सोना निवेशकों के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन चुका : चिंतन हरिया
एवीएस न्यूज.भोपाल
वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) के टैक्स नियमों में बदलाव किया गया है। 1 अप्रैल 2026 से मैच्योरिटी पर टैक्स छूट सिर्फ उन्हीं निवेशकों को मिलेगी, जिन्होंने एसजीबी सीधे आरबीआई के जारी करते समय खरीदे हों और उन्हें पूरा समय तक होल्ड किया हो। जो निवेशक एसजीबी सेकेंडरी मार्केट से खरीदेंगे, उन्हें यह टैक्स फायदा नहीं मिलेगा। यह बात आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एएमसी , प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट, चिंतन हरिया ने कही।
उन्होंने कहाकि आज के अनिश्चित वैश्विक माहौल में सोना निवेशकों के पोर्टफोलियो का अहम हिस्सा बन चुका है। कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए समय-समय पर पोर्टफोलियो को संतुलित करना जरूरी है। ज्यादा तरलता और लचीलापन होने की वजह से गोल्ड ईटीएफ इस काम को आसान बनाते हैं और निवेशकों को बेहतर नियंत्रण देते हैं।
उन्होंने कहाकि चूंकि 2024 के बाद से नए एसजीबी जारी नहीं हुए हैं, अभी निवेश सिर्फ सेकेंडरी मार्केट के जरिए ही संभव है। ऐसे में गोल्ड ईटीएफ एक आसान और स्पष्ट विकल्प के रूप में सामने आते हैं। गोल्ड ईटीएफ सीधे सोने की कीमत को ट्रैक करते हैं। ये उच्च शुद्धता वाले असली सोने से समर्थित होते हैं, जिसे सुरक्षित वॉल्ट में रखा जाता है।
निवेशक को सोना खरीदने, संभालने या सुरक्षित रखने की चिंता नहीं करनी पड़ती। हर यूनिट आमतौर पर 0.01 ग्राम सोने के बराबर होती है, इसलिए कम राशि से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। उन्होंने गोल्ड ईटीएफ का सबसे बड़ा फायदा है आसानी से खरीद-बिक्री से। ये शेयर बाजार में ट्रेड होते हैं और इनमें आमतौर पर अच्छा ट्रेडिंग वॉल्यूम होता है।
इसलिए निवेशक जरूरत पड़ने पर जल्दी और उचित कीमत पर बेच सकते हैं। इसके उलट एसजीबी में ट्रेडिंग कम होती है, जिससे कभी-कभी बाजार मूल्य सोने की असली कीमत से कम मिल सकता है।

