सीआईआई के शिखर सम्मेलन में शामिल हुए उद्योग, सरकार, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के वरिष्ठ
अनुसंधान और नवाचार का बड़ा केंद्र बन रहा महाराष्ट्र: डॉ. अनबलगन
एवीएस न्यूज..मुंबई
महाराष्ट्र सरकार के प्रधान सचिव (उद्योग, निवेश और सेवा विभाग) डॉ. पी. अनबलगन, आईएएस ने कहा कि महाराष्ट्र आज अनुसंधान, नवाचार, उद्योग और उद्यमिता के संगम पर खड़ा है। मजबूत प्रतिभा आधार, प्रगतिशील नीतियों, विश्व स्तरीय संस्थानों और तेजी से बढ़ते स्टार्टअप इकोसिस्टम के कारण राज्य एक एकीकृत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है, जहां शोध केवल प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रहकर पेटेंट, उद्यम, रोजगार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में परिवर्तित हो रहा है।
डॉ. अनबलगन मुंबई में होमी भाभा राष्ट्रीय संस्थान (एचबीएनआई) के सहयोग से आयोजित रोजगार, उद्यमिता और स्टार्टअप अवसरों पर शोधार्थियों के शिखर सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की वास्तविक ताकत ज्ञान को अवसर से और नवाचार को प्रभाव से जोड़ने की क्षमता में निहित है।
उद्घाटन सत्र में सीआईआई महाराष्ट्र राज्य की उपाध्यक्ष आरती कुचिभटला, सीआईआई डब्ल्यूआर टास्कफोर्स ऑन एजुकेशन के अध्यक्ष एवं विश्वकर्मा विश्वविद्यालय के अध्यक्ष भरत अग्रवाल, एचबीएनआई के कुलपति प्रोफेसर यू. कामाची मुदाली, भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के बीम टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट ग्रुप के निदेशक एवं अटल इनक्यूबेशन सेंटर, बीएआरसी अनुशक्ति फाउंडेशन के अध्यक्ष मार्टिन मैस्करेनहास तथा सीआईआई की पश्चिमी क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अल्पा अंतानी उपस्थित रहे।
शिखर सम्मेलन में उद्योग, सरकार, शिक्षा जगत और अनुसंधान संस्थानों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान अनुसंधान एवं नवाचार को व्यापक आर्थिक और सामाजिक प्रभाव में बदलने की आवश्यकता पर चर्चा की गई। वक्ताओं ने रोजगार सृजन, उद्यमिता, स्टार्टअप विकास और नवाचार आधारित विकास को गति देने के लिए शिक्षा जगत और उद्योग के बीच मजबूत सहयोग पर जोर दिया।
विशेषज्ञों ने कहा कि शोधार्थियों और युवा नवोन्मेषकों के लिए मार्गदर्शन, इनक्यूबेशन सहायता, वित्तीय सहयोग और उद्योग से संपर्क नए उद्यमों के निर्माण तथा कुशल रोजगार सृजन में अहम भूमिका निभा सकते हैं। साथ ही इससे महाराष्ट्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता भी मजबूत होगी।
शिखर सम्मेलन ने उद्योग जगत और उभरती शोध प्रतिभाओं के बीच संवाद और सहयोग का मंच प्रदान किया। इसके माध्यम से नवाचार आधारित साझेदारी को बढ़ावा देने, नई प्रौद्योगिकियों की पहचान करने और भविष्य के कार्यबल एवं उद्यम विकास के लिए शिक्षा एवं उद्योग के बीच संबंध मजबूत करने पर भी बल दिया गया।






