बिना हाथों वाली महिला शीतल देवी बनी पैरा तीरंदाज और पैरालंपिक पदक विजेता
नई दिल्ली। भारत का भविष्य उन व्यक्तियों द्वारा गढ़ा जा रहा है जो सीमाओं से परे सपने देखने का साहस रखते हैं और अपनी पूरी क्षमता को साकार करने का प्रयास करते हैं। डेलॉइट इंडिया ने आज विविध प्रतिभाओं के साथ जुडऩे की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई, जिसका उदाहरण 18 वर्षीय शीतल देवी के साथ उसकी साझेदारी है, जो दुनिया की पहली बिना हाथों वाली महिला पैरा तीरंदाज और पैरालंपिक पदक विजेता हैं। उपहास के बावजूद 15 साल की उम्र में धनुष उठाकर, 16 साल की उम्र में विश्व की नंबर 1 खिलाड़ी बनीं, 17 साल की उम्र में अर्जुन पुरस्कार और पैरालंपिक कांस्य पदक जीता, शीतल बाधाओं को तोड़ती रही हैं, सीमाओं को चुनौती देती रही हैं और सपने देखने, दृढ़ रहने और उपलब्धि हासिल करने की स्वतंत्रता को अपनाती रही हैं।
डेलॉइट साउथ एशिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, रोमल शेट्टी ने कहाकि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसके लोगों में निहित है, बड़े सपने देखने, चुनौतियों से ऊपर उठने और संभावनाओं को उपलब्धियों में बदलने की उनकी क्षमता में।
शीतल की यात्रा इस बात का एक ज्वलंत उदाहरण है कि जब लचीलापन और अवसर मिलते हैं, तो क्या हासिल किया जा सकता है। डेलॉइट इंडिया में, हमारा विजन न केवल भारत की प्रगति का साक्षी बनना है, बल्कि अवसर पैदा करके, प्लेटफ़ॉर्म बनाकर और सही पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करके, जहाँ भारत की प्रतिभा फल-फूल सके, महानगरों से आगे बढक़र इसे सक्रिय रूप से सक्षम बनाना है।
शीतल जैसी कहानियों का जश्न मनाकर और उन्हें बढ़ावा देकर, डेलॉइट इंडिया देश के सबसे मूल्यवान संसाधन, उसके लोगों में निवेश करना जारी रखता है। साथ मिलकर, हम एक ऐसा आधार तैयार कर सकते हैं जहाँ प्रतिभा को पोषित किया जाए, अवसरों को खोला जाए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विश्व मंच पर भारत का स्थान और मज़बूत हो।

