ट्रकों में वीएलटीडी की अनिवार्यता समाप्त और नेशनल परमिट की प्रक्रिया बहाल करने की मांग 


एवीएस न्यूज..भोपाल
  ट्रक ऑपरेटर संगठन इंदौर ट्रक ऑपरेटर एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन का प्रतिनिधिमंडल उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से मुलाकात कर ट्रकों में वीएलटीडी की अनिवार्यता समाप्त और नेशनल परमिट की प्रक्रिया बहाल करने की मांग की और ज्ञापन सौंपा।  इस मौक पर अध्यक्ष अमरजीत सिंह बग्गा, चेयरमैन राजेंद्र त्रेहान  आरटीओ एवं ट्रैफिक कमेटी चेयरमैन सीएल मुकाती, विजय कालरा, ऑल इंडिया ट्रांसपोर्ट मोटर कांग्रेस, मध्यप्रदेश चेयरमैन हरीश डाबर आदि मौजूद रहे।

 
संगठन के प्रतिनिधिमंडल के अनुसार व्यापारिक मंदी एवं आर्थिक बोझ वर्तमान में मध्य-पूर्व के युद्ध हालातों के कारण वैश्विक व्यापार प्रभावित हुआ है. जिसका सीधा असर हमारे देश और प्रदेश के ट्रांसपोर्ट व्यवसाय पर पड़ा है। व्यापार में छाई इस मंदी के बीच, 1 अप्रैल 2026 से ट्रकों में वीएलटीडी  अनिवार्य करने से ट्रक मालिकों पर भारी आर्थिक बोझ बढ़ गया है।   विभाग द्वारा 'आम जनता की सुरक्षा' का तर्क देकर इसे अनिवार्य किया गया है। आम जनता बसों में सफर करती है, ट्रकों में नहीं। सार्वजनिक सेवा वाहनों (बसों) में इसकी उपयोगिता समझी जा सकती है, किंतु मालवाहक ट्रकों में इसकी अनिवार्यता से आम जनता को सुरक्षा कैसे प्राप्त होगी, यह समझ से परे है।
 

लुटेरे वीएलटीडी सिस्टम को हैक कर ट्रक की लाइव लोकेशन कर सकते हैं ट्रैक  
प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री को बताया कि डिजिटल असुरक्षा एवं लूट का भय ट्रकों में वीएलटीडी लगाना माल परिवहन की सुरक्षा के लिए घातक सिद्ध हो सकता है। जिस प्रकार वर्तमान में बैंकिंग फ्रॉड और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी घटनाएं बढ़ रही हैं। उसी प्रकार अपराधी और लुटेरे वीएलटीडी सिस्टम को हैक कर ट्रक की लाइव लोकेशन ट्रैक कर सकते हैं। इससे राजमार्गों पर ट्रक चालकों की जान और करोड़ों रुपये के माल की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा होगा। यह तकनीक ट्रकों के लिए "डिजिटल अरेस्ट" जैसी स्थिति निर्मित कर देगी, जिससे लूटपाट की घटनाओं में अत्यधिक वृद्धि होने की आशंका है।

कमांड सेंटर की विफलता प्रदेश में अभी तक केंद्रीय कमांड सेंटर व्यवस्थित रूप से कार्य नहीं कर रहे हैं। जब डिवाइस का कमांड सेंटर से संपर्क ही स्थापित नहीं हो पा रहा है. तो ऐसी अनुपयोगी व्यवस्था के लिए ट्रक मालिकों को बाध्य करना अनुचित है। उन्होंने कहाकि खुले बाजार में वीएलआईडी  की वास्तविक कीमत 25,000 से 26,000 है, किंतु एम्पैनल्ड कंपनियों द्वारा 212,000 से 15,000 रुपए वसूले जा रहे हैं। सिम रिन्यूअल के नाम पर भी 21,000 के स्थान पर 4,500 रुपए की मांग की जा रही है, जो वाहन स्वामियों के साथ खुली लूट है।


 उड़ीसा उच्च न्यायालय ने राज्य सरकारों द्वारा निर्माताओं को एम्पैनल्ड करने पर प्रतिबंध लगाया
न्यायिक एवं अन्य राज्यों का संदर्भ  उड़ीसा उच्च न्यायालय ने भी राज्य सरकारों द्वारा निर्माताओं को एम्पैनल्ड करने पर प्रतिबंध लगाया है। साथ ही, राजस्थान सरकार ने हाल ही में ट्रक मालिकों की समस्या को समझते हुए नेशनल परमिट बनाने की व्यवस्था पुनः सुचारू रूप से चालू कर दी है।

अतः आपसे विनम्र निवेदन है कि सुरक्षा खतरों और आर्थिक मंदी को देखते हुए ट्रकों के लिए वीएलआईडी की अनिवार्यता तत्काल समाप्त की जाए और नेशनल परमिट जारी करने की व्यवस्था को पूर्ववत बहाल किया जाए साथ ही इसे केवल लोक सेवा वाहनों (बसों) तक ही सीमित रखा जाए। आशा है कि आप ट्रांसपोर्ट जगत की इस गंभीर सुरक्षा चिंता को समझते हुए सकारात्मक निर्णय लेंगे।

 
 

न्यूज़ सोर्स : कमांड सेंटर की विफलता प्रदेश में अभी तक केंद्रीय कमांड सेंटर व्यवस्थित रूप से कार्य नहीं कर रहे ह