आत्माराम सोनी.भोपाल
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड ने बड़ा बदलाव किया है। अब नियमों और निर्देशों में जटिल कानूनी भाषा की जगह आसान और आधुनिक शब्दों का इस्तेमाल होगा। इस पर राजधानी के कर सलाहकारों और अधिवक्ताओं ने कहाकि केंद्र सरकार द्वारा किए जा रहे  इस बड़े बदलाव का उद्देश्य नए कर प्रावधानों को सरल बनाना, अनावश्यक धाराओं को हटाना और विकसित होती तकनीक व आर्थिक परिवेश के साथ तालमेल बिठाना है। फिर भी इस अधिनियम में तलाशी अभियान के अंतर्गत अतिरिक्त प्रावधान शामिल किए गए हैं ।

इसमें तलाशी अभियान के तहत सोशल मीडिया खाता, ईमेल सर्वर, क्लाउड स्टोरेज डाटा और किसी भी ट्रेडिंग या निवेश खाता तक अधिकारियों की पहुंच शामिल है,  जिससे यह विचारणीय होगा कि यदि इस तलाशी अभियान से किसी की निजता के अधिकार को कैसे सुरक्षित किया जा सकेगा। व्यापारी भी इसको लेकर सशंकित हैं, जिसका समाधान उचित होगा।

 करसलाहकारों ने कहाकि अब नया आयकर कानून निकाय पुरानी शब्दावली और जटिल व्याख्याओं से दूर हो गया है। इससे पहले आम नागरिकों के लिए कर कानूनों को समझना मुश्किल हो जाता था। आम करदाता अगर प्रावधानों को पढ़ेंगे, तो वह समझ पाएंगे कि उनके मामले में कानून क्या कहता है।

 
  बोले, शहर के कर सलाहकार और अधिवक्ता 
 


आयकर अधिनियम 1961 बनाम आयकर अधिनियम 2025 पर तुलनात्मक दृष्टि डालने से प्रारूपण शैली और भाषा सरलीकरण में बड़ा बदलाव दिखाई देता है। नए आयकर कानून में 536 धाराएं और 16 अनुसूचियां होंगी, जिन्हें सुव्यवस्थित ढंग से व्यवस्थित किया गया है। इसकी खास बात है कि अब प्रीवियस ईयर और एसेसमेंट ईयर के बजाय टैक्स ईयर जैसी एक ही अवधारणा होगी। नए इनकम टैक्स कानून में मुकदमेबाजी कम करने के लिए अनावश्यक और विरोधाभासी प्रावधानों को हटा दिया गया है। भारत में इनकम टैक्स से जुड़े मामलों का काम करने वाली संस्था  केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड को डिजिटल युग के अनुसार नियम बनाने के लिए अधिक शक्ति दी गई है।
राजेश जैन 
वरिष्ठ,कर सलाहकार 

 

 
केंद्र सरकार द्वारा जो  आयकर कानून में परिवर्तन लाए जा रहे हैं उससे कर सलाहकारो  एवं कारदाताओ को फायदा होगा, क्योंकि नए कानून में धाराएं कम की गई हैं एवं कुछ अनावश्यक कठिन प्रावधानों को हटाया गया है, परंतु सलाहकारों के लिए नए प्रावधानों को पढ़कर समझने का काम बढ़ जाएगा एवं नए कानून में नए विवाद भी उत्पन्न होंगे। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा नया आयकर विधेयक 2025 पेश करने का उद्देश्य कर कानूनों को सरल बनाना है ताकि आम आदमी के लिए उन्हें समझना और उनका पालन करना आसान हो। इसमें ईमानदार करदाताओं द्वारा गलतियाँ करने पर दंड कम करने के लिए उचित उपाय किए गए हैं।
मृदुल आर्य 
अध्यक्ष , टैक्स लॉ बार एसोसिएशन

 


  आयकर विधेयक, 2025, का मुख्य उद्देश्य भाषा को सरल बनाना और अनावश्यक प्रावधानों को हटाना है। व्यक्तियों और निगमों के लिए कर की दरें और व्यवस्थाएँ अपरिवर्तित रहेंगी। अधिकांश परिभाषाएँ भी बरकरार रखी गई हैं। अपराधों और दंडों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। विधेयक 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी होने का प्रस्ताव करता है। प्रमुख परिवर्तनों में अधिनियम में कर मामलों में सूचना के बिना पहचान के संग्रह और मूल्यांकन का प्रावधान है। प्रौद्योगिकी के माध्यम से- करदाता के साथ संपर्क को समाप्त करना और पैमाने की अर्थव्यवस्थाओं और कार्यात्मक विशेषज्ञता के माध्यम से संसाधनों के उपयोग को अधिकतम करना। अधिनियम के तहत, तलाशी के मामलों में अघोषित आय में धन, सोना-चांदी, आभूषण या अन्य मूल्यवान वस्तुएँ शामिल हैं। विधेयक इस परिभाषा का विस्तार करते हुए आभासी डिजिटल संपत्तियों को भी इसमें शामिल करता है। यह अधिनियम आयकर अधिकारियों को इमारतों में प्रवेश, तलाशी और ताले तोड़ने की अनुमति देता है। यह अधिनियम अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज़ों की जांच करने का भी अधिकार देता अधिकारियों के पास किसी भी आवश्यक एक्सेस कोड को ओवरराइड करके पहुँच प्राप्त करने का अधिकार होगा। इसमें ईमेल सर्वर, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग अकाउंट, और संपत्ति के स्वामित्व का विवरण संग्रहीत करने वाली वेबसाइटें शामिल हैं। अधिनियम कुछ पात्र करदाताओं को कर निर्धारण अधिकारियों द्वारा पारित मसौदा आदेशों को विवाद समाधान पैनल के पास भेजने की अनुमति देता है। पैनल कर निर्धारण पूरा करने के लिए निर्देश जारी कर सकता है। यह अधिनियम केंद्र सरकार को दोहरे कराधान के मामलों में राहत प्रदान करने के लिए अन्य देशों के साथ समझौते करने की अनुमति देता है। 
मुकुल शर्मा 
कर विशेषज्ञ  

 


 
लगभग 60 वर्ष  पुराने आयकर अधिनियम 1961  की  जगह  भारत सरकार ने  इंकम टैक्स एक्ट  2025 जिसे राष्ट्रपति द्वारा  मंजूरी  दी गई है, जो  कि  1 अप्रैल  2026 से  लागू  होगा।  इस टैक्स  कानून को सरकार ने आधुनिक एवं पारदर्शी बनाया है।   पुराने कानून में  819 धाराएं थी एवं 47 अध्याय थे, जिन्हें संक्षिप्त कर  23 अध्याय में समेटकर 536 धाराएं  की है। इसमें आम आदमी के समझाने के लिए फार्मूला के द्वारा स्पष्ट किया गया है, कोई  नया टैक्स नहीं लगाया है साथ ही टैक्स स्लैब में परिवर्तन नहीं किया।  रिफंड  वाले  रिटर्न यदि  किसी वैध कारणवश लेट हो जाते तो भी अब  रिफंड मिलेगा पहले लेट रिटर्न पर रिफंड प्राप्त नहीं होता था असिसमेंट ईयर की जगह  अब टैक्स ईयर कहा जाएगा। सरकार ने इसे काफी  सरल करने की कोशिश की है  इससे सभी को लाभ होगा।  
 एडवोकेट मुनींद्र वैद्य 
बीसीसीआई कर सलाहकार