एवीएस न्यूज. भोपाल


फर्टिलिटी क्लिनिक में होने वाली शुरुआती बातचीत आमतौर पर संभावनाओं से जुड़ी होती है। पेशेंट्स यह समझना चाहते हैं कि उनके लिए कौन से विकल्प उपलब्ध हैं, उपचार किस तरह आगे बढ़ सकता है और आधुनिक प्रजनन चिकित्सा वास्तव में क्या समाधान प्रदान कर सकती है। सहायक प्रजनन तकनीकों में हुई प्रगति के साथ आज उपचार किसी एक तय ढांचे तक सीमित नहीं रहा है।

डॉ. सोनल चौकसी, फर्टिलिटी स्पेशलिस्ट, बिरला फर्टिलिटी एंड आईवीएफ, भोपाल का कहना है कि अब उपचार योजनाएँ अधिक व्यक्तिगत होती जा रही हैं, जिससे डॉक्टर पेशेंट्स की मेडिकल हिस्ट्री, उम्र और अन्य महत्वपूर्ण कारकों को ध्यान में रखते हुए उपचार की दिशा तय कर पाते हैं। जैसे ही उपचार की योजना स्पष्ट होती है, कई परिवारों के सामने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न आता है कि उपचार को बिना देर किए कैसे शुरू किया जाए, जबकि लंबे समय की आर्थिक जिम्मेदारियों को भी संतुलित रखना हो।


भारत में आईवीएफ उपचार की लागत अलग अलग क्लिनिक्स, दवाओं और आवश्यक जांचों के आधार पर बदल सकती है। आम तौर पर एक आईवीएफ साइकल की लागत लगभग ₹1.0 से ₹1.5 लाख के बीच हो सकती है, जो क्लिनिक, दवाओं और अतिरिक्त प्रक्रियाओं पर निर्भर करती है। कई परिवारों के लिए यह केवल इच्छा का नहीं, बल्कि समय और आर्थिक व्यवस्था का प्रश्न बन जाता है। कई बार उपचार इसलिए टल जाता है क्योंकि पहले आर्थिक संसाधन व्यवस्थित करने की आवश्यकता महसूस होती है, जबकि जैविक रूप से प्रजनन क्षमता समय के साथ प्रभावित होती रहती है।
विभिन्न अध्ययनों के अनुसार इन्फर्टिलिटी विश्व स्तर पर लगभग 10% - 15% दंपतियों को प्रभावित करती है। इसके बावजूद सहायक प्रजनन उपचारों का उपयोग आवश्यकता की तुलना में अभी भी सीमित है। अंतरराष्ट्रीय अनुभव भी यह दिखाते हैं कि आर्थिक बाधाएँ कई बार आईवीएफ उपचार में देरी का कारण बनती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी इस ओर संकेत किया है कि उपचार की लागत कई परिवारों के लिए एक बड़ी चुनौती हो सकती है।
यहीं पर लचीली भुगतान योजनाएँ एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। जब उपचार की पूरी लागत एक बार में देने के बजाय उसे छोटे और प्रबंधनीय मासिक भुगतानों में विभाजित किया जाता है, तो कई पेशेंट्स के लिए उपचार शुरू करना अधिक व्यावहारिक हो जाता है। कुछ क्लिनिक्स के अनुभव में यह भी देखा गया है कि लगभग 30% तक पेशेंट्स उपचार के लिए ईएमआई जैसी सुविधाओं का उपयोग करते हैं। इससे उन परिवारों के लिए भी उपचार शुरू करना संभव हो पाता है, जो अन्यथा आर्थिक कारणों से निर्णय टाल देते।