रक्षक ही बने रहे भक्षक: प्रबंधन की लापरवाह निगरानी में दम तोड़ रहे जंगली जानवर
बजरंग बहादुर सोनी.मानपुर
उमरिया जिले के मानपुर विधानसभा मुख्यालय क्षेत्र अंतर्गत विश्व विख्यात बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व नेशनल पार्क में मंगलवार की सुबह एक युवा हांथी की मौत की खबर से समूचा क्षेत्र गमगीन हो उठा। उक्त घटना से वन्य जीव प्रेमियों में प्रबंधन की कार्यगुजारियों को लेकर खासा नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का आरोप है कि रक्षक ही भक्षक बने हुए हैं तो वन्य प्राणियों के जान पर तो सामत आएगी ही।
जानकारी अनुसार मृत जंगली हाथी की उम्र करीब 18 से 22 वर्ष के बीच बताई जा रही है जिसे टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने बीते 21 मई को विभागीय हाथियों की मदद से संजय गांधी टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू किया था, जिसके बाद इसे बांधवगढ़ लाकर रामा हाथी कैंप में रखा गया था । उस वक्त प्रबंधन द्वारा हांथी को पूरी तरह स्वस्थ वा सुरक्षित बताया गया था।
प्रबंधन ने हाथी को उसे अपने कब्जे में लिया था
जानकारी अनुसार विगत कुछ माह पहले संजय गांधी टाइगर रिजर्व के ग्रामीण क्षेत्रों में जंगली हाथियों द्वारा जमकर के उत्पात मचाया गया था ,जिसमे करीब दो से तीन ग्रामीणों की असमय मौत भी हो चुकी थी। जिसके बाद हरकत में आए प्रबंधन ने उत्पाती जंगली हांथी को चिन्हित कर उसे अपने कब्जे में लिया और भारी सुरक्षा व्यवस्था के साथ संजय गांधी टाइगर रिजर्व से बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व लाया गया। जिसे रामा हाथी कैंप में रखकर उसे अनुभवी कर्मचारियों द्वारा प्रशिक्षण देकर विभागीय कार्यों के अनुकूल बनाया जा रहा था।
प्रबंधन मामले पर लीपापोती में जुट गया
इसी दौरान उक्त जंगली हांथी की प्रबंधन के निगरानी में अचानक मौत हो गई। जिसके बाद प्रबंधन मामले पर लीपापोती में जुट गया। इतना ही नही टाइगर रिजर्व के संयुक्त संचालक पीके वर्मा ने बताया है कि मृत जंगली हाथी को जब रेस्क्यू किया गया था उसी दौरान उसे चोट आई थी, जिस वजह से हाथी की मौत होना संभावित है। हालांकि उसका उपचार किया जा रहा था पीएम के बाद स्पष्ट कारण सामने आएगा।
बांधवगढ़ प्रबंधन जंगली जानवरों की निगरानी करने में असमर्थ
सूत्रों की माने तो बांधवगढ़ प्रबंधन जंगली जानवरों की निगरानी करने में असमर्थ है जिस कारण आए दिन जंगली जानवरों की मौत हो रही है प्रबंधन अपनी गलतियां छुपाने कुछ भी बोल दे रहा है, जब की हाथी को जिस वक्त रेस्क्यू कर के लाया गया था उस वक्त हाथी को पूरी तरह सुरक्षित बताया गया था और जब उसकी मौत हो गई, तो उसे घायल बताया जा रहा है। क्यों की हांथी के मौत के बाद भी लाखों रुपए दवाइयों के नाम से कमाया जा सके और होगा भीं वहीं क्यों की प्रबंधन अपनी अवैध कमाई के लिए कुछ भी करने को तैयार है।
मामले को गंभीरता से लें, ताकि षड्यंत्र का पर्दा फास हो
सूबे के लोग मुख्यमंत्री से अपेक्षित है संबंधित मामले को गंभीरता से लिया जाए और हाथी के मौत का सही कारण स्पष्ट किया जाए, ताकि अवैध कमाई में संलिप्त प्रबंधन का पोल जनता के सामने खुल सके और प्रबंधन द्वारा बनाए गए षड्यंत्र का पर्दा फास हो सके।

