व्यापारियों ने कहा दुकान तोड़ने से पहले विस्थापित करना करना चाहिए था

मुआवजा तो मिला, पर हमारा रोजागर छिना, अभी तो हम बेरोजगार हो गए

पार्षद ने आश्वासन दिया है कि कोकता बाईपास पर पर दुकाने बनाकर सभी को देंगे स्थाई जगह

 

शिवनारायण सोनी, भोपाल।

भेल क्षेत्र स्थित आनंद नगर में दूसरे दिन शनिवार को भी दुकानें तोड़ने की प्रशासन ने कार्रवाई की। अब तक कुल 200 दुकानों को तोड़ा गया। वहीं कुछ दुकानदार स्वयं अपनी दुकान तोड़ते देखे गए हैं। ज्ञात हो कि नगर प्रशासन ने सिक्सलेन रोड और फलाइओवर निमाण कार्य के लिए पिछले 4 साल से दुकानारों को नोटिस देकर दुकान हटाने के लिए कहा था। इसके बाद भी दुकानदारों ने दुकानें नहीं हटाइ थी। इसके बाद प्रशासन ने शुक्रवार को जेसीबी से सभी दुकानों को ढहाने का कार्य किया। इस दौरान बड़ी संख्या में पशासनिक अमला तैनात था। कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों ने विरोध करना शुरू किया तो प्रशासनिक अमले के दबाव में वे भी शांत हो गए।  कुल मिलाकर कार्रवाई पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।

अस्थाई जगह तो देना चाहिए था, जिससे हम रोजगार चला सकें

दुकानदारों का कहना है कि हमें दुकान तोड़ने का दुख नहीं है पर हमें रोजगार के लिए पहले कहीं उचित स्थान दे देते तो हमरा रोजागार नहीं छिनता। राजू साइकिल वाले का कहना है कि हमें मुआवजा तो मिला है, पर दुकान के लिए जगह नहीं दिया गया है। दुकान टूटने से हमरा रोजगार तो छिन गया। प्रशासन को पहले अस्थाई ही सही जगह जरूर देना चाहिए था। जिससे हम अपना रोजागार तो शुरू कर लेते। अब हम नई जगह में फिर दुकान खोलेंगे तो दुकान चलने में काफी वक्त लगेगा। उन्होंने सबसे बड़ी बात यह कही कि मुआवजा इतना कम है कि नई जगह में रोजगार शुरू करना आसान नहीं होगा। हम यहां सालों से रोजगार करते हुए आ रहे हैं। पर अब विकास कार्य के लिए हमारी दुकानें तोड़ दी गई हैं। छोटे दुकानदरों के साथ तो काफी दिक्कतें सामने आएगी।

 

हमारा तो रोजगार ही छिन गया

दुकानदार संजू सेन ने बताया कि हमारी कटिंग की दुकान थी हमें भी मुआवजा मिला है, पर इससे क्या होगा? हमारा रोजगार तो खत्म हो गया। उन्होंने बताया कि हम यहां 40 साल से दुकान चलाते आ रहे हैं। अब प्रशासन ने फलाइओवर निर्माण के लिए हमारी दुकानें तोड़ी हैं। अब हम दुकान कहां चलाएंगे। उन्होंने बताया कि हम छोटे व्यापारी हैं, हमारी समस्या प्रशासन को समझना चाहिए। हमें भी रोजागार के लिए स्थाई जगह देनी चाहिए। हमारी दुकान बीच बाजार में थी तो अपने परिवार को गुजर-बसर हो जाता था, लेकिन किसी भी प्रशासन अधिकारी ने यह नहीं सोचा अब हमारा क्या होगा?

 

अब नए सिरे से फिर शुरू करना होगा रोजगार

दुकानदार भीम राजपूज ने बताया कि हमारी दुकान प्रशासन ने तोड़ दी है। हम तो छोटे दुकानदार हैं हम अपने परिवार का लालन पालन अब कैसे करेंगे? हमें अपनी अजीबिका चलाने के लिए अब फिर नए सिरे से शुरुआत करनी होगी। प्रशासन ने हमें जो मुआवजा दिया है उसमें नई जगह पर दुकान खोल पाना मुमकिन नहीं है। अगर कहीं जगह मिल जाती तो हम कर्ज  लेकर दुकान खोल लेते, पर अभी तो जगह का कोई ठिकाना ही नहीं है। हम जाएं भी तो कहां। दुकानदार ने बताया कि यहां के सभी दुकानदारों में रोष पर कोई सामने नहीं आने को तैयार नहीं है। अब सभी दुखी मन अपना सामान हटा रहे हैं।