एवीएस न्यूज.भोपाल


राजधानी भोपाल में बीते दिनों इंडेन डिपो से अंडरवेट (कम वजन) सिलेंडर की आपूर्ति होने के बाद संचालकों में खलबली मच गई है। गैस एजेंसी संचालकों ने स्पष्ट कहा कि जिला प्रशासन और नापतौल विभाग की संयुक्त कार्रवाई और सघन जांच में इंडेन गैस कंपनी डिपो में घटित कारगुजारी का भंडाफोड़ जो किया है वह पहली बार जरूर उजागर हुआ है , लेकिन कारगुजारी सालों घटित हो रही है। लेकिन सदैव डिपो अधिकारी और ट्रांसपोर्टर की करतूत का ठीकरा एजेंसी संचालकों पर ही फोड़ा जाता है।  


 गौरतलब है कि युद्धवार की बदौलत मध्यप्रदेश सहित देशभर में एलपीजी की उत्पन्न हुई किल्लत के बीच मुनाफावसूली के बीते दिनों कई मामले सामने आए। जिस पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि गैस की कोई कमी नहीं है और कालाबाजारी करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

इतना ही नहीं पेट्रोलियम मंत्रालय ने गैस आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा बढ़ाने के लिए राज्यों को निर्देश दिए हैं। लेकिन बीते दिन जिला प्रशासन और नापतौल विभाग की संयुक्त जांच कार्रवाई में कंपनी डिपो को दोषी पाया गया और कार्रवाई स्वरूप विभाग इंडेन कंपनी के खिलाफ प्रकरण पंजीबद्ध किया। जिससे यह बात स्पष्ट हो गई की कंपनी के डिपो के अधिकारी-कर्मचारियों और ट्रांसपोर्टर की सांठगांठ के चलते शहर के गैस एजेंसी संचालकों को कम वजन का गैस सिलेंडर सप्लाई सप्लाई किया जाता है और ठीकरा गैस एजेंसी संचालकों के सिर फोड़ा जाता है।  


इस मामले में उपभोक्ताओं का कहना है कि डिपो अधिकारियों और ट्रांसपोर्टरों की मिलीभगत से गैस चोरी की जा रही है और इसका दोष एजेंसी संचालकों पर मढ़ दिया जा रहा है। जांच में संकेत मिले हैं कि गैस डिपो से निकलने के बाद और एजेंसी तक पहुंचने के दौरान ट्रांसपोर्टर और कर्मचारी गैस चोरी कर रहे हैं और संकट के समय का फायदा उठाकर सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग कर रहे हैं। 


 गैस एजेंसी का संचालन करना अत्यधिक कष्टप्रद होता जा रहा 
शहर के एक गैस एजेंसी संचालक ने नाम न छापने शर्त पर बताया कि  गैस एजेंसियों का संचालन करना अब अत्यधिक कष्टप्रद होता जा रहा है। कंपनी के डिपो से सिलेंडर ढुलाई से लेकर ग्राहक तक वितरण के बीच संचालक कई  माध्यमों पर निर्भर रहता है। क्योंकि संचालक डिपो से लेकर ग्राहक तक स्वयं तो इतने सिलेंडर बांटने जा नहीं सकता।

इतना है कि कंपनियों की कमी शिकायत भी सरकार से नहीं कर सकता है। क्योंकि एजेंसी संचालक भांति भांति दबाव तले दबा होता है। इसके बावजूद अगर किसी भी प्रकार की कोई शिकायत किसी के द्वारा की जाती है कि सीधे तौर पर जिम्मेदार एजेंसी वाले को ठहराते हैं। जबकि हर संकट के समय चाहे वह कोविड हो या अन्य महामारी या फिर वर्तमान समस्या और कठिन परिस्थितियों में भी एजेंसी संचालक ग्राहकों को सिलेंडर पहुंचाकर सरकार की नीतियों को हमेशा सपोर्ट किया है। लेकिन अब समय आ गया है कि कानून में सुधार किया जाए और जिस माध्यम से गलती हुई उस पर कार्यवाही की जाए  कि सिर्फ  गैस एजेंसी संचालक पर कार्रवाई हो।

 

प्राप्त कमर्शियल सिलेंडर में 2 किलो 200 ग्राम कम गैस भरी

 इधर भोपाल होटल- रेस्टोरेंट व्यवसायी एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुलपाल सिंह पाली ने बताया कि बुकिंग के अनुरूप महीनों के इंतजार के बाद शुक्रवार की सुबह संस्थान को एक कमर्शियल सिलेंडर प्राप्त हुआ। जिसे तौला गया तो 2 किलो 200 ग्राम गैस कम रही। उन्होंने बताया कि कमर्शियल सिलेंडर का कुल वजन 38 किलो 200  ग्राम होना चाहिए। क्योंकि खाली सिलेंडर का वजन  19 किलो 200 ग्राम सिलेंडर में अंकित है। उस हिसाब से सिलेंडर में 19 किलो गैस भरने के बाद  सिलेंडर का कुल वजन 38 किलो 200  ग्राम होना चाहिए, मगर वजन 36 किलो ग्राम दर्शाया। जिससे स्पष्ट हुआ कि सिलेंडर में 2 किलो 200 ग्राम कम गैस भरी है जो कि सील पैक है। 


 

 

डीजल और पेट्रोल में भी अंडरवेट (कम वजन) की शिकायत 
अंडरवेट (कम वजन) सिलेंडर तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि तेल डिपो से भी निर्धारित मात्रा से कम डीजल ओर पेट्रोल की सप्लाई हो रही है। जिसे चेक किया जाना चाहिए। हमारा संगठन कई बार कम मात्रा की शिकायत कर चुका है। अब नापतौल की नईं टीम से संगठन को उम्मीद है कि वो तेल डिपो पर भी आकस्मिक निरीक्षण कर पंप मालिकों को राहत प्रदान करें।

तेल और गैस वितरक हमेशा ईमानदारी से कार्य कर ग्राहकों को संतुष्टि के लिए प्रयासरत रहते हे गैस सिलेंडर में डिपो से ही कम मात्रा में प्रदाय किया जाना अत्यंत गंभीर प्रकृति का अपराध है, दोषी व्यक्ति को कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। 
अजय सिंह
 अध्यक्ष, मध्यप्रदेश पेट्रोल पंप ऑनर्स एसोसिएशन