्मीद है कि दर्शक मुझे इस भूमिका में पसंद करेंगे जो जितनी चुनौतीपूर्ण है उतनी ही संतोषजनक भी है।"
दयानंद का किरदार निभाते हुए मानव गोहिल कहते हैं, "दयानंद की भूमिका निभाने का मतलब था एक ऐसे व्यक्ति की भूमिका निभाना जो भ्रष्टाचार और नियंत्रण पर पलता-बढ़ता है। वह सोच-समझकर काम करता है और जानता है कि सिस्टम को अपने फायदे के लिए कैसे इस्तेमाल करना है। वह एक निहायत दुष्ट व्यक्ति है जो अपने कामों को जायज मानता है और यही दृढ़ विश्वास उसे खौफनाक बनाता है। दयानंद को मानवीय रूप देना नामुमकिन है क्योंकि उसके फैसले इतने गहरे और विनाशकारी हैं कि आप उसे सत्ता की कीमत पर सवाल उठाए बिना नहीं देख सकते। इस भूमिका में जान फूंकना और इसे उन दर्शकों के साथ साझा करना अविश्वसनीय लगता है जिन्होंने मुझे इतने सालों में कई अलग-अलग किरदारों में पसंद किया है।"