आत्माराम सोनी.भोपाल

राजधानी के व्यापारी की शीर्ष संस्था  भोपाल चेंबर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज में इन दिनों सियासी घमासान मचा हुआ है।  लेकिन चेंबर में मचे राजनीतिक सियासी गतिविधियों को लेकर शहर के विभिन्न संगठनों जुड़े प्रबुद्ध और वरिष्ठ संस्था के भविष्य को लेकर चिंतित हैं। भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स से सरोकार रखने वाले प्रबुद्धों ने स्पष्ट कहा कि भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज जैसी प्रतिष्ठित व्यापारिक संस्था में अगर राजनीतिक हस्तक्षेप बढ़ा तो विघटनकारी गतिविधियों का बढ़ना तय है। आपसी वैमनस्यता संस्था के लिए हितकारी नहीं हैं। कुल मिलाकर राजनीतिक हस्तक्षेप और आपसी वैमनस्यता न सिर्फ व्यापारियों की शीर्ष संस्था के लिए गर्त का द्वार खोलेगी, बल्कि संस्था से जुड़े अन्य व्यापारिक संगठन का नुकसान  होगा। जो सब मौजूदा समय  भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स में देखने को मिल रहा है। 


- अनदेखी और अति महत्वाकांक्षा की परिणीति कुछ इसी प्रकार सामने आती 
वरिष्ठ और प्रबुद्धजनों का कहना है कि संस्था के उच्च पदों पर पदासीन पदाधिकारियों द्वारा महत्वपूर्ण निर्णय में अपने साथी पदाधिकारी की अनदेखी, विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति में साथी पदाधिकारी के अनदेखी और अति महत्वाकांक्षा की परिणीति कुछ इसी प्रकार सामने आती है कि जब अन्य पदाधिकारी समय आने पर असहयोगात्मक रुख अपना लेते हैं। यही सब कुछ इस संगठन में देखने मिल रहा है।  


- अध्यक्ष संगठन का मुखिया होता है दुश्मन नहीं
 प्रबुद्धों के अनुसार उपाध्यक्ष, महामंत्री, कोषाध्यक्ष और अन्य पदाधिकारी के साथ ही कार्यकारिणी के बाकी सदस्य ने एकजुट होकर अध्यक्ष के इस्तीफा को स्वीकार कर लिया। जबकि इस्तीफा में अध्यक्ष ने कार्यकारिणी पर गभीर आरोप लगाए गए हैं। क्या कार्यकारिणी उन आरोपों को स्वीकार करती है। अगर हां तो इस अकर्मण्य कार्यकारिणी पर आने वाले समय में व्यापारी क्यों विश्वास करें ।  अगर आरोप गलत है तो कार्यकारिणी को अध्यक्ष को कारण बताने के लिए नोटिस देना चाहिए था, उनको बुलाना चाहिए था उनका पक्ष जानना चाहिए, क्योंकि अध्यक्ष संगठन का मुखिया होता है दुश्मन नहीं। 


- पदाधिकारी एकजुट होकर असहयोगात्मक रुख अपना लिया
प्रबुद्धों के अनुसार भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स के इस कार्यकाल में कुछ विशेष आमंत्रित प्रतिनिधियों की नियुक्ति की गई और उनकों महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी गई। जिससे चुनाव लड़कर आए पदाधिकारी और कार्यकारिणी के सदस्य अपने आप को उपेक्षित महसूस करने लगे, जिससे उनकी सहभागिता कम हुई। इसके साथ ही भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स की विगत दिनों आयोजित साधारण सभा में चुनाव की घोषणा के बाद अपने आप को अलग-थलग महसूस कर रहा है। पदाधिकारी एकजुट होकर असहयोगात्मक रुख अपना लिया। जिसकी परिणीति अध्यक्ष के स्टीफें के रूप में देखने मिला। 


- नियमों को ताक पर रखकर चल रहा मनमानी का खेल  
भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स में चल रहे राजनीतिक हस्तक्षेप से सियासी खेल के बारे में प्रबुद्ध जनों का कहना है कि इस पूरे घटनाक्रम में नियमों को ताक पर रखकर मनमानी तरीके से निर्णयों का खेल चलने लगा। भोपाल के सबसे बड़े व्यापारिक संगठन भोपाल चेंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री में इस चुनाव की बेला में राजनीतिक हस्तक्षेप भी बढ़ गया। 


