62 हजार से अधिक संपत्तियां जांच के दायरे में, व्यापारी बोले- नई नीति में मिले मिक्स्ड लैंड यूज का रास्ता


एवीएस न्यूज. भोपाल

राजधानी भोपाल में रिहायशी इलाकों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर नगर निगम की कार्रवाई ने शहर के कारोबार और रोजगार को लेकर बड़ी चिंता खड़ी कर दी है।

एक ओर सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में नगर निगम व्यावसायिक गतिविधियों को बंद और सील कर रहा है, वहीं दूसरी ओर व्यापारी और कारोबारी संगठन लंबे समय से लंबित नए मास्टर प्लान और मिक्स्ड लैंड यूज नीति की मांग कर रहे हैं। मामले में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 15 सितंबर 2026 को होनी है। नगर निगम को इससे पहले अपनी एक्शन टेकन रिपोर्ट अदालत के समक्ष प्रस्तुत करनी है। ऐसे में शहर के कारोबारियों, कर्मचारियों और आम नागरिकों की नजर अब इसी सुनवाई पर टिकी है।


  21 साल पुराना मास्टर प्लान बना सबसे बड़ा सवाल
भोपाल में मौजूदा मास्टर प्लान को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। शहर के कारोबारी संगठनों का तर्क है कि जिस प्लान के आधार पर आज भूमि उपयोग तय किया जा रहा है, उसके बाद भोपाल का बड़ा हिस्सा विकसित हो चुका है।

अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर, कोलार, नेहरू नगर, जवाहर चौक, मालवीय नगर, अवधपुरी, मिनाल, पिपलानी समेत कई इलाकों में पिछले वर्षों में बड़ी आबादी और बाजार विकसित हुए हैं। समस्या यह है कि कई स्थानों पर आज व्यावसायिक गतिविधियां लंबे समय से चल रही हैं, लेकिन भूमि उपयोग के रिकॉर्ड में संबंधित संपत्तियां अभी भी आवासीय श्रेणी में दर्ज हैं। दूसरी ओर, इन प्रतिष्ठानों में बड़ी संख्या में लोग रोजगार पा रहे हैं और कारोबारी नगर निगम तथा अन्य सरकारी व्यवस्थाओं के तहत कारोबार कर रहे हैं।
 

62 हजार से अधिक संपत्तियां जांच के दायरे में
नगर निगम के सर्वे के मुताबिक शहर में 62,550 से अधिक ऐसी संपत्तियां चिन्हित की गई हैं, जहां आवासीय भूखंडों पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई है। इनमें दुकानें, क्लीनिक, शोरूम, होटल, कैफे और अन्य कारोबारी प्रतिष्ठान शामिल हैं।नगर निगम ने 26 अगस्त तक 8,264 नोटिस जारी किए थे। इसके बाद अंतिम नोटिस और सीलिंग की कार्रवाई शुरू हुई।   


 व्यापारियों की मांग- मिक्स्ड लैंड यूज से निकले स्थायी समाधान
व्यापारियों का कहना है कि समस्या केवल अवैध व्यावसायिक गतिविधियों की नहीं, बल्कि बदलते शहर और पुराने भूमि उपयोग नियमों के बीच पैदा हुए अंतर की भी है। व्यापारिक संगठनों ने मांग की है कि सरकार ऐसा रास्ता निकाले, जिसमें आवासीय इलाकों में नियमों और सुरक्षा मानकों के साथ आवश्यक व्यावसायिक गतिविधियों की अनुमति दी जा सके।

भोपाल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज समेत व्यापारिक संगठन मिक्स्ड लैंड यूज नीति की मांग कर चुके हैं। उनका कहना है कि इससे शहर की वास्तविक जरूरत और नियोजन नियमों के बीच संतुलन बनाया जा सकता है।