कर सलाहकारों एवं व्यापारियों के संगठन ने वित्तमंत्री को सौंपा ज्ञापन : जीएसटी मामलों में अनिवार्य वर्चुअल (ऑनलाइन) सुनवाई के फैसले का व्यापारियों और कर सलाहकारों ने किया विरोध
एवीएस न्यूज.भोपाल
मध्यप्रदेश के वाणिज्यिक कर विभाग द्वारा 1 अप्रैल 2026 से जीएसटी मामलों में अनिवार्य वर्चुअल (ऑनलाइन) सुनवाई के फैसले का व्यापारियों और टैक्स विशेषज्ञों ने विरोध शुरू कर दिया है।
इस संदर्भ में विभिन्न व्यापारिक संगठनों और कर सलाहकारों ने उपमुख्यमंत्री एवं वाणिज्यिक कर मंत्री जगदीश देवड़ा को ज्ञापन सौंपकर इस निर्णय को वापस लेने या स्वैच्छिक बनाने की मांग की है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश वाणिज्यिक कर विभाग ने 28 फरवरी 2026 को एसओपी जारी की थी, जिसके अनुसार 1 अप्रैल 2026 से धारा 73, 74, 74ए और अपीलीय मामलों में सुनवाई केवल वर्चुअल माध्यम से ही होगी, लेकिन व्यापारियों और कर सलाहकारों का कहना है कि पूर्णतः डिजिटल सिस्टम छोटे व्यापारियों और उन लोगों के लिए मुश्किल पैदा करेगा जो तकनीक के साथ सहज नहीं हैं। उन्होंने कहाकि आमने-सामने सुनवाई के बिना जटिल मामलों में दस्तावेजों की सही तरीके से व्याख्या करना कठिन होगा।
संगठन के मध्य प्रदेश चैप्टर के अध्यक्ष राजेश्वर दयाल ने वाणिज्यिक कर मंत्री देवड़ा को बताया कि व्यक्तिगत सुनवाई का मौका ना देना नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत के विरुद्ध है । क्योंकि कर के मामले से जुड़े प्रकरणों में ऑनलाइन दस्तावेज प्रस्तुत करना एवं उन्हें अधिकारी को समझाना इतना सरल नहीं है। देश के सर्वोच्च न्यायालय प्रदेश के उच्च न्यायालय तथा केंद्रीय जीएसटी विभाग में भी वर्चुअल एवं व्यक्तिगत दोनों प्रकार से सुनवाई के मौके करदाताओं को दिए जाते हैं ,ताकि वह अपना पक्ष मजबूती से रख सकें एवं अधिकारी को न्याय पूर्ण आदेश पारित करने में सुविधा हो।
विभाग में वर्चुअल सुनवाई के लिए पूरी व्यवस्थाएं नहीं हैं साथ ही मध्य प्रदेश एवं भोपाल के व्यवसायी भी अभी तकनीकी रूप से इतने सक्षम नहीं है कि ऑनलाइन सुनवाई करवा सकें। प्रतिनिधि मंडल ने मंत्री से मांग की कि केंद्रीय जीएसटी विभाग की तरह व्यक्तिगत सुनवाई का मौका भी व्यवसायी द्वारा मांगने पर दिया जाए ऐसे दिशा निर्देश विभाग को जारी करें।