- व्यापारिक संगठन की प्रतिष्ठा के लिए ठीक नहीं 
अध्यक्ष का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद घमासान और बढ़ गया। स्थिति की वैधता को लेकर कंपनी सेक्रेटरी के भी अभिमत नियमों की अनदेखी जैसे विषय सामने आने लगे, जो इस बड़े व्यापारिक संगठन की प्रतिष्ठा के लिए ठीक नहीं है। प्रबुद्धों का कहना  है कि अंदर खाने में जब विभिन्न पदाधिकारी और प्रमुख व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी से चर्चा की तो उनका पीड़ा झलकती हुई देखी की  इस चुनावी बेला में अध्यक्ष का सकारण इस्तीफा संगठन के लिए काफी दु:खद है। 


- निर्वाचन कार्य में सहयोग करना सभी मनोनीत और निर्वाचित पदाधिकारियों का प्रमुख दायित्व 
 प्रबुद्धजनों का कहना है कि निर्वाचन किसी भी संगठन का महत्वपूर्ण कार्यक्रम होता है और निर्वाचन कार्य में सहयोग करना सभी मनोनीत और निर्वाचित पदाधिकारियों का प्रमुख दायित्व होता है। वार्षिक साधारण सभा में चुनावों की घोषणा के बाद से ही चल रहे विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है। महामंत्री, उपाध्यक्ष, कोषाध्यक्ष और कार्यकारिणी के सदस्य संगठन की गाड़ी को पटरी पर लाने की जगह नियमों की अनदेखी कर आपसी वैमनस्यता को तवज्जों देते हुए चेंबर के बॉयलॉज को ताक में रखकर महत्वपूर्ण निर्णय कर रहे हैं जो सरकार न्यायोचित नही हैं । 


- इस्तीफा देने के बाद अध्यक्ष की निरंतर अनदेखी भी ठीक नहीं
ऐसे आरोप भी लगने लगे हैं कि इस्तीफा देने के बाद अध्यक्ष की निरंतर अनदेखी भी ठीक नहीं, जिस अध्यक्ष ने परिवार के मुखिया की तरह  3 वर्ष से अधिक का समय इन्ही पदाधिकारियों के साथ मिलकर संगठन को मजबूत करने, नए सदस्यों को जोड़ने, व्यापारियों की समस्याओं के लिए सरकार से संवाद स्थापित करने व्यापारिक समस्याओं के लिए मैदान में खड़े होकर संघर्ष करने का कार्य किया हो,  ऐसे में इस व्यापारिक परिवार के मुखिया होने के नाते उन्हें संवाद में जरूर सम्मिलित करना चाहिए।  ऐसा नहीं करके क्या बाकी सदस्य भी यह संदेश तो नहीं दे रहा है कि अगर पूर्व में किन्ही पदाधिकारी ने मनमानी की तो हम भी वही मनमानी करेंगे। 

 

 संगठन की गरिमा मध्यप्रदेश प्रदेश राजधानी में बनी रहे इसके लिए किसी भी प्रकार का वाद- विवाद में पड़ना, वाद- विवादों में संगठन समायोजित करना उचित नहीं
 भूल सुधारने का अवसर तो होना चाहिए, उनको दोहराना इतने बड़े व्यापारिक संगठन के लिए कहीं से भी ठीक नहीं और जो भी पदाधिकारी इस तरह का कार्य करते हैं। समाज में उनके प्रति भी संदेश अच्छा नहीं जाता।  महामंत्री और उपाध्यक्ष को अध्यक्ष से चर्चा करके आगामी समय में निर्वाचन समिति का गठन करने, निर्वाचन की व्यवस्थाएं करने, निर्वाचन के लिए पर्याप्त फंड की व्यवस्था करने और एक निष्पक्ष निर्वाचन संपन्न हो इसके लिए निष्पक्ष निर्वाचन अधिकारी की नियुक्ति करने जैसे प्रमुख दायित्वों पर चर्चा करनी चाहिए।  संगठन की गरिमा मध्यप्रदेश प्रदेश राजधानी में बनी रहे इसके लिए किसी भी प्रकार का वाद- विवाद में पड़ना, वाद- विवादों में संगठन समायोजित करना उचित नहीं हैं। अगर ऐसा हुआ तो निश्चित ही संस्था से सभी जुड़े हुए प्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा पर विपरीत प्रभाव पड़ने वाला है।